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समर नीति: मसूद मसले पर पाक को शर्मिंदगी लेकिन बेहयाई बरकरार

इमरान खान और मसूद अजहर

संयुक्त राष्ट्र द्वारा  पाकिस्तानी नागरिक मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने औऱ इसके खिलाफ तरह तरह के प्रतिबंध लगाने के ऐलान के बाद भी पाकिस्तान उस जली हुई रस्सी की तरह बर्ताव कर रहा है जिसकी ऐंठन जलने के बाद भी नहीं गई। किसी देश का नागरिक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया जाए लेकिन पाकिस्तान के हुक्मरानों को कोई  शर्म नहीं आ रही। वह अपनी शर्मिंदगी पर खिलखिला कर हंसने का नाटक कर रहा है  और  कह रहा है कि उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित तो किया गया है लेकिन भारत की वजह से नहीं। क्योंकि इसमें भारत या जम्मू कश्मीर या पुलवामा का संदर्भ नहीं दिया गया था। पाकिस्तान बड़ी बेशर्मी से उस बेहया की  तरह कह रहा है कि उसे फटकारा तो क्या हुआ, उसका कुछ नहीं बिगड़ा। पाकिस्तान ने तो यहां तक कह दिया कि  वास्तव में यह उसकी राजनयिक जीत है और आतंकवादी घोषित करने के पीछे भारत से कोई मतलब नहीं।





वास्तव में पाकिस्तान की जीत इस बात में कही जा सकती है कि भारत को मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करवाने में दस साल से भी अधिक लग गए। पाकिस्तान यह बताना चाह रहा है कि भारत इतना कमजोर देश  है कि उसकी बात बड़ी मुश्किल से सुनी जाती। पाकिस्तान के पीछे चीन जैसी महाशक्ति की ताकत है औऱ हमेशा रहेगी और भारत पाकिस्तान का कुछ नहीं बिग़ाड पाएगा। निस्संदेह मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करवाने में भारत को काफी मशक्कत करनी पडी। भारत को अपनी पूरी राजनयिक ताकत झोंकनी पड़ी तभी जा कर मसूद अजहर आतंकवादी घोषित हो सका।

लेकिन पाकिस्तान भारत की इस जीत पर इसलिये हंस रहा है कि मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करवा कर न तो भारत पाकिस्तान का कुछ बिगाड़ सकता है औऱ न ही मसूद अजहर का। पाकिस्तान यह साफ संदेश दे रहा है कि साल 2008 के मुम्बई आतंकवादी हमलावरों के मुख्य षड्यंत्रकारी लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक मसूद अजहर का भारत ने क्या बिगाड़ लिया। हाफिज सईद जिस तरह खुलेआम पाकिस्तान में अपनी गतिविधियां चलवा रहा है और उस पर दस लाख डालर का ईनाम अमेरिका द्वारा रखने के बावजूद जिस तरह वह अमेरिका औऱ भारत को खुलेआम  धमकाता रहता है उसी तरह मसूद अजहर भी छुट्टा घूमता  रहेगा और पाकिस्तान की धरती से भारत विरोधी अपनी आतंकी गतिविधियो का संचालन करता रहेगा।

पाकिस्तान के इस दोमुंहेंपन को अमेरिका सहित सभी देश समझते हैं लेकिन वे एक हद तक ही पाकिस्तान पर दबाव डालना चाहते हैं क्योंकि पाकिस्तान की भूसामरिक स्थिति ऐसी है कि दुनिया की बड़ी ताकतें उसे नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। भले ही पाकिस्तान के और भी नागरिक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित होते रहें पाकिस्तान की  ब्लैमकमेल  करने की ताकत पर कोई फर्क नहीं पड सकता। अपनी आतंकी ताकत के बल पर ही पाकिस्तान ने  आज अफगानिस्तान में अमेरिका को झुकने को मजबूर किया है। जिस तालिबान को अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान से उखाड़ फेंका उसी तालिबान के आगे वह चिरौरी कर रहा है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज को शांति से बाहर निकलने दे। लगता  है कि तालिबान को अफगानिस्तान में वापस लाने की  पाकिस्तान की यह रणनीति जल्द ही कामयाब होगी और तब पाकिस्तान आतंकवाद का खुल कर भारत के खिलाफ अपनी राज्य की नीति के तौर पर इस्तेमाल करेगा।

यही वजह है कि पाकिस्तान मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र के फैसले पर हंस रहा है और इसे भी वह अपनी राजनयिक जीत बता रहा है। कितनी विडम्बना है कि घोर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा देश अपनी जनता को जम्मू कश्मीर के नाम पर  झांसा देना जारी रखे हुए है। पाकिस्तान की जनता अपने सैन्य हुक्मरानों की असलियत समझती है लेकिन वह कुछ बोल नहीं सकती।

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