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इस हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी

सीआरपीएफ पर हमला

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में अवंतीपोरा के गोरीपोरा इलाके में केंद्ररीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर हमले को लेकर देशवासियों की जन-भावनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ-साफ और कड़े शब्दों में कहा है कि आतंकियों ने हमला कर बहुत बड़ी गलती की है और इस गलती की उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है कि सुरक्षाबलों को पूरी स्वतंत्रता दे दी गई है। प्रधानमंत्री के इस कथन से आक्रोशित देशवासियों के मन में भरोसा होना स्वभाविक है। 40 वीर सपूतों का सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। इस समय पूरा देश सर्वोच्च नेतृत्व पर टकटकी लगाकर देख रहा है कि कब शत्रु से बदला लिया जाएगा। इस भयावह क्षति के बाद शत्रु को नाकों चने चबवाना बेहद जरूरी है। जब तक दुश्मन को करारा जवाब नहीं दिया जाएगा, उसकी कमर नहीं तोड़ी जाएगी तब तक वह ऐसे ही कारनामों को अंजाम देता रहेगा और हम नुकसान उठाते रहेंगे। शत्रु के रूप में स्पष्ट है कि वह हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है। उसकी शह और समर्थन पर ही जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन सक्रिय है। इसी ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है। यह आतंकी संगठन भारत के खिलाफ पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार है। कहा जाता है कि यह आतंकी संगठन पाकिस्तानी सेना के नियंत्रण में सीधे तौर पर काम करता है।





लिहाजा समय है हमले की साजिश समेत हुए नुकसान की व्यापक समीक्षा करने और ठोस कार्रवाई करने का। इसी के आधार पर सधे किंतु तेज कदमों से चलकर अंजाम देने से बात बनेगी। यह सही है कि पुलवामा के इस हमले से स्पष्ट है कि आतंकियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। इसी लिए भयावह और अपूरणीय क्षति हुई है। हमले की आशंका को लेकर दस दिन पहले अलर्ट जारी हुआ था। पर हमला इस तरह से होगा ऐसा नहीं सोचा गया। खुफिया एजेंसियों को और चाक-चौबंद और सतर्क रहने की जरूरत है। यह सही है कि अलर्ट जारी होने के बाद रोजाना सुरक्षा संबंधित समीक्षा हो रही थी और व्यापक उपाय किए जा रहे थे। अब यह एनआईए की गहन जांच के बाद स्पष्ट होगा कि कहां पर भारी चूक हुई है और कैसे। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद फिदायीन हमला करने में सफल हो गया ? इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठन निराशा के दौर से गुजर रहे हैं। ऑपरेशन ऑल ऑउट के तहत आतंकी और उनके कमांडर चुन-चुन कर मौत के घाट उतारे जा रहे हैं। लेकिन फिर भी देखना होगा कि आखिर सीमा के उस पार से मिल रही शह और समर्थन तथा सीमा के इस पार भी आतंकियों के पोषक तत्वों से कड़ाई निपटकर आतंक के फन को कैसे कुचला जाए ?

पुलवामा हमले के बाद इस घड़ी में पूरा देश सुरक्षाबलों और उनके परिजनों के साथ है, ऐसा सोशल मीडिया पर दिखी जन-भावनाओं के बाद समझा जा सकता है। एक बात और गौर करने तथा समझने की है कि उड़ी हमले के बाद सीमा पार की गई कार्रवाई से अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। कहा जा सकता है कि इस सर्जिकल स्ट्राइक का पाकिस्तान की सेहत पर ज्यादा असर नहीं पड़ा तथा वह आतंकी संगठन के माध्यम से भारत को नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आया और पुलवामा जैसा जघन्य हमला हो गया। आज जरूरत है आतंकियों और उनका पोषण करने वालों को कड़ा सबक सिखाने की। चाहे वह सीमा के उस पार हो या इस पार। कड़े कदम उठाने से ही बात बनेगी। ऐसे में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शौर्य और पराक्रम को भी सलाम करना होगा जिसमें इस सशस्त्र बल ने पुलवामा हमले के मामले में ट्वीट कर कहा है- ‘ना हम भूलेंगे, ना माफ करेंगे, इस जघन्य हमले का बदला लिया जाएगा।’

 

 

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