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सेना में इतनी रिक्तियां क्यों ?

भारतीय सेना

समूची भारतीय सेना लगातार जवानों और अफसरों की कमी से जूझ रही है। यहां तक कि जल-थल और वायुसेना के पास पायलटों का संकट है। यह संकट ऐसे समय पर मंडरा रहा है जब भारत को पाकिस्तान और चीन सीमा की सुरक्षा से जुड़ी दोहरी चुनौतियों तथा घाटी में आतंकवाद से दो-चार होना पड़ रहा है। सेना में लगातार यह कमी चिंताजनक है। पिछले दिनों संसद में पेश की गई रक्षा मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट तथा सांसदों के रक्षा मंत्रालय से संबंधित सवाल और मंत्री महोदय द्वारा दिए गए जवाब से भी इस बात की पुष्टि होती है कि सेना में सैन्यबल, पायलट व आधुनिक हथियारों की कमी है। निश्चय ही सवा अरब की आबादी वाले देश में यह स्थिति परेशान करने वाली है।





कोई भी सेना अपने दो मजबूत स्तंभों के सहारे आगे बढ़ती है। और दुश्मन पर अपनी जीत सुनिश्चित करती है। पहला मनोबल और दूसरा अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र। सैन्यबल की कमी से दूसरे साथी का भी काम ड्यूटी पर तैनात अफसर-जवान को करना पड़ता है। इससे काम का अतिरिक्त तनाव-दबाव बढ़ता है जो मनोबल को कम करता है। सेना में ऐसे हालात एक अर्से से हैं। यह एक अनुकूल व सामान्य स्थिति नहीं कही जा सकती। रक्षा मामलों की समिति ने भी इस बात को साफ-साफ कहा है कि थल सेना में 70 हजार से अधिक पद खाली हैं। इन्हें न भरने से काम करने वालों पर ज्यादा दबाव है। समिति ने इस कमी को पूरा करने के लिए स्थायी समाधान की भी सिफारिश की है कि अगर किसी को केन्द्र और राज्य सरकार में सरकारी नौकरी चाहिए तो उसे पांच वर्ष अनिवार्य रूप से सेना की ट्रेनिंग व नौकरी करनी होगी। यह एक स्वागत योग्य अनुशंसा है। कमेटी ने संसद में प्रस्तुत की कई रिपोर्ट में यह भी कहा है कि सेना में इस कमी को भरने के लिए इस शर्त को तत्काल लागू कर देना चाहिए।

ऐसे हालात में रक्षा मंत्रालय, संघ लोक सेवा आयोग, कार्मिक विभाग (DOPT) को तत्काल पहल करने और इस दिशा में निरंतर काम करने की जरूरत है। यह सही है कि भर्ती संबंधी सेना के मानक सख्त हैं तथा उन्हें लचीला नहीं बनाया जा सकता है पर सघन भर्ती अभियान शुरू कर इस दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं। अलावा इसके देश के नौजवानों में राष्ट्रप्रेम, देशभक्ति की अटूट भावना, सैनिकों के प्रति सम्मान की सोच पैदा कर सेना में भर्ती होने का जज्बा पैदा करने की आज निहायत जरूरत है जिसे सभी को करना होगा। सेना में भर्ती के प्रति व्यापक प्रचार अभियान, करियर मेले युवाओं के साथ-साथ किशोरों के मन को भी प्रभावित करने में कारगर साबित होते हैं। ऐसे में नई सोच व नई अवधारणा के साथ काम करने की पहल जरूरी है। देश में इस बात पर भी बहस तेज करने की जरूरत है कि संविधान और सेना सर्वोच्च है। बिना इसके हम सुरक्षित नहीं हैं। यही पहल सेना को सशक्त और सबल बनाएगी तथा सैन्य बल की कमी को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगी।

 

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