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समर नीति: हिंद महासागर में चीन का स्वागत

हिंद महासागर में चाइना युद्धपोत

किसी मेहमान के अपने घर या इलाके में आगमन पर स्वागत कहा जाए तो वह खुश हो जाएगा लेकिन इस स्वागत शब्द से चीन जरूर चिढ़ गया होगा। पिछले सप्ताह भारतीय नौसेना द्वारा स्वागत शब्द का रणनीतिक इस्तेमाल काफी रोचक रहा। वास्तव में स्वागत शब्द का रणनीतिक इस्तेमाल रक्षा राजनय का एक नया आयाम कहा जा सकता है। पिछले सप्ताह जब हिंद महासागर के इलाके में चीनी नौसेना के तीन युद्धपोतों का एक बेड़ा प्रवेश किया तो भारतीय नौसेना द्वारा स्वागत कहे जाने पर चीनी नौसैनिक कमांडर जरूर चौंक गए होंगे।





चीनी नौसैनिक पोत अदन की खाड़ी में समुद्री डाकुओं के खिलाफ 2008 से ही तैनात किये जा रहे हैं। उसी साल भारत ने भी अपने पोत समुद्री डाकुओं के खिलाफ अभियान में लगाया था। वास्तव में समुद्री डाकुओं के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान के बहाने चीन ने हिंद महासागर के इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाई और यहां तक कि इस अभियान के तहत अपनी पनडुब्बियां भी भेजीं जिसके बारे में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा था कि क्या पनडुब्बियों से समुद्री डाकुओं को पक़ड़ा जाता है? लेकिन हिंद महासागर में समुद्री डाकुओं के शिकार पर निकले चीनी नौसैनिकों से कहाः हैपी हंटिंग यानी शिकार के मजे लो।

सही मायने में देखा जाए तो हिंद महासागर में समुद्री डाकुओं के शिकार के बहाने चीनी नौसेना ने हिंद महासागर को अपना शिकारगाह बना लिया और यहां के सागरीय देशों पर अपना प्रभुत्व जमाने की रणनीति को अंजाम देने लगी। भारतीय सामरिक हलकों में जब इस पर चिंता जाहिर की जाने लगी तो चीन ने कहना शुरू किया कि हिंद महासागर यानी इंडियन ओसन का मतलब यह नहीं कि यह समुद्री इलाका भारत का हो गया।

लेकिन चीन को भी समझना चाहिये कि उसके समुद्र तटीय इलाके का नाम साउथ चाइन सी होने का मतलब यह नहीं कि दक्षिण चीन सागर चीन का हो गया। किसी देश के समुद्र तट से केवल 12 समुद्री मील दूर तक ही उस देश का प्रादेशिक अधिकार होता है और तट से दो सौ मील तक उस देश का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र यानी एक्सक्लूजिव इकानोमिक जोन कहा जाता है। इस इलाके के संसाधनों का अधिकार उस देश को होता है लेकिन वहां से दूसरे देशों के पोतों की आवाजाही पर किसी तरह की रोकटोक वह नहीं कर सकता।

यह 1982 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि (अनक्लास) से निर्धारित होता है और इसे सारी दुनिया मानती है लेकिन चीन इसे नजरअंदाज करते हुए दक्षिण चीन सागर के अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाके में द्वीपों पर कब्जा कर रहा है और वहां कृत्रिम द्वीपों का निर्माण कर वहां सैन्य सुविधाएं स्थापित कर रहा है। दक्षिण चीन सागर के इलाके पर अपना प्रादेशिक अधिकार बताने के लिये ही करीब सात साल पहले चीनी नौसेना ने दक्षिण चीन सागर से गुजर रहे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को चेतावनी दे दी थी कि आप चीनी समुद्री इलाके में प्रवेश कर रहे हैं।

लेकिन चीनी युद्धपोत जब हिंद महासागर में प्रवेश कर रहे थे तो भारतीय नौसैनिक कमांडरों ने उन्हें चेतावनी देने के बदले स्वागत किया। किसी का स्वागत तो कोई अपने देश,  घर या इलाके में ही करता है। इसलिये जब हिंद महासागर में चीनी नौसैनिक घुसे तो उनका स्वागत का संदेश भेजकर उन्हें यह आभास दिया गया कि हिंद महासागर भारत का आंगन यानी स्वाभाविक समुद्री इलाका है जहां प्रवेश करने पर भारतीय नौसेना ने चीनी नौसेना का स्वागत किया।

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