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समर नीति: आतंकी नीति से बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान

पाकिस्तानी स्नाइपर
फाइल फोटो

पुलवामा पर आतंकवादी हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय निंदा के शिकार पाकिस्तान ने अब भारतीय सुरक्षा बलों पर दबाव बढ़ाने की अपनी रणनीति बदल दी है। उसने जम्मू-कश्मीर  की नियंत्रण रेखा  पर जहां संघर्षविराम तोड़ने की वारदात बढ़ा दी हैं वहीं इसका स्तर भी बढ़ा दिया है। नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान अब भारी आर्टीलरी तोपों का इस्तेमाल कर सीमा पार गांवों को निशाना बना कर उन्हें परेशान करने की रणनीति लागू कर रहा है। वह जानबूझ कर नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ाने लिये भारतीय सुरक्षा बलों को भड़का रहा है। बालाकोट में जैश ए मुहम्मद के आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर भारतीय हवाई हमले से शर्मिंदा पाकिस्तान ने सबक नहीं सीखने का संदेश दुनिया को दिया है क्योंकि उसे चीन का नैतिक समर्थन मिल रहा है। भारत पाकिस्तान तनाव के ऐसे मौके पर चीन द्वारा अपनी वायुसैनिक करतब टीम और लड़ाकू विमानों को 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस की परेड के दौरान हवाई ताकत का प्रदर्शन कर चीन ने पाकिस्तान का मनोबल ही बढ़ाया है। चीन के इस कदम से पाकिस्तानी सुरक्षा कर्णधारों को यह भरोसा मिलेगा कि भारत के खिलाफ जंग में चीन उसका खुल कर साथ देने के लिये हमेशा तैयार रहेगा।





 चीन का यह कदम भारत पाक तनाव की आग में घी डालने जैसा माना जाएगा। चीन ने जहां आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अपनी आतंकी गतिविधियां खुले आम चलाते रहने के लिये अहम साथ दिया है वहीं चीन द्वारा पाकिस्तान दिवस पर अपनी वायुसैनिक ताकत का प्रदर्शन करना यह साफ दिखाता है कि वह पाकिस्तान को भारत के खिलाफ भड़काने के लिये कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

ऐसे में अमेरिकी प्रशासन द्वारा पाकिस्तान को यह चेतावनी देना भारत के लिये काफी राहत देने वाला साबित होगा कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ और आतंकी हमले होने देगा तो यह उसके लिये बडी समस्या पैदा करेगा । अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक बयान जारी कर यह संदेश भी पाकिस्तान को दिया है कि उसके द्वारा आतंकवादी गुटों खासकर जैश ए मुहम्मद और लश्कर ए तैयबा को बढ़ावा देता रहा तो इससे पाकिस्तान के लिये मुश्किलें पैदा होंगी। पाकिस्तान को अभी पेरिस स्थित आतंकवाद विरोधी समूह फाइनांशियल ऐक्शन टास्क फोर्स की बैल्क लिस्ट में आने से बचने के लिये जरूरी कदम उठाने बाकी हैं। अमेरिकी प्रवक्ता ने साफ कहा कि पुलवामा हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय दबावों में पाकिस्तान ने कुछ आतंकी लोगों को हिरासत में लिया है लेकिन वह ऐसा करने के बाद पहले की तरह ही इन्हें कुछ महीनों बाद रिहा कर देता है।  अमेरिका ने पाकिस्तान से यह भी कहा कि इन आतंकवादी गुटों के खिलाफ ऐसी ठोस कार्रवाई करे जिसे कभी वापस नहीं लेनी पड़े। अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान से यह भी कहा कि वह अपने यहां सक्रिय आतंकी गुटों के खिलाफ लगातार  कार्रवाई करता रहे ताकि वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिये चिंता का विषय नहीं बनें।

 अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद पाकिस्तान ने कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की है तो इसकी मुख्य वजह उसकी सेना है जिसके लिये आतंकी गुट लड़ाके मुहैया कराते हैं जिनका इस्तेमाल वह भारत के खिलाफ कम तीव्र्ता वाला युद्ध चलाने में करता है। पाकिस्तानी सेना का वजूद ही भारत विरोध पर टिका है और वहां की नागरिक सत्ता भी पाकिस्तानी सेना द्वारा ही पर्दे के पीछे से संचालित होती है इसलिये अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचना होगा कि ऐसे पाकिस्तान से कैसे निबटे जिसके  सैन्य जनरल खुद जेहादी बन चुके हैं।

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