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कश्मीर के हर गांव में इस बार फहरेगा तिरंगा

कश्मीर में बंद
फाइल फोटो

केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता व मजबूत इरादों का ही प्रतिफल है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस पर कश्मीर के हर गांव में राष्ट्रध्वज फहराया जाएगा। इससे पहले कश्मीर के अलगाववादी संगठन और आतंकी गुट हर साल स्वतंत्रता दिवस पर बंद का ऐलान करते हुए काला दिवस मनाते थे। एक समय ऐसा भी था कि श्रीनगर के लालचौक पर भी भारत की आन-बान और शान के प्रतीक तिरंगे को 15 अगस्त के मौके पर फहराना मुश्किल होता था। हो सकता है कि इस बार भी अलगाववादी-आतंकी तत्व अपनी हरकतों से बाज न आएं लेकिन केंद्र व राज्यपाल शासन को घाटी के हर गांव में तिरंगा फैलाने की योजना को अमलीजामा पहनाने में कोई कोर कसर में कमी नहीं आने देनी चाहिए। आखिर जब जम्मू-कश्मीर राज्य देश का अभिन्न अंग है तो राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत राष्ट्रीय ध्वज को कश्मीर के गांव-गाव तथा घर-घर में क्यों नहीं फहराना चाहिए ? भारत भूमि पर पाकिस्तानी झंडे का क्या काम ? इस बात को कश्मीर घाटी के पाकिस्तान परस्त लोगों को भलिभांति समझना होगा।





सच्चाई यह है कि इसी तिरंगे के नीचे रहकर तमाम कुर्बानियों के बाद हमें आजादी मिली है। संविधान बना है और लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाने का अवसर मिला है। घाटी के नागरिकों का एक बड़ा तबका देश-प्रेम, लोकतांत्रिक मूल्यों, शांति-सच्चाई व विकास से जुड़ी इस भावना को शिद्दत से समझता है और अमल करता है। तमाम कश्मीरियों का राष्ट्रगीत, राष्ट्रध्वज, राजचिन्ह, भारतीय सेना से लगाव व जुड़ाव है। इसीलिए राष्ट्रप्रेमी कश्मीरी खासी संख्या में सेना, अर्धसैनिक बल व पुलिस में भर्ती होकर राष्ट्र की सेवा अपनी प्राणों की बाजी लगाकर करते हैं। पर अफसोस है कि आतंकियों के गुट इन्हीं देशभक्त कश्मीरियों को जो सेना और सुरक्षाबलों में तैनात हैं घात लगाकर बर्बर तरीके से उनकी हत्या करते हैं। इसी साल जून माह में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में ईद की छुट्टी पर घर आए सेना के जवान मंजूर अहमद बेग, पिछले साल 28 अक्टूबर, 2018 में पुलवामा में पुलिस सब-इंस्पेक्टर इम्तियाज अहमद, 4 जून 2018 में ईद मनाने आए सेना के जवान के जवान औरंगजेब, 09 मई, 2017 को शोपियां में शादी में शिरकत करने आए 22 वर्षीय लेफ्टीनेंट उमर फैयाज की आतंकवादिय़ों द्वारा की गई बर्बर हत्या यह दर्शाती है कि आतंकियों का कोई मजहब नहीं है। उन्हें न राष्ट्रप्रेम से मतलब है न राष्ट्रध्वज से। घाटी के एक वर्ग के बाशिंदों को यह सोचना होगा कि आखिर उनके बच्चे पत्थरबाजी करते-करते आतंक की काली-अंधी गुफा की ओर क्यों जा रहे हैं ? उनका हश्र क्या हो रहा है ? सेना के आंकड़े बताते हैं कि 83 फीसदी आतंकी पत्थरबाजी की घटनाओं में शामिल थे। अगर उन्हें सही वक्त पर समझाने-बुझाने और उनमें राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने की कोशिश की गई होती तो जम्मू-कश्मीर में आज बात ही कुछ और होती। चारों ओर शांति होती, अमरनाथ यात्रा भी चल रही होती और सैलानी भी आराम से घूम-फिर रहे होते।

निश्चय ही कश्मीर घाटी में स्वतंत्रता दिवस पर प्रत्येक ग्राम पंचायत में तिंरगा फहराने की इस योजना से यहां के नागरिकों में राष्ट्रवाद की भावना पैदा होने तथा आतंकवादियों-अलगाववादियों के मनोबल में कमी आने की दिशा में कदम बढ़ेंगे। घाटी में पंच और सरपंच इस योजना में महत्वपूर्ण भूमिका इसलिए निभा सकेंगे क्यों वे चुने हुए प्रतिनिधि हैं और जमीनी स्तर पर काम कर घाटी की फिजां में विकास की खुशबू फैलाने का काम कर रहे हैं। जरूरी है कि इस अवसर पर और विस्तृत कार्यक्रमों का आयोजन हो। प्रभातफेरियां, आजादी की लड़ाई और युद्धों में शामिल स्थानीय रणबांकुरों के प्रेरक किस्से तथा घाटी के गौरवशाली इतिहास पर रोशनी डालने वाले कार्यक्रम आज के इस युवा पीढ़ी में प्रेरणा का संचार करने में मददगार साबित होंगे। यह चिंताजनक है कि घाटी के युवाओं ने वहां एक लंबे समय से सामान्य हालात नहीं देंखे हैं। खून, हिंसा, मौत, भय और खौफ का माहौल उन्हें विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ नहीं पाया है। लिहाजा यहां के बाशिंदों में राष्ट्रप्रेम की भावना को लगातार जगाने तथा उन्हें गले लगाने से ही बात बनेगी। पिछले साल 15 अगस्त पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा भी था कि सरकार कश्मीर की समस्या को गोली और गाली से नहीं गले लगाकर हल करना चाहती है। आइये हम सभी 15 अगस्त पर तिरंगा फहराएं।

 

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