vishesh

पाक के खिलाफ हो राष्ट्र शक्ति का उपयोग

भारतीय सेना के जवान

इमरान खान ने भारत को लक्षित एक वीडियो संदेश में कहा है कि पाकिस्तान ऐसी हर सूचना की जांच करने का इच्छुक है जो उसे पुलवामा हमले का दोषी ठहराती है। उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर भारत कोई भी आक्रामक कदम उठाता है तो पाक इसका जवाब देगा। इसी के साथ साथ उनकी सरकार के एक मंत्री ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल करने की चेतावनी दी।





अफगानिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत ने एक टिप्पणी में कहा कि अगर भारत ने हस्तक्षेप किया तो भविष्य के शांति प्रयासों सहित अमेरिका-तालिबान वार्ता भी खटाई में पड़ जाएगी। हमले की तैयारी कर रहे पाकिस्तान ने अपनी सेनाओं को भी एकत्र करना शुरू कर दिया है और अस्पतालों को संभावित हताहतों के लिए बेड सुरक्षित रखने को भी आगाह कर दिया है।

भारत ने पुलवामा हमले के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई की। उसने पाकिस्तान का सर्वाधिक वरीयता वाले देश (एमएफएन) का दर्जा समाप्त कर दिया और पाकिस्तान के सभी आयातों पर 200 प्रतिशत शुल्क लगा दिया। इसका तत्काल प्रभाव पड़ा। पाकिस्तान से आने वाला सीमेंट  जोकि भारत को इसका प्रमुख निर्यात था रोक दिया गया और हजारों कंटनरों और ट्रकों को वापस लौटने या वाघा पर खड़े करने के लिए मजबूर कर दिया गया।

भारत से पाकिस्तान को निर्यात होने वाला टमाटर रोक दिया गया जिससे पाक में इसकी कीमत 200 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गई। आम पाकिस्तानियों को इसका दंश महसूस होने लगा है। भारत ने सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान की तरफ जाने वाले भारतीय नदियों के पानी के प्रवाह को भी रोक देने की घोषणा की है।

पाकिस्तान ने एमएफएन दर्जा समाप्त करने के कदम का कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि उसने भारत को कभी भी ऐसा दर्जा नहीं दिया था। उसने पानी रोके जाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई क्योंकि भारत नदियों के अपने हिस्से के पानी का उपयोग कर रहा था। बहरहाल इन कदमों से पाक को काफी नुकसान हुआ है।

कूटनीतिक रूप से, भारत ने पाकिस्तान को अलग थलग करने की कार्रवाई शुरु कर दी है। इसने वित्तीय कार्रवाई कार्य बल को एक डोसियर सौंपा जिससे कि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट किया जा सके। फिलहाल यह कार्रवाई लंबित है लेकिन पाकिस्तान को चेतावनी मिल चुकी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हमले की निंदा की और पहले से ही घोषित एक आतंकवादी संगठन जेईएम को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। कई देशों ने हमले की निंदा की है। मसूद अजहर को एक वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध किए जाने की कार्रवाई अभी दूर है। चीन लगातार इस राह का सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।

पाकिस्तान ने जेईएम पर प्रतिबंध लगाने और बहावलपुर स्थित उसके परिसर को अपने कब्जे में लेने के द्वारा इसका प्रत्युत्तर दिया। यह कदम कितना कारगर होगा और जेईएम पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह देखा जाना अभी बाकी है। यह कदम बस अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आंखों में धूल झोंकने भर का कदम प्रतीत होता है।

पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई किए जाने की मांग उठ रही थी। पाकिस्तान के मंसूबों को रोकने और यह कड़ा संदेश देने के लिए कि भारत खामोश नहीं बैठेगा और उचित कार्रवाई करेगा, ये जरूरी था। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की धरती पर काफी अंदर जाकर निशानों को भेदा तथा कूख्यात आतंकी शिविर को निशाना बनाया और 200 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। पाकिस्तान ने इस घटना से इनकार किया और केवल इतना कबूला कि उनके वायुक्षेत्र का उल्लंघन हुआ है। इसने उन्हें जवाबी कार्रवाई न करने और भारत पर दबाव डालने के लिए कूटनीतिक रास्ते अपनाने का विकल्प दिया। उसे नुकसान तो हुआ है लेकिन इस इकलौती कार्रवाई से पाकिस्तान कभी भी सुधर नहीं सकता।

व्यावहारिक रूप से  भारत केवल समन्वित रूप से अपनी ताकत के सभी पहलुओं का उपयोग कर एक समग्र रणनीति के द्वारा पाकिस्तान के लिए इसे नुकसानदायक बनाने का प्रयास भर कर सकता है। इसके बावजूद जो सफलता यह अर्जित कर सकता है, उसकी भी सीमाएं हैं। राजनयिक दृष्टि से पाकिस्तान विश्व की सभी प्रमुख ताकतों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।  इसलिए उसे अलग थलग करने की कोशिशें, उस स्तर तक कामयाब नहीं हो सकती हैं जिसकी भारत अपेक्षा कर रहा है। अमेरिका को अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान की जरूरत है, जबकि चीन ने पाकिस्तान में भारी मात्रा में निवेश कर रखा है जिसकी वह अनदेखी नहीं कर सकता।

आर्थिक दृष्टि से उसके सभी सहयोगी देशों द्वारा सहायता दिए जाने के वायदों के बावजूद पाकिस्तान दुविधा में पड़ा हुआ है। सऊदी अरब ने 20 अरब डॉलर निवेश करने का समझौता किया है। इस निवेश में अभी समय है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगतार गिरता जा रहा है, और अब उसके पास दो महीनों के आयात के बराबर का ही फंड बच गया है। उसे आईएमएफ की मदद की दरकार है जिसमें भारत देरी का कारण बन सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि पाकिस्तान पर कड़ी शर्तें थोपी जाएं। भारत पाकिस्तान के साथ व्यवसाय करने वाले बहुराष्ट्रीय कंपनियों को उनके व्यय को घटाने के लिए प्रभावित कर सकता है और उन पर दबाव डाल सकता है कि ऐसा नहीं होने पर भारत के साथ उनका व्यवसाय प्रभावित हो सकता है।

सऊदी राजकुमार के दौरे से ठीक पहले ईरान के सैनिकों पर हाल का हमला इस बात का संकेतक है कि पाकिस्तान अब पूरी तरह सऊदी खेमे में है और ईरान के खिलाफ है।यह हमला सऊदी राजकुमार के दौरे के आसपास हुआ और हमलावर पाकिस्तानी नागरिक थे और इस हमले की साजिश पाकिस्तान की जमीन पर बनाई गई, यह तथ्य भारत और ईरान के लिए पाकिस्तान के खिलाफ हाथ मिलाने के लिए पर्याप्त है। इससे पाकिस्तान के लिए उसकी दोनों ही सीमाओं पर तथा उसके समस्याग्रस्त पश्चिमी प्रांतों पर समस्या खड़ी हो सकती है।

कोई भी इकलौता कदम पाकिस्तान को उसके रुख में बदलाव लाने को मजबूर नहीं कर सकता। भारत सरकार को इसके लिए एक समन्वित उपाय करना होगा। सरकार की एजेन्सियों को एक जुट होकर काम करना होगा और कई प्रकार से पाकिस्तान पर हमला करने का प्रयास करना होगा जिससे कि वह अपने नजरिये में बदलाव लाने को विवश हो जाए। फिलहाल केवल सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के खिलाफ अधिक प्रभावी साबित नहीं होगी।

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है।

ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

Comments

Most Popular

To Top