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सर्जिकल स्ट्राइक 2: नपा तुला मगर महत्वपूर्ण कदम

लड़ाकू विमान मिराज
फाइल फोटो

रक्षक विशेषज्ञ की कलम से..

पुलवामा, 14 फरवरी : कार बम से सीआरपीएफ के 44 जवानों की जान जाना कश्मीर में तीन दशक से चल रहे छद्म युद्ध में एक बड़ा आघात था। पूरा देश जहाँ एक ओर शोक ग्रस्त था वहीं सब तरफ से जवाबी कार्रवाही की मांग भी उठ रही थी। मसूद अजहर के नेतृत्व वाला आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद, जो कि पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां नियंत्रित करता है, पुलवामा में हुए इस हमले का ज़िम्मेदार है। संगठन ने हमले के तुरंत बाद ज़िम्मेदारी भी ली थी। हर बार की ही तरह आतंकियों का ये मानना था कि भारत जवाबी कार्रवाही नहीं करेगा। ये हमारी राजनीतिक इच्छाशक्ति पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह भी था। जवाबी कार्रवाही के अभाव में जहां अपने सैनिकों और नागरिकों का मनोबल गिरता है, वहीं आतंकी संगठनों और पाकिस्तान को और बल मिलता है। पुलवामा हमले ने हमारे पूरे तंत्र को हिलाया और बदले की कार्रवाई के तहत पाकिस्तान से आर्थिक सम्बन्ध तोड़ने की घोषणा की गयी और नदियों के पानी के बंटवारे के समझौते पर पुनर्विचार करके उसमें कटौती की घोषणा भी की गयी। इसके साथ ही यूरोप, अमरीका, इजराइल, फ़्रांस और यहाँ तक कि सऊदी अरब ने भी आतंक के विरुद्ध भारत का समर्थन किया और भारत द्वारा बदले की किसी भी कार्रवाही को उचित ठहराया।





सर्जिकल स्ट्राइक 2 : सितम्बर, 2016 में हुए उड़ी हमले के खिलाफ हमारी थल सेना की टुकड़ियों ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की और आतंकी ठिकानों को भारी क्षति पहुंचायी। थल सेना ने नियंत्रण रेखा के नज़दीक स्थित आतंकी शिविरों पर हमला किया और आतंकियों को मार गिराया। थल सेना की कार्रवाई की तैयारी में लंबा समय लगता है और उसकी पहुँच सीमित होती है। साथ ही अपने सैनिकों की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा होता है। वहीं वायुसेना द्वारा न केवल शत्रु के इलाके में भीतर तक जा कर नुकसान पहुँचाया जा सकता है बल्कि इसमें समय भी कम लगता है और अपनी हानि भी कम से कम होती है। बालाकोट स्थित आतंकी शिविर विभिन्न आतंकी संगठनों के लिए प्रशिक्षण का केंद्र है, जहाँ से प्रशिक्षित आतंकी न केवल भारत बल्कि अफगानिस्तान और ईरान में भी आतंकी हमले करते रहे हैं। नियंत्रण रेखा से 50 किलोमीटर दूर स्थित शिविर में आतंकी खुद को सुरक्षित महसूस करते थे क्यूोंकि यह इलाका थल सेना की हद से बाहर है। ऐसे में 200-300 आतंकियों और उनके प्रशिक्षकों का एकमुश्त मारा जाना एक बड़ी उपलब्धि है। इस से आतंकियों, पाकिस्तानी सेना, पाकिस्तानी सरकार और आम जनता के साथ ही विश्व के अनेक देशों को भारत के आतंक के विरुद्ध दृढ निश्चय का सशक्त संकेत गया है।

आगे क्या? विदेश सचिव ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया है कि यह हमला आतंकियों के विरुद्ध किया गया है और हमारा उद्देश्य पाकिस्तानी आम जनता को नुकसान पहुँचाना नहीं था। साथ ही ये हमला पाकिस्तानी सरकार और सेना के लिए चेतावनी भी है कि वे आतंक के विरुद्ध कार्रवाही करें और आतंकियों को समर्थन देना बंद करें। पाकिस्तान के लिए विकट और विषम स्थिति है क्योंकि आतंक का पूरा तंत्र पाकिस्तानी सेना की छत्रछाया में ही चलता है। युद्ध जैसी स्थिति तो है पर इस के युद्ध में बदलने के आसार कम हैं क्योंकि पाकिस्तान आर्थिक, सैनिक और राजनीतिक, किसी भी तौर पर युद्ध नहीं झेल सकता। साथ ही पाकिस्तान पर विश्व की अन्य शक्तियों का भी दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में भारत द्वारा प्रदर्शित संयम और साथ ही राजनीतिक इच्छाशक्ति ने हमारी छवि को मज़बूत किया है। पाकिस्तानी सरकार द्वारा अपने नागरिकों को पिछले कई दिन से युद्ध के लिए तैयार रहने की अपील की जा रही थी और हाल ही में वहाँ के राष्ट्रपति द्वारा दिया गया शांति प्रस्ताव ये स्पष्ट करता है कि भारतीय जवाबी कारवाही से वहाँ भय व्याप्त है। सीमा पर सेनाओं का जमावड़ा भी चल रहा है पर युद्ध अभी विकल्प नहीं है। हमारी सेनाओं ने एक बार फिर अपने सामर्थ्य और मारक क्षमता का परिचय दिया है जो कि कश्मीर और पाकिस्तान के अलगाववादी तत्वों के लिए चेतावनी है। इन सब के बीच समय है किसी भी बड़े आतंकी हमले से सचेत रहने का।

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