vishesh

समर नीति: इमरान खान हाथ मलते रह गए

पीएम मोदी SCO सम्मेलन में

किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में 13 और 14 जून को शांघाई सहयोग संगठन (SCO) की शिखर बैठक में भारत ने पाकिस्तान को फिर सख्त संदेश दिया है। बिश्केक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से हाथ भी मिलाने से इनकार कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी दोहरी नीति का पर्दाफाश किया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताया है कि किस तरह इमरान खान एक ऐसे देश की अगुवाई कर रहे हैं जो न केवल आतंकवादी संगठनों को पनाह देता  है बल्कि इनका इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर आतंकी हमले के लिये करता है और जब संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में इनकी निंदा होती है और इन पर प्रतिबंध लगाने की बात होती है तो पाकिस्तान इनके बचाव में हर तरह के हथकंडे अपनाने लगता है। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर  को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित करवाने के प्रस्ताव में पाकिस्तान ने जो चालें चलीं वे सबको पता है।





ऐसे देश के नेता के साथ वैसा ही बर्ताव किया जाना चाहिये जैसा कि किसी अपराधी गिरोह के सरगना के साथ किया जाता है। भले ही वह एक सम्प्रभु देश का नेता हो वह वास्तव में आतंकवादी संगठनों का संरक्षक ही है। उसकी वजह से विश्व शांति औऱ स्थिरता भंग होती है। आज पाकिस्तान की वजह से ही अफगानिस्तान अस्थिर बना हुआ है। विश्व समुदाय को ऐसे देश के साथ भी साफगोई के साथ बात करनी चाहिये।

पाकिस्तान के किसी प्रधानमंत्री का किसी भारतीय नेता ने इस तरह पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपमान किया है। अब तक भारतीय नेता पाकिस्तानी नेताओं के साथ आदर से बातें करते रहे हैं लेकिन इसका कोई सकारात्मक असर पाकिस्तान के रवैये पर पड़ते हमने नहीं देखा है। वास्तव में  इमरान खान जब से प्रधानमंत्री बने हैं भारत के साथ बातचीत और मेलमिलाप की प्रक्रिया बहाल करने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं। लेकिन भारत ने बार बार अपनी बात दोहराई है और बिश्केक शिखर बैठक के पहले भी पाकिस्तान सरकार को चेताया है कि भारत के साथ यदि बातचीत करनी है तो भारत में आतंकवादी हरकतों को प्रायोजित करना बंद करना होगा।

लेकिन पाकिस्तान की नीति है कि आतंकवादी बंदूक को भारत के कंधे पर रख कर भारत को बातचीत के लिये ब्लैकमेल करे। पाकिस्तानी धरती से आतंकवादी हरकतों का संचालन किस तरह जारी है यह बिश्केक शिखर सम्मेलन के ठीक एक दिन पहले ही देखने को मिला जब पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन अल उमर के सरगना मुश्ताक जरगर ने अनंतनाग में भारतीय सुरक्षा बलों पर एक और कामयाब आतंकवादी  हमले को अंजाम दिया जिसमें सीआरपीएफ के पांच जवान फिर शहीद हुए।

पाकिस्तान सरकार चाहे तो इन आतंकवादी हरकतों पर लगाम लगवा सकती  है। वह अपनी धरती पर सक्रिय इन आतंकवादी संगठनों पर नकेल कस कर भारत विरोधी हमलों को रुकवा सकती  है।  गत फरवरी में जिस तरह पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर पाकिस्तान ने 40 जवानों को मार दिया था उसी तरह इसी रणनीति को जारी रखते हुए  भारत को  आतंकित रखना चाहता है। पुलवामा हमले के बाद जब 26 फऱवरी को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के अड्डे पर हवाई हमले किये तो सारी दुनिया ने भारत के कदम का समर्थन किया।  लेकिन पाकिस्तान बालाकोट पर सर्जिकल स्ट्राइक से सबक लेने के बदले  इतना तिलमिला गया कि वह भारत पर जवाबी हमले करने से बाज नहीं आय़ा।  इसके बाद उसने अपने आसमान से भारतीय यात्री विमानों को उड़ान भरने पर प्रतिबंध लगा दिया। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विश्केक जाने के  लिये पाकिस्तान के आसमान से होकर नहीं गए। पाकिस्तान यदि भारत के साथ बातचीत के लिये गम्भीर था तो उसे सबसे पहले अपने आसमान को भारतीय विमानों के लिये खोल देना चाहिये था।

Comments

Most Popular

To Top