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समर नीति: आधुनिक युननान- भारत चीन से सबक ले

Yunnan City

चीन के  युननान प्रांत का भूगोल और वातावरण ठीक वैसा ही है जैसा भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों का। करीब तीन दशक पहले चीन के इस पिछड़े इलाके का भ्रमण करने का मौका मिला था। तब युननान की राजधानी खुनमिंग एक कस्बा की तरह लगती थी। पिछले सप्ताह जब इस पर्वतीय जंगली राज्य को  देखने का दोबारा मौका मिला तो आंखें चौंधियां गई। तीन दशक के दौरान इस राज्य का चीन सरकार ने बेहतर योजना और विकास कार्यक्रमों से ऐसा कायाकल्प कर दिया है कि यह वही खुनमिंग पहचान में नहीं आता। यहां के एक्सप्रेस वे और हाईवे, बड़े बड़े म़ॉल, ऊंची ऊंची अट्टालिकाएं, हर कोने पर दिखने वाले फाइव स्टार होटल आदि से पटे इस महानगर को किसी भी यूरोपीय या अमेरिकी शहर से कम नहीं दिखाते।





दक्षिण पूर्व एशिय़ा, दक्षिण एशिया और चीन के जंक्शन पर स्थित चीन का यह युननान प्रांत अब इस  इलाके के सभी पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक व व्यापारिक आदान प्रदान का गढ़ बन चुका है। चीन ने अपने राष्ट्रीय विकास की रणनीति में राज्यों को जो भूमिका प्रदान की है वह युननान प्रांत की सक्रियता से दिखती है। युननान प्रांत के  पड़ोसी देशों के साथ जिस तरह के रिश्ते बन चुके हैं वह दिखाते हैं कि चीन की केन्द्रीय सरकार किस तरह अपने गाइडेंस में सीमांत राज्यों को अहमियत प्रदान करती है और उन्हें विकास का मौका देती है। आखिर राज्यों का विकास होगा तो राष्ट्र का भी विकास होगा। सम्पूर्ण देश के सकल घरेलू उत्पाद में राज्यों का हिस्सा बढ़ाने की यह रणनीति  भारत को चीन से सीखनी होगी।

जून के दूसरे सप्ताह में यहां की राजधानी खुनमिंग में आयोजित पांचवां चाइना साउथ एशिया एक्सपो क्षेत्र के सभी पड़ोसी देशों को इकट्ठा करने में कामयाब हुआ जिसमें भारत के अलावा म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मालदीव और वियतनाम जैसे देशों के उद्योग जगत ने भाग लिया। इस एक्सपो के जरिये युननान प्रांत को  पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध  बनाने में मदद मिली जिसका लाभ यहां के करीब साढ़े चार करोड़ आबादी को ही अधिकतर मिलेगा। चीन ने इस तरह दूरदराज के सीमांत पड़ोसी राज्य को विकास का गढ़ बना कर पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की है उससे भारत को सबक सीखना होगा।

भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को हालांकि भारत की नई एक्ट ईस्ट नीति की मुख्य धुरि बताया जा रहा है लेकिन यह सब कागजी ही लगता है। उत्तर पूर्वी राज्यों का तेजी से आर्थिक विकास तभी मुमकिन होगा जब इन्हें चीन सहित दूसरे पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक तौर पर एकीकृत कर दिया जाए। इसके लिये जरूरी होगा कि उत्तर पूर्वी  राज्यों में ढांचागत विकास का वही स्तर हासिल किया जाए जो युननान प्रांत के विभिन्न शहरों में दिखता है। उत्तर पूर्वी राज्यों को पड़ोसी देशों के साथ जोड़ने के लिये  एक्सप्रेसवे  और हाईवे का जाल बिछाना होगा और हवाई यातायात को इतना सुगम बनाना होगा कि इस इलाके के आम लोग और व्यापारी सुविधानुसार सीमा पार आ जा सकें।

युननान प्रांत मुख्यतः  अल्पसंख्य़क पाई जाति का इलाका है  जिन्हें विकास के जरिये राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ने में चीन की सरकार को भारी कामयाबी मिली है। भारत के उत्तर पूर्वी राज्य भी कई जनजातीय समूहों का इलाका है जो पिछड़ेपन और आर्थिक बदहाली  की वजह से राष्ट्र की मुख्यधारा से कटे हुए हैं।  यहां के लोगों और  इस इलाके को आधुनिक दुनिया जैसा बनाने और आर्थिक तौर पर सक्रिय करने की रणनीति पर गम्भीरता से काम किया जाए तो इससे भारत आर्थिक और सामरिक तौर पर मजबूत  ही होगा।

 

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