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समर नीति: अपनी अस्मिता बचाने की कोशिश में ताइवान

शी और ताइवान की राष्ट्रपति त्साई
फाइल फोटो

एक स्वतंत्र देश के तौर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे दुनिया के सबसे विकसित राज्यों में एक ताइवान चीन द्वारा इसे हड़पने की हर सम्भव कोशिशों से जनतांत्रिक तरीके से निपटने की कोशिश कर रहा है।





करीब सवा दो करोड़ आबादी वाला यह देश हर व्यावहारिक तरीके से चीन से अलग है और एक स्वतंत्र सम्प्रभु देश की तरह यह दुनिया के दूसरे देशों के साथ सम्बन्ध बना रहा है। साल 1949 में जब कम्युनिस्ट क्रांति के बाद माओ त्से तुंग ने पेइचिंग के राजमहल पर कब्जा किया तो चीन की राष्ट्रवादी क्वोमिनतांग पार्टी के नेता च्यांग काई शेक को चीन के एक द्वीप ताइवान, जो तब जापानी कब्जे में था, में शरण लेनी पड़ी और वहीं चीनी गणराज्य( आरओसी ) की स्थापना हुई। इधऱ पेइचिंग में चीनी जनवादी गणराज्य (पीआरसी) की स्थापना हुई और तब से दोनों देशों के नेता अपने इलाके को चीन की संज्ञा देते हैं। लेकिन ताइवान के इलाके वाले चीनी गणराज्य में मुख्य भूमि चीन से अलग होने की सुगबुगाहट कुछ तेज हो चुकी है। इसकी भनक ताइवान में आगामी 11 जनवरी को होने वाले संसदीय चुनावों के लिये चल रहे चुनाव प्रचारों में देखने को मिल सकती है। मौजूदा राष्ट्रपति त्साई इंग वन चीन से स्वतंत्र होने की आकांक्षा रखती हैं लेकिन वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती हैं जिससे चीन इतना भड़क जाए कि वह ताइवान को हड़पने के लिये सैनिक हमला ही कर दे।

ताइवान की सरकार की मेनलैंड अफेयर्स यानी मुख्य भूमि चीन से रिश्तों को देखने वाले मंत्रालय की उपमंत्री छेन मिंग ताइपेई में एक बातचीत में कहती हैं कि चीन ने ताइवान के खिलाफ सूचना युद्ध छेडा हुआ है औऱ झूठी खबरों के जरिये ताइवानी लोगों को भड़काने की कोशिश करता है लेकिन ताइवान की सरकार सजग है औऱ अपनी जनता को हमेशा चीन की ओर से जारी झूठी खबरों के प्रति आगाह करते रहते है।

वैसे तो ताइवान को चीनी सैन्य हमलों से बचाने के लिये अमेरिका ने अपनी सैन्य सुरक्षा छतरी दी हुई है औऱ गत 4 दिसम्बर को ही अपने बी-52 बमवर्षक विमानों को ताइवान के निकट के समुद्री इलाकों पर उड़ाकर चीन को यह संदेश देने की कोशिश की है कि ताइवान को अमेरिका का पूरा सैन्य वरहदहस्त हासिल है लेकिन ताइवान ने चीनी सैन्य अतिक्रमण को रोकने के लिये खुद की भी पुख्ता सैन्य व्यवस्था की है और चीनी मिसाइली हमलों से बचाव के लिये अपनी स्वतंत्र मिसाइल रक्षा प्रणाली की भी तैनाती कर रहा है। ताइवान ने हाल में ही अमेरिका से एफ-16 लड़ाकू विमानों का बडा सौदा किया है जिस पर चीन ने अमेरिका से भारी एतराज जताया है।

ताइवान के मुख्य भूमि मामलों के डिपुटी मिनिस्टर छेन मिंग के मुताबिक चीनी हमलों से बचाव के लिये हम अपनी सैन्य तैनाती को नियमित तौर पर आधुनिक बनाते रहते हैं। छेन मिंग के मुताबिक हम यहां चीन से सैनिक लडाई नहीं मोल लेना चाहते हैं लेकिन चीन के सैनिक हमलों से बचाव के लिये हमेशा तैयार भी रहते हैं।

छेन मिंग के मुताबिक हम अपनी जनतांत्रिक जीवन शैली की रक्षा करना चाहते हैं और हम अपने देश में अधिक से अधिक जनतांत्रिक प्रक्रियाओं को व्यवहार में लाना चाहते हैं। लेकिन हम चीन के साथ नजदीकी रिश्ते भी रखना चाहते हैं। ताइवान औऱ चीन के बीच 160 अरब डॉलर का दिवपक्षीय व्यापार होता है औऱ ताइवान के दस लाख से अधिक लोग चीन जा कर व्यवसाय करते हैं या चीनी कम्पनियों के लिये काम करते हैं।

लेकिन इस गहरे आर्थिक रिश्ते की आड़ में चीन ताइवानी लोगों को बरगलाने की भी कोशिश कर रहा है। इसलिये चीन के सैनिक मंसूबों से अधिक हम चीन द्वारा ताइवान के खिलाफ छेड़े गए सूचना युद्ध को लेकर भी काफी चौकस रहते हैं।

छेन मिंग के मुताबिक एशिया प्रशांत इलाके में शांति व स्थिरता के लिये ताइवान- चीन रिश्तों में संतुलन बना रहना जरुरी है । यहां पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसलिये अमेरिका सहित बाकी दुनिया के देशों का ताइवान को नैतिक समर्थन मिलता है। इसलिये ताइवान की कोशिश है कि इस स्थिरता को सुनिश्चित किया जाए।

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