vishesh

समर नीतिः सैनिक और कोमल ताकत

गंणतंत्र दिवस

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत राजपथ पर आकर्षक परेड आयोजित कर अपनी सैनिक और कोमल ताकत का प्रदर्शन करता है और इस मौके पर जिस देश के राष्ट्रप्रमुख मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित होते हैं वह अपने और अपने देश के लिये विशेष गौरव की अनुभूति करते हैं। खासकर जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गणतंत्र दिवस परेड को सुशोभित किया भारत की गणतंत्र दिवस परेड पर दुनिया भर के सामरिक पर्यवेक्षकों की नजर पडऩे लगी है। इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड पर एक नहीं एक साथ दस देशों के राष्ट्रप्रमुख विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद होंगे तो वह न केवल   हर भारतीय के लिये गर्व का क्षण होगा बल्कि उन दस देशों के लोगों के लिए भी जिनके भारत के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्ते रहे हैं। आज दक्षिण पूर्व एशिया के वे ही देश भारत की ओर उत्सुक निगाह से देख रहे हैं और भारत से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि न केवल उनकी सैन्य और आर्थिक ताकत मजबूत करें बल्कि उन्हें उनके इलाके में सिर ऊंचा कर रहने की ताकत प्रदान करें।





पूरे हिंद प्रशांत इलाके के देश भारत से नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की अपेक्षा कर रहे हैं ताकि उनके इलाके में दादागिरी दिखाने वाले देशों के कोप से अपनी अस्मिता बचा सकें। भारत को हिंद प्रशांत की एक अग्रणी ताकत के तौर पर देखा जाने लगा है इसलिये भारतीय नेतृत्व को देखना होगा कि इस कसौटी पर खरा उतरने के लिये न केवल अपनी सैनिक और आर्थिक ताकत को मजबूती देनी होगी बल्कि अपनी साफ्ट पावर यानी कोमल ताकत को भी इस तरह फलने-फूलने देने का माहौल प्रदान करना होगा कि भारत अनेकता में एकता की आदर्श मिसाल दुनिया के सामने पेश कर सके। 20 वीं सदी का वह जमाना गया जब ताकतवर देश अपनी ताकत की धौंस परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और नौसैनिक पोतों के बल पर दिखाते थे। आज 21 वीं सदी में केवल सैनिक ताकत से ही कोई देश अपनी सामरिक ताकत नहीं बता सकता। आज के युग में सामरिक ताकत बनने के लिये साफ्ट पावर को भी साथ ले कर चलना होगा। पिछली सदी में हमने देखा है कि किस तरह हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें रखने वाला सोवियत संघ अमेरिका से कोई सैनिक युद्ध लडे बिना ही बिखर गया।

भारत की साफ्ट पावर भारत की सांस्कृतिक विविधता और अनेकता में एकता से पैदा होता है। आज भारत अपने बॉलीवुड और योग आदि के साफ्ट पावर का गुणगान करता है और निस्संदेह दुनिया भर में इस साफ्टपावर ने भारत के प्रति विशेष आकर्षण पैदा किया है लेकिन भारतीय नेतृत्व को यह भी देखना होगा भारत की सांस्कृतिक विविधता को समुचित तौर पर फलने-फूलने का मौका दिया जाए। समग्रता में भारत की सामरिक ताकत को मजबूती तभी मिलेगी जब दुनिया भर के निवेशक यह देखेंगे कि भारत ऐसा बगीचा है जहां तरह-तरह के फूल खिलते है। ऐसे ही महौल में भारत दुनिया के निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। सामाजिक समरसता का माहौल किसी देश के आर्थिक विकास में उत्प्रेरक का काम करता है इसलिये भारत को सामरिक ताकत बनने के लिये समग्रता में अपनी सैनिक ताकत के विकास के साथ-साथ आर्थिक और कोमल ताकत से दुनिया को प्रभावित करना होगा।

Comments

Most Popular

To Top