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समर नीति: श्रीलंका के आतंकी हमलों से सबक लेने की जरूरत

श्रीलंका में सीरियल धमाका
फोटो सौजन्य- गूगल

श्रीलंका में गत रविवार को ईस्टर के मौके पर तीन चर्चों और तीन बड़े होटलों पर हुए आतंकवादी हमलों के घाव लम्बे अरसे तक श्रीलंका के लोग सहमते रहेंगे। इस हमले से जुड़े आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में छापेमारी के दौरान 27 अप्रैल को 15 और लोगों के मारे जाने की रिपोर्टें  इस बात की ओर इशारा करती हैं कि हमलावरों के पीछे एक बड़ी ताकत है। भारत के पड़ोस में हुए इस भीषण आतंकवादी हमले में तीन सौ से अधिक लोग मारे गए जो हाल के आतंकवादी हमलों में सबसे बड़ा और थर्रा देने वाला कहा जा सकता है। खेद और भारत के लिये सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस हमले के  तार भारत से भी जुड़े हुए हैं। हमले के पीछे जो ताकतें हैं वे भारत में भी सक्रिय हैं और भारत को श्रीलंका के ईसाई विरोधी ईस्टर आतंकवादी हमले से सबक लेते हुए जरूरी सबक लेने होंगे।





यदि वक्त पर कदम नहीं उठाए गए तो श्रीलंका के आतंकवादी हमले भारतीय सुरक्षा के लिये भी गम्भीर परिणाम देने वाले साबित होंगे। इसकी बड़ी वजह है कि इन हमलों के पीछे मुख्य ताकत नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) है जो तमिलनाडु स्थित सहोदर तमिलनाडु तौहीद जमात (टीएनटीजे) से प्रेरणा लेने के बाद जन्मा है। तमिलनाडु तौहीद जमात कट्टरपंथी वहाबी जेहादी विचारधारा वाला संगठन है जिसे सऊदी अरब से वित्तीय मदद मिलती है। इसने पहले श्रीलंका तौहीद जमात की स्थापना में मदद दी। बाद में इसी संगठन से एक गुट अलग हुआ और उसने नेशनल तौहीद जमात की स्थापना की।

नेशनल तौहीद जमात के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी द्वारा पाले पोसे गए लश्कर-ए-तैयबा से नजदीकी सहयोगी रिश्ता है। लश्कर ए तैयबा ने श्रीलंका में अपने सम्पर्कों के जरिये भारत में तमिल नाडु तौहीद जमात से सहयोगी रिश्ते बनाए हैं। रोचक बात यह है कि नेशनल तौहीद जमात के नेता जहारान हाशिम भारतीय इस्लामी प्रचारक जाकिर नायक से प्रेरणा ली। उसे भारतीय जेहादी गुटों से भी वित्तीय मदद मिलती रही है।

विडम्बना यह है कि श्रीलंका को गत 20 अप्रैल को  हुए आतंकवादी हमलों की तैयारी की जानकारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने ही सबसे पहले श्रीलंकाई सुरक्षा एजेंसियों को दी थी। ये जानकारियां तमिल नाडु तौहीद जमात के लोगों पर नजदीकी नजर रखने की वजह से ही हासिल की गईं लेकिन भारत सरकार ने अब तक तमिल नाडु के इस जेहादी गुट पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान नहीं किया है।

हालांकि श्रीलंका के आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी इस्लामी स्टेट यानी आईएस ने ली है जिससे यह पता चलता है कि इस्लामी स्टेट का सफाया नहीं हो सका है जैसा कि दावा अमेरिकी सुरक्षा महकमा कर रहा है। यदि इस्लामी स्टेट के इशारों पर श्रीलंका के स्थानीय जेहादी लोगों से इतना भीषण आतंकवादी हमला कोलम्बो में करवाया जा सकता है तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में भी इस्लामी स्टेट के गुर्गे कोई बड़ा आतंकवादी हमला करवाने में सक्षम होंगे। मौजूदा वक्त भारत में आम चुनावों का है और भारत के सुरक्षा बल और गुप्तचर एजेंसियों का सारा ध्यान चुनावों के सुरक्षित संचालन पर ही लगा होगा। इसका फायदा इस्लामी स्टेट और पाकिस्तान स्थित उनके सहोदर संगठन उठा सकते हैं।

कोलम्बो के आतंकवादी हमलों से यह भी साफ हुआ है कि इस्लामी स्टेट और पाकिस्तान स्थित अन्य आतंकवादी संगठन  भारत स्थित अन्य जेहादी संगठनों का इस्तेमाल रिमोट कंट्रोल के जरिये भी कर सकते  है और जब कोई बड़ा आतंकवादी हमला हो तो इसके लिये स्थानीय जेहादी तत्वों को जिम्मेदार ठहरा कर विदेशी आतंकवादी ताकतें अपना पल्ला झाड़ सकती हैं।

 निश्चय ही भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान इस पहलू पर भी होगा। इसलिये हम यह भरोसा कर सकते हैं कि श्रीलंका के आतंकवादी हमलों से सबक ले कर भारत में कोई बड़ा आत्मघाती आतंकी हमला रोकने के लिये जरूरी कदम उठाए जा रहे होंगे।

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