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समर नीति: क्वाड से चीन की चुनौती का मुकाबला हो सकेगा ?

भारत-चीन का झंडा

न्यूयार्क में चीन के रुख से परेशान चार ताकतवर देशों के विदेश मंत्रियों की गत 27 सितम्बर को हुई पहली बैठक अंतरराष्ट्रीय जगत में चीन विरोधी नये सामरिक समीकरण के उभरने की ओर इशारा करती है। हालांकि चारों देशों भारत, आस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के बीच गत दो सालों से संयुक्त सचिव स्तर की बैठकें होती रही हैं लेकिन जिस तरह इस वार्ता का स्तर अचानक दो दर्जा ऊपर किया गया है वह इस बात की ओर इशारा करता है कि चारों देश चीन विरोधी मंच खड़ा करने को लेकर गम्भीर हैं ताकि चारों देश चीन की सामरिक चुनौतियों से मिल कर मुकाबला कर सकें। क्वाड या क्वाड्रीलैटरल डायलाग या चर्तुपक्षीय वार्ता के नाम से घोषित इस समूह को चीन विरोधी नहीं बताया जाता है लेकिन इसकी बैठकों में जिन मसलों पर चर्चा होती हैं वे चीन के रुख, नीतियों और हरकतों से ही जुड़ी होती हैं। इसकी बैठकों के बाद जो बयान जारी होते हैं वे चीन का नाम लिये बिना ही चीन का आगाह करने वाले होते हैं कि किस तरह समुद्र से लेकर दूसरे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करते हुए उसका पालन चीन को करना चाहिये। इस चर्तुपक्षीय वार्ता में सक्रियता दिखाने में भारत अब तक हिचक दिखाता रहा है लेकिन भारत के प्रति चीन का रुख भारत को अधिक परेशान करने लगा है शायद इसलिये क्वाड के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक न्यूयार्क में होने और इसमें भाग लेने पर भारत सहमत हो गया।





गत 27 सितम्बर को न्यूयार्क में जिस तरह चारों विदेश मंत्रियों की बैठक दो घंटे तक चली है वह इस बात की ओर भी इशारा करती है कि इन चारों देश इन बातों पर चर्चा कर रहे हैं कि चारों देश चीन के बढ़ते विस्तारवादी सामरिक कदम को रोकने के लिये मिल कर क्या कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि इन्हीं दिनों जापान के समुद्री इलाके में क्वाड के तीन सदस्य देशों भारत, अमेरिका और जापान के बीच त्रिपक्षीय साझा अभ्यास मालाबार आयोजित हो रहा है। हालांकि क्वाड ने अपने को एक सैन्य गुट की संज्ञा नहीं दी है लेकिन इसी वक्त क्वाड के तीन सदस्यों द्वारा जापान के तट पर साझा नौसैनिक अभ्यास करना काफी अहम है। लेकिन क्वाड ने कहा है कि यह साझा अभ्यास किसी के खिलाफ निर्देशित नहीं है। इस त्रिपक्षीय साझा अभ्यास में अब आस्ट्रेलिया भी शामिल होना चाहता है लेकिन यह प्रस्ताव भारत की हरी झंडी की प्रतीक्षा कर रहा है। लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि जिस तरह भारत क्वाड के विदेश मंत्री स्तर की बैठक के लिये तैयार हो गया उसी तरह अगला मालाबार नौसैनिक अभ्यास आस्ट्रेलिया को साथ लेकर आयोजित हो।

चारों देशों ने क्वाड को कोई संधि या गुट का नाम नहीं दिया है बल्कि इसे चर्तुपक्षीय वार्ता की संज्ञा दी है। चारों देशों के बीच पिछले तीन सालों से संयुक्त सचिव स्तर की सलाहमशविरा बैठक होती रही है। इसका स्तर ऊंचा करने के लिये भारत अब तक हिचकता रहा है लेकिन न्यूयार्क में चारों देशों के विदेश मंत्रियों के साथ क्वाड की बैठक में खुला और मुक्त हिंद प्रशांत इलाके में सहयोग गहरा करने के इरादे से सहयोग आगे बढ़ाने के विषय पर चर्चा तो हुई ही प्रतिआतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, आपदा के दौरान मानवीय सहायता, साइबर सुरक्षा और विकास वित्त के मसलों पर गहन चर्चा की गई। भारत चीन के रवैये से परेशान दिखता है लेकिन इससे निबटने के लिये अकेला कुछ नहीं कर सकता। जरूरी है कि अपने राष्ट्रीय सामरिक हितों को बचाने के लिये क्वाड में भारत संतुलित तरीके से अपनी भूमिका निभाए। चीन के साथ संवेदनशील रिश्तों को देखते हुए भारत को काफी नापतोल कर क्वाड में अपनी सक्रियता बढ़ाने पर फैसला करना होगा।

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