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सीमा पर बंकर बनाने के काम में लानी होगी और तेजी

सीमा पर बनते बंकर
सीमा पर बंकर (प्रतीकात्मक)

यह खबर राहत देने वाली है कि सीमा पार से भारी गोलीबारी को देखते हुए स्थानीय निवासियों की जान-माल को बचाने के लिए सीमावर्ती इलाकों में बंकरों को बनाए जाने के कामों में तेजी लाई जा रही है। वैसे होना तो यह चाहिए था कि जब केन्द्र सरकार धन की मंजूरी पहले ही कर चुकी है, उपयुक्त धनराशि का आवंटन हो चुका है तो राज्य सरकार को समय रहते बंकर बनाने के लिए संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा कर लेना चाहिए था ताकि जल्द से जल्द स्थानीय नागरिकों, जान-माल मवेशी आदि की रक्षा होती और वे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बेहतर जीवन-यापन, कामकाज कर सकते।





उधर पाकिस्तान है कि मानता नहीं। उसे क्या परवाह कि उसकी गोलाबारी, फायरिंग से निर्दोष स्कूली बच्चे, खेती-किसानी करने वाले नागरिक तथा मवेशी मारे जा रहे हैं। पिछले महीने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर नौ दिन तक चली भारी गोलाबारी में 12 लोगों की मौत हो गई थी और 60 लोग घायल हुए थे। उससे पहले राजौरी में पाक सेना ने भारी गोलाबारी कर स्थानीय लोगों को निशाना बनाया था। उस दौरान भारतीय सेना को 71 स्कूलों को इसलिए बंद करना पड़ा था कि मासूम बच्चे हताहत होते। तब नौशेरा तथा लाम सेक्टर के काम्पला, पुखारी, लाम, अनवस भंडार और रत्तल बसाली इलाकों को पाकिस्तान ने अपने निशाने पर लिया था।

दरअसल पाकिस्तान की दिक्कत यह है कि वह अपनी जुबान पर टिक नहीं सकता। सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए भारत-पाकिस्तान के बीच वर्ष 2003 में संघर्ष विराम का समझौता हुआ था। शुरू में सब ठीकठाक रहा पर बाद में पाकिस्तान फिर अपने रूप में आ गया और समझौते को तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस साल अब तक पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 1,252 बार संघर्ष विराम उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। नतीजा स्थानीय निवासियों के जान-माल की क्षति। ऐसे में बंकर बनाने के काम को और त्वरित गति से करने की जरूरत है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ, सांबा, जम्मू, राजौरी और पूंछ जिले में तकरीबन 14 हजार बंकर बनाए जाने हैं। गृह मंत्रालय ने इनके निर्माण के लिए 415 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। उपलब्ध जानकारी तो यही है कि भूमिगत बंकरों के बनाने का काम अगले जुलाई महीने से शुरू हो जाएगा। ऐसे में जरूरी यह है कि गृह मंत्रालय औऱ राज्य सरकार एक मजबूत निगरानी तंत्र तथा क्रियान्वयन प्रक्रिया विकसित करे। अलावा इसके बंकर बनाने का काम करने वाली कंपनी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (NBCC) भी सीमा पर चुनौती के बीच काम को जल्द पूरा करे। देखने में आया है कि जम्मू संभाग में इस कंपनी को काम करने में दिक्कत इसलिए आई थी कि राज्य ने समय पर जमीन का अधिग्रहण नहीं किया था। ये बाधाएं राज्य सरकार को अविलंब दूर करनी होंगी ताकि समय पर काम पूरा हो सके।

भूमिगत बंकरों, सामुदायिक बंकरों का जल्द से जल्द बनना समय की मांग है। ऐसा होने से स्थानीय नागरिकों को राहत मिलेगी और पाक की गोलाबारी से उनका बचाव होगा। इस पूरी परियोजना को समय सीमा में पूरा करने से ही बात बनेगी।

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