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समर नीति: विश्व ताकत भारत

पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप

महाशक्ति अमेरिका ने अपनी सालाना राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (एनएसएस) में भारत को विश्व ताकत बताया है और इसके साथ ही भारत की प्रतिद्वंद्वी परमाणु ताकतों को चेतावनी दे कर भारत की विश्व रंगमंच पर कूटनीतिक व सामरिक अहमियत और प्रतिष्ठा बढ़ाई है। इस रिपोर्ट में अमरीका ने चीन को खतरा बताया है और पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अपने यहां से आतंकवादी तत्वों पर लगाम लगाए अन्यथा इसके नतीजे ठीक नहीं होंगे।





अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने इस तरह दुनिया में नये सामरिक समीकरण के बनने की ओर इशारा किया है जो पिछली सदी के रिश्तों के समीकरण से काफी भिन्न है। पिछली सदी में पचास से अस्सी के दशक तक चले शीतयुद्ध के दौर में अमेरिका और सोवियत संघ दो विपरीत ध्रुवों पर बैठे थे और पूरी दुनिया सोवियत औऱ अमेरिकी खेमे में बंटी थी लेकिन मौजूदा विश्व में यह दुनिया बहुध्रुवीय हो गई है जिसमें भारत भी एक ध्रुव माना जाने लगा है और महाशक्ति के तौर पर चीन अमेरिका की जगह लेने के लिये अपनी आर्थिक और सैनिक ताकत का बेजा इस्तेमाल करने में जुटा है। चीन को ऐसा करने से रोकने के लिये अमेरिका भारत को अपने खेमे में रखना चाहता है। दूसरी ओर चीन को खतरा भारत से भी है इसलिये वह हाई टेबल माने जाने वाली किसी भी विश्व संस्था में भारत की कुर्सी नहीं लगने दे रहा है।

अमेरिका को संतुलित करने के लिये भारत का पिछली सदी का पारम्परिक दोस्त रूस भी चीनी खेमे में चला गया है इसलिये भारत के लिये दुविधा यह होगी कि अपने प्रतिद्वंद्वी देश चीन के दोस्त रूस से किस स्तर की दोस्ती रखे। अमेरिका के साझेदार इस्राइल से भारत किस स्तर की दोस्ती बनाए कि अरब मुल्कों से प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाली 60 अरब डालर से भी अधिक की विदेशी मुद्रा पर कोई आंच नहीं आए।

सालाना समीक्षा रिपोर्ट में अमेरिका ने भारत को एक तरह से अपना साथी देश भी घोषित कर दिया है। इस तरह 21 वीं सदी के बदलते सामरिक समीकरण की अमेरिका ने अपने नजरिये से व्याख्या की   हालांकि भारत को इस पर गहन मंथन करना होगा कि अमेरिका के खेमे में किस हद तक शामिल हो या फिर बाहर से ही खास मसलों पर साथ दे। अमेरिकी खेमे में रहने का मतलब है कि इस्राइल और ईरान पर अमेरिकी नीतियों का भारत समथर्न करे। रूस का साथ नहीं दे। लेकिन ये तीनों देश ही भारत के राष्ट्रीय हितों के लिये काफी अहमियत रखते हैं और अमेरिका के इशारे पर भारत चले तो भारत को इनसे दूरी बनानी होगी।

दूसरी ओर दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक रुख और पाकिस्तान की आतंकवादी हरकतों को खुला समर्थन देने वाला चीन भारत के लिये उतना ही चिंता का विषय है जितना अमेरिका के लिये। इस इलाके में भारत औऱ अमेरिका के सामरिक हित मेल खाते हैं इसलिये अमेरिका द्वारा हिंद महासागर औऱ प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले इलाके को हिंद प्रशांत इलाका के तौर पर निरुपित किये जाने का भारत ने स्वागत किया है।

इस तरह अमेरिका की सालाना सुरक्षा रिपोर्ट में भारत के लिये सकारात्मक और नकारात्मक पहलू हैं जिन पर समग्रता में विचार करने के बाद ही भारत को अपने समीकरण तय करने होंगे। लेकिन इतना तय है कि भारत इस सालाना रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

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