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समर नीति: आसियान इलाके में भारत का सामरिक कद ऊंचा हुआ

स्विटजरलैंड के दावोस में दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं और सबसे धनाढ्य उद्योगपतियों के बीच भारत का परचम लहराने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 और 26 जनवरी को भारत के पड़ोस में दस देशों के बीच भारत का ध्वज फहरा कर इलाके के दूसरे देशों में भारत को सामरिक ईर्ष्या की वजह बना दी। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के  दस सदस्यों में से एक म्यांमार की जमीनी सीमाएं भारत से मिलती हैं तो इसके कई अन्य सद्स्य देशों की भी समुद्री सीमाएं भारत से मिलती हैं। इस नाते ये सभी देश भारत के उतने ही नजदीक कहे जा सकते हैं जितने दक्षिण एशिय़ा के देश। आसियान के सभी राष्ट्रप्रमुखों को एक साथ भारत बुलाने से  क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का डंका बजा जिसकी अहमियत इस बात में है कि  भारत का सामरिक कद और ऊंचा हो गया है।





दावोस में जहां प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के उद्योगपतियों से मुखातिब हुए वहीं नई दिल्ली में भारत आसियान शिखर बैठक के दौरान दस राष्ट्रप्रमुखों को राजपथ पर परेड के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर बैठा कर भारत ने न केवल इनके साथ रिश्ते घनिष्ठ बनाए बल्कि इन देशों के लोगों को भी प्रभावित करने में कामयाब हुआ कि भारत इनका एक सच्चा दोस्त बन सकता है। इस दौरान  दोनों पक्षों के व्यावसायिक समुदायों के बीच भी आपसी रिश्तों को गहरा बनाने पर गहन मंथन हुआ। इससे आसियान के सदस्य देशों के बीच भारत की पैठ और गहरी होगी। आसियान देश चीन के भी जमीनी और समुद्री पड़ोसी हैं इसलिये आसियान के साथ गहरे रिश्ते बनाने की होड़ भी भारत और चीन के बीच रहती है लेकिन यह कहा जाए कि  इस होड़ में चीन कहीं आगे है तो गलत नहीं होगा। चीन के साथ आसियान का आपसी व्यापार पौने पांच सौ अरब डालर का है जबकि भारत का आसियान के साथ व्यापार महज 71 अरब डालर का। हम समझ सकते हैं कि चीन किस स्तर तक आसियान में घुसपैठ कर चुका है। इसका एक नतीजा यह भी निकला है कि आसियान के छोटे देशों पर चीन का दबदबा इतना बढ़ गया है कि वे चीन के सामरिक हितों के खिलाफ बोल नहीं पाते।

यही वजह है कि दक्षिण चीन सागर के अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाके को चीन अपना समझने लगा है। चूंकि दक्षिण चीन सागर का अंतरराष्ट्रीय स्वरूप बनाए रखना भारत के सामने एक बड़ी चिंता की बात है और भारत के लिये चुनौती भी कि किस तरह दक्षिण पूर्व एशियाई देशों को चीन के प्रभाव में जाने से रोका जाए। दक्षिण पूर्व एशिया के देश चीन से आर्थिक औऱ सामरिक चंगुल से मुक्त होना चाहते है और भारत के साथ आर्थिक औऱ सामरिक रिश्ते गहरे कर चीन के असर को संतुलित करना चाहते हैं। इसलिये भारत के लिये यह मौका है कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ राजनीतिक औऱ आर्थिक रिश्ते गहरे करने के लिये अपनी एक्ट ईस्ट नीति को और प्रभावी बनाए।

चीन भारत की चाल अच्छी तरह समझता है इसलिये उसकी नजर नई दिल्ली में हुई आसियान जमघट पर थी। चीन का ऐसा करना स्वाभाविक है लेकिन भारत की यह सतत कोशिश होनी चाहिये कि दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ सामरिक रिश्ते गहरे करते रहें तभी  भारत दक्षिण चीन सागर में अपने सामरिक औऱ आर्थिक हितों की रक्षा कर सकता है।

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