vishesh

कश्मीर मसले पर केंद्रीय गृह मंत्री की प्रतिबद्धता

कश्मीर में अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में अमित शाह का जम्मू-कश्मीर का दो दिवसीय दौरा और उसके बाद लोकसभा में कश्मीर मुद्दे पर सूबे में छह माह का राष्ट्रपति शासन बढ़ाने व अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों के लिए आरक्षण का प्रस्ताव पेश करना यह स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार इन्सानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। निश्चय ही सधे कदमों से भरी कई यह चाल आने वाले समय में कश्मीर के लिए एक सुरक्षित, स्थाई और बेहतर हालात पैदा करने में मददगार साबित होगी। देश के सभी राजनीतिक दलों खासकर कांग्रेस को इस ओर बढ़ने के लिए केंद्र सरकार को ईमानदार सहयोग देने की मंशा रखनी चाहिए। यह मंशा जम्मू-कश्मीर सूबे की राजनीतिक पार्टियों विशेष रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस व पीडीपी को भी रखनी होगी। समय की मांग है कि सूबे के राजनेता ऐसी राजनीति करें जिससे जम्मू-कश्मीर का समग्रता के साथ भला हो, न कि किसी परिवार विशेष का। एक लंबा समय हो गया कश्मीर समस्या को देखते-देखते। हासिल कुछ नहीं हुआ। घाटी के तमाम युवाओं ने अपने जीवन में वहां सामान्य हालात नहीं देखें हैं। बम-गोलियां और खून। क्या इसी के लिए राजनीति हो रही है? कभी सुरक्षाबलों के जवानों ने शहादत दी तो कभी स्थानीय नागरिकों का खून बहा। समय आ गया है कि यह बात अलगाववादी नेताओं और सूबे के कुछ राजनीतिक दलों से पूछी जानी चाहिए।





दरअसल जम्मू-कश्मीर समस्या के मूल में कई कारण है। लेकिन फिलहाल सीमा पार और सीमा के इस पार भी जिस तरह का आतंकवाद चल रहा है वह कश्मीर समस्या के समाधान में एक बाधा है। भय, दहशत, हिंसा का माहौल लोकतंत्र व आम जन-जीवन को पटरी पर वापस लाने में रुकावट पैदा करता है। केंद्र सरकार समस्या के समाधान के लिए तमाम बिंदुओं के साथ-साथ इस बिंदु पर भी काम कर रही है। जिसका स्वागत होना चाहिए। ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ के तहत घाटी में लंबे समय से फैले आतंकवाद के फन को लगभग कुचल दिया गया है। जीरो टॉलरेंस की नीति, ट्रेटर फंडिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, घुसपैठरोधी तंत्र को और मजबूत बनाने तथा अलगाववादी नेताओं से संवाद न करने से केंद्र की यह मंशा साफ झलकती है कि घाटी में स्थितियां सामान्य होने तक सरकार चुप नहीं बैठेगी। केंद्रीय गृह मंत्री का लोकसभा में यह बयान भी ‘एक राष्ट्र’ की अवधारणा की ओर ले जाता है, जिसमें उन्होंने कहा है कि धारा 370 एक अस्थाई व्यवस्था है। अगर इस भावना के साथ केंद्र सरकार राजनीति से और ऊपर उठकर राष्ट्रनीति पर काम कर रही है तो सभी को मनोयोग से साथ देना चाहिए। घाटी के उन बाशिंदों को भी जो तमाम कारणों से अलग कश्मीर का सपना पाले बैठे हैं।

घाटी के बाशिंदे भटके नौजवानों को साफ-साफ और बार-बार बताएं कि उनकी भलाई किस बात में है। यह सही है कि पिछले कुछ समय से वहां अलगाववाद-आतंकवाद एक धंधा बन जाने से एक वर्ग अपनी कश्मीरियत को ही भूल बैठा है। क्या यह सही है? केंद्र सरकार वहां के युवाओं को नौकरियां, रोजगार, पढ़ाई के अवसर आदि के जरिए मुख्य धारा में लाने का प्रयास इसलिए कर रही है कि वहां हालात मुकम्मल तौर पर सामान्य हों। इसका लाभ सूबे में दिखाई भी दे रहा है। लिहाजा इस बात की उम्मीद की जानी चाहिए कि केंद्र कि यह नीति तथा आतंकवाद पर लगातार आक्रामक प्रहार घाटी के हालात को सामान्य बनाने में सहायक होगा। पिछले दिनों घाटी में लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। यह प्रशंसनीय है। इसी परिप्रेक्ष्य में जरूरी है कि अब वहां जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव भी कराए जाएं ताकि वहां चुनी हुई सरकार काम कर सके। लेकिन यह बात विशेष रूप से ध्यान रहे कि राज्य में चुनाव कराने का निर्णय जल्दबाजी में न हो। चुनाव आयोग के आश्वस्त होने के बाद ही इस ओर कदम उठें।

Comments

Most Popular

To Top