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समर नीतिः दुश्मन देशों के बीच रिश्ते विकसित करने की कला

भारत के आसपास और सुदूर इलाके में भी कई देश ऐसे हैं जिनके बीच आपस में दुश्मनी होती है और दोनों पक्षों के देशों के साथ दोस्ती की कोशिश की जाए तो दूसरा पक्ष नाराज हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय सम्बन्ध भी बहुत कुछ घरेलू और मुहल्ले के रिश्तों की तरह निर्धारित होते हैं लेकिन यदि दो दुश्मन देशों के साथ दोस्ती करनी है तो उसे निभाने के लिये अपने में भी जरूरी आर्थिक औऱ सैनिक ताकत होनी चाहिये। यही वजह है कि भारत आज दो दुश्मन देशों के साथ गहरी दोस्ती का रिश्ता बना कर उसे निभाने में कामयाब होता है। अक्सर दो दुश्मन देशों के साथ दोस्ती निभाना काफी मुश्किल हो जाता है। अरब मुल्कों में ही देखें। वहां सऊदी अरब और ईऱान के बीच घोर दुश्मनी है लेकिन भारत की दोनों देशों के साथ अच्छी दोस्ती है। पिछले साल सऊदी अरब के प्रिंस के भारत आगमन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद हवाई अड्डे पर अगवानी की तो अब कुछ महीनों के भीतर ईरान के राष्ट्रपति का भारत आने का कार्यक्रम बन रहा है। इसी तरह ईरान और इजराइल की घोर दुश्मनी है लेकिन भारत ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू का भारत दौरे में अप्रत्याशित स्वागत किया। इजराइल के साथ दिखाई गई इस आत्मीयता से यह संदेश नहीं जाए कि भारत इजराइल के दुश्मन फिलस्तीन को नजरअंदाज कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी अगले महीने के दूसरे सप्ताह न केवल फिलस्तीन बल्कि ओमान और संयुक्त अरब अमीरात का भी दौरा करेंगे। एक साथ तीन मुस्लिम देशों के प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से भारत यह संदेश अरब मुल्कों में देगा कि भारत एक तटस्थ की तरह सभी देशों के साथ समान स्तर के रिश्ते विकसित करना चाहता है। अरब मुल्कों में भारतीय मूल के 60 लाख से अधिक कामगार रहते हैं जिनके हितों पर यदि कुठाराघात होता है तो भारत के हितों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।





साफ है कि यदि इजराइल के साथ रिश्ते जरूरी हैं तो अरब मुल्कों को भी खुश रखना होगा। इजराइल भारत की सैनिक ताकत में अहम योगदान करता रहा है और अब वह भारत की खेती की उत्पादकता को बढ़ाने के लिये तत्पर है और इजराइली तकनीक करोड़ों भारतीयों को पीने का साफ पानी भी मुहैया कराने की तकनीक दे कर भारत में सामाजिक आर्थिक विकास में अहम योगदान दे सकता है। इसी तरह रूस और अमेरिका के बीच प्रतिद्वंद्विता रहती है लेकिन भारत की दोनों के साथ गहरी छन रही है। रूस भारतीय सेना को पारम्परिक हथिय़ारों की मदद के अलावा परमाणु बिजली से चलने वाली पनडुब्बी बनाने में भी मदद कर भारत की सामरिक ताकत के इजाफा में संवेदनशील मदद दे रहा है। दूसरी ओर अमेरिका ने भी भारत की सामरिक ताकत को बढ़ाने के लिये समुद्र टोही विमानों से लेकर बड़े परिवहन विमान सप्लाई किये हैं और लड़ाकू हेलीकाप्टर देने को मंजूरी दी है। इस तरह भारत अपनी सामरिक ताकत बढ़ाने के लिये दोनों बड़ी ताकतों से सैनिक मदद लेने से नहीं हिचक रहा  है।

आज की समर नीति की कामयाबी इसी में है कि अपने राष्ट्रीय हितों को बचाने के लिये आपस में दुश्मनी निभाने वाले और प्रतिद्वंद्वी देशों के साथ समान स्तर के रिश्ते विकसित हों। इजराइली प्रधानमंत्री का भारत में भारी स्वागत और फिर इजराइल से लगे फिलस्तीन जा कर इजराइल के दुश्मन से दोस्ती की बातें करने की कला भी एक समर नीति है जिसका मुख्य उद्देश्य अपने सामरिक औऱ आर्थिक हितों को मजबूती देना होता है।

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