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समर नीति: वूहान भावना के बावजूद सैन्य तैयारी क्यों तेज कर रहा है चीन

सीमा पर चीनी सेना
चीनी सेना (फाइल फोटो)

पिछले साल अप्रैल में चीन के वूहान शहर में राष्ट्रपति शी चिन फिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अनौपचारिक शिखर बैठक के नतीजों को भारत औऱ चीन के राजनयिक दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण रिश्तों में नया माहौल बताते हुए नहीं थक रहे। लेकिन इसके वाबजूद तिब्बत के इलाके में चीनी सेना की तैनाती में उल्लेखनीय बढ़ोतरी क्यों की जा रही है इस बारे में भारत औऱ चीन के सरकारी राजनयिक हलकों में मौन बरता जा रहा है। वूहान शिखर बैठक के बाद भारत औऱ चीन की विवादस्पद सीमाओं पर कुछ हद तक परस्पर विश्वास औऱ सौहार्द का माहौल जरूर विकसित हुआ है और दोनों देशों के बीच उच्च स्तर की राजनयिक यात्राएं हुई हैं लेकिन जून-सितम्बर, 2016 में 73 दिनों तक भूटान के डोकलाम इलाके में चली सैन्य तनातनी के बाद वहां सीमा पार नये सैन्य ढांचे क्यों विकसित किये गए हैं इसे लेकर सामरिक हलकों में चीन के इरादों को लेकर संशय बना हुआ है।





तिब्बत में नये सैनिक साज सामान और हथियारों की तैनाती को लेकर चीन के आधिकारिक मीडिया में जो रिपोर्टें छप रही हैं उनमें साफ लिखा होता है कि इनका इऱादा भारतीय सेना का मुकाबला करने के लिये है। मिसाल के तौर पर तिब्बत के पठारी इलाके पर हाल में 50 किलोमीटर मारक दूरी वाली लेजर औऱ उपग्रह निर्देशित पीएलसी- 181 वेहीकल पर तैनात की हुई होवित्जर तोपों की तैनाती की रिपोर्टें आई हैं जिन्हें सिक्किम और अन्य इलाकों के सामने तैनात की गई है। इसके अलावा चीनी जन मुक्ति सेना (पीएलए) द्वारा 32 टन हलके वजन और 105 मिमी की गन वाला टी- 15 लाइट टैंक तैनात करने की रिपोर्टों को भी चीनी मीडिया में उछाला गया है जिसे आसानी से कहीं भी भेजा जा सकता है। इसके अलावा चीनी पीएलए ने नये एल- डब्ल्यू-30 लेजर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किया है जो नीची उडान भरने वाले लक्ष्यों जैसै टोही विमानों आदि को निशाना बना सकता है।

कुछ दिनों पहले ही चीन ने दस टन वजन वाले जेड- 20 मीडियम लिफ्ट हेलिकॉप्टर भी बनाया है जिसे तिब्बत में तैनात किया जाएगा। वाई-9 परिवहन विमान भी अग्रिम इलाकों में तैनात किये गए हैं। 66 टन वजन उठाने वाला वाई-20 परिवहन विमान भी दो साल पहले सेवारत किया गया है। चाइना सेंट्रल टीवी ने हाल में रिपोर्ट किया था कि चार हजार किलोमीटर मारक दूरी वाली रिएंट्री मिसाइल प्रणाली भी तैनात की गई है। इसके अलावा तुंगफंग- 21 मिसाइल ( मझली मारक दूरी वाली ) प्रणाली भी तैनात की गई है। ये मिसाइलें रेल पर तैनात कर छोड़ी जा सकती हैं।

तिब्बत के पठारीय इलाकों पर चीन ने 08 बड़े आकार वाले दूरबीन भी तैनात कर लिये हैं जिनके जरिये दूर के इलाकों तक नजर रखी जा सकती है। इसके अलावा तिब्बत पर तैनात चीनी जन मुक्ति सेना के जवानों को हमेशा चुस्त दुरुस्त बनाए रखने के लिये सैनिक अभ्यासों का सिलसिला अचानक काफी बढ़ा दिया गया है। हाल में जो सैनिक अभ्यास हुए हैं उनका उद्देश्य भारतीय सैनिकों से ही लड़ने के लिये तैयार होना है।

चीन के इरादे यदि वूहान भावना के तहत भारत के साथ सौहार्दूपूर्ण रिश्ता को आगे बढ़ाना है तो इसके साथ भारत को निशाना बना कर सैन्य तैयारी और तैनाती में लगातार बढ़ोतरी क्यों की जा रही है। निश्चय ही भारतीय सेना भी चीनी सीमा से कुछ दूरी पर ब्रह्मोस मिसाइलों, अल्ट्रा लाइट हेलिकॉप्टर, सुखोई- 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों आदि के जरिये जवाबी सैन्य तैनाती तेज कर दी है लेकिन भारत की सैन्य तैयारी चीनी सैन्य तैयारी के आगे कहीं नहीं टिकती दिख रही। भारत यदि चीन से यह कहे कि चीन तिब्बत के इलाके में सैन्य तैनाती क्यों बढ़ा रहा है तो चीन का भी वही जवाब होगा कि भारत भी तो ऐसा ही कर रहा है लेकिन तुलनात्मक तौर पर भारत काफी पीछे चल रहा है जिसे चीनी सैन्य तैनाती के मद्देनजर तुरंत बढ़ाने की जरूरत है।

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