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समर नीति: रूस के साथ दोस्ती की अहमियत

राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी

भारत और रूस के नेताओं के बीच शिखर बैठकें तो वैसे सालाना होती हैं लेकिन गत 21 मई को काले सागर के तटीय शहर सोची में राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अनौपचारिक बैठक की, वह भारत-रूस के द्विपक्षीय रिश्तों में याद की जाएगी। तेजी से बदलते दुनिया के  भूराजनीतिक परिदृश्य में भारत के लिये यह जरूरी था कि रूस के साथ अपनी पारम्परिक दोस्ती में किसी तरह शंका के बादल नहीं छाने दे। हालांकि अब शीतयुद्ध का वह दौर नहीं रहा जब भारत अपनी सामरिक जरूरतों के लिये केवल रूस पर निर्भर था। अब यह दुनिया बहुध्रुवीय हो गई है और वक्त का तकाजा है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिये भारत के लिये अहम उन सभी बड़ी ताकतों के साथ दोस्ती का रिश्ता बनाए जिनसे भारत के सामरिक और आर्थिक हितों का संवर्द्धन होता हो। इसी रास्ते पर चलते हुए भारत ने अमेरिका के साथ रक्षा औऱ राजनयिक रिश्ते प्रगाढ़ किये तो अमेरिकी खेमे में माने जाने वाले जापान और आस्ट्रेलिया के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत किये। चीन की आक्रामक समर नीति से पेश चुनौती का मुकाबला करने के लिये भारत जहां चार देशों के इंडोपैसिफिक यानी हिंद प्रशांत गठजोड़ में शामिल होने के संकेत दे चुका है वहीं वह अमेरिका के दुश्मन ईऱान के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत करना चाहता है।





लेकिन इनमें से जब कोई एक देश यह चाहे कि उसके साथ दोस्ती बढ़ाने के लिये दूसरे से अपना रिश्ता तोड़ना होगा तो भारत को यह मंजूर नहीं हो सकता। अपने प्रतिद्वंद्वी देशों को नीचा दिखाने के लिये अमेरिका का नया प्रतिबंध कानून कैटसा ( काउंटरिंग अमेरिकन एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट) का यही उद्देश्य है। कैटसा के जरिये अमेरिका ने भारत और रूस के रक्षा रिश्तों में दरार डालने की कोशिश की है जो भारत को कतई मंजूर नहीं हो सकता। भारत ने यदि कैटसा कानून का सम्मान किया तो रूस के साथ भारत के रक्षा रिश्तों पर आंच आएगी और भारतीय सेनाओं की लडाकू क्षमता पर भारी प्रतिकूल असर प़ड़ेगा। भारतीय सेनाएं अपनी जरूरतों के  लिये रूस पर करीब दो तिहाई निर्भर हैं इसलिये किसी भी हालत में भारत रूस के साथ अपने रक्षा रिश्तों को प्रभावित नहीं होने दे सकता।

हालांकि कहने को तो अमेरिकी कदम रूस के खिलाफ है लेकिन इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रूस जा कर राष्ट्रपति पुतिन के साथ छह सात घंटे तक आपस में गुफ्तगू करना अमेरिका के लिये एक बड़ा संदेश कहा जा सकता है। व्लादीमिर पुतिन के साथ शिखर बैठक कर भारत ने अमेरिका को यह साफ संदेश दिया है कि रूस पर लगाए जाने वाले अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय रक्षा एजेंसियां रूस की रक्षा कम्पनियों के साथ अपने लेनदेन को किसी तरह बाधित नहीं होने देंगी। इन दिनों रूस से भारत की सुरक्षा के लिये काफी अहम एस-400 बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली खरीदने पर बातचीत चल रही है और इसके अलावा एक और रूसी परमाणु पनडुब्बी लीज पर हासिल करने पर भी बात चल रही है। रूस इसी तरह भारत की कई और संवेदनशील रक्षा परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। इनकी बदौलत भारत अपने दुश्मन पड़ोसी देशों में यह खौफ पैदा करता है ताकि वे भारत की ओर आंखें तरेर कर नहीं देखे। हालांकि रूस ने हाल में पाकिस्तान के साथ अपनी निकटता बढ़ाई है और उसकी सेना के साथ साझा अभ्यास भी किये हैं और वह अफगानिस्तान में तालिबान से हमदर्दी भी दिखाने लगा है लेकिन इनके बावजूद भारत रूस के साथ अपनी दोस्ती पर आंच नहीं आने दे सकता।

 

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