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समर नीति: ईरान को क्यों धमका रहा है अमेरिका

राष्ट्रपति ट्रंप और रूहानी

ईरान के खिलाफ आर्थिक पाबंदी को सख्ती  से लागू करने के ऐलान के बाद अमेरिका ने अब ईरान को आतंकित करने के लिये फारस की खाड़ी में अपना सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को भेज दिया है। आर्थिक पाबंदी की वजह से ईरानी  नेताओं के लिये सरकार चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा ईरान पर सैनिक दबाव बना कर अमेरिका ईरान को पूरी तरह झुकने को मजबूर करना चाहता है।  हालांकि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के छह देशों के साथ समझौते को पूरी तरह लागू कर दिखाया है लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति को इससे संतोष नहीं होना यह दर्शाता है कि उनका इरादा ईरान के शासकों को सत्ताच्युत कर ईऱान में सत्तर के दशक के दौरान शाह रजा पहलवी जैसा अमेरिका समर्थित सरकार बहाल करना है।





लेकिन  कहा जा रहा है कि  ईऱान के समुद्री इलाके में अमेरिका ने अपना विशाल युद्धपोत भेजकर एक बड़ा जोखिम मोल लिया है। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन ने कहा है कि ईऱान अमेरिका पर हमला करने वाला है इसलिये ईऱान को ऐसा करने से रोकने के लिये अमेरिका ने अपना विशालकाय युद्धपोत भेजा है। लेकिन अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों को ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस फैसले पर शक हो रहा है कि क्या ईऱान इससे डर जाएगा।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईऱान के पास युद्धपोत नाशक मिसाइलें हैं जिनसे वह अमेरकी पोत को डुबो सकता है। चूंकि अमेरिकी पोत ईऱान के समुद्र तट से काफी नजदीक है औऱ वहां ईऱानी युद्दपोत भी काफी संख्या में पहले से मंडरा रहे हैं इसलिये मामूली गलतफहमी से भी यदि किसी एक पक्ष ने दूसरे पर हमला किया तो दूसरा पक्ष भी जवाबी हमला दिये बिना नहीं रहेगा। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि उसे पता है कि ईऱानी हमला का अमेरिका इतना करारा जवाब देगा कि पूरा ईऱान मटियामेट हो जाएगा। इस तरह खाड़ी के इलाके में एक अनावश्यक युद्ध शुरु होगा जिसके नतीजे पूरी दुनिया के लिये भयावह साबित होंगे।

फर्ज कीजिये कि यदि युद्ध का माहौल बना औऱ दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जवाबी हमले शुरू कर दिये औऱ अमेरिकी विमानवाहक पोत को किसी तरह का नुकसान पहुंचा तो अमेरिका की प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंचेगी। इसलिये वह ईरान पर इतना करारा जवाबी सैनिक हमला करेगा कि ईरान तबाह हो जाएगा।

अमेरिका इस तरह ईरान को हमेशा के लिये चुप कर देने की रणनीति पर चल रहा है जिसके नतीजे  सोचकर दुनिया भर के सामरिक विशेषज्ञ माथापच्ची करने लगे हैं। सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका ने क्या लक्ष्य लेकर फारस की खाड़ी के इलाके में अपना विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन को तैनात किया है। यह पोत करीब एक लाख टन विस्थापन क्षमता वाला है और इस पर करीब 80 लड़ाकू विमान तैनात हो सकते हैं। दुश्मन की मिसाइलों से बचाव के लिये इस पर एजिस एंटी बैलिस्टिक मिसाइलें भी तैनात हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छर मारने के लिये बंदूक का इस्तेमाल नहीं करते। ईरान को यदि सैनिक सबक सिखाना है तो इसके लिये विमानवाहक पोत जैसे विशालकाय पोत को तैनात करना समझदारी नहीं कही जा सकती। अमेरिकी राष्ट्रपति ने केवल अपनी  सैन्य ताकत का धौंस दिखाने की पहल की है जो आज की दुनिया में किसी भी नजर से उचित नहीं कहा जा सकता। अब शीतयुद्ध का दौर खत्म हो गया है। इसलिये बड़ी ताकतों को अपनी सैन्य ताकत दिखाने  के लिये इस तरह के कदम उठाने से बचना चाहिये।

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