vishesh

समर नीति: बढ़ रही है पाकिस्तान की फजीहत

इमरान खान
फाइल फोटो

संयुक्त राष्ट्र में जम्मू कश्मीर मसले पर पटखनी खाने के बाद पाकिस्तान को अब आतंकवाद के मसले पर जलालत झेलनी पडेगी। फाइनांशियल एक्शन टास्क फोर्स की सहायक संस्था एशिया पैसिफिक ग्रुप  द्वारा  भी पाकिस्तान को काली सूची में डालने की सिफारिश से पाकिस्तान की फजीहत बढ़ने वाली है।  पाकिस्तान को अब अक्टूबर में फाइनांशियल ऐक्शन टास्क फोर्स की बैठक के लिये इंतजार करना होगा। इसके पहले  जम्मू कश्मीर को विशेष  दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370  को बेअसर करने के भारत के फैसले से तिलमिलाये पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में भारी  पराजय मिली है। इस करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तान  ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायिक अदालत( ICJ)  में जाने का फैसला किया है। लेकिन हेग स्थित इस अदालत को पता है कि पाकिस्तान ने उसके पहले फैसले को ही नही  लागू किया तो अब किस मुंह से वह फिर उसकी शरण में पहुंचेगा । आईसीजे ने पिछले महीने अपने फैसले में पाकिस्तान से कहा था कि पाकिस्तान की सैन्य जेल में मौत की सजा पाए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को काउंसेलर एक्सेस दे जो अब तक  नहीं दी गई है। इस तरह पाकिस्तान ने आईसीजे की अवमानना ही की है। इसके मद्देनजर पाकिस्तान ने यदि आईसीजे की शरण में जम्मू-कश्मीर का मसला पहुंचाया तो  भारत के लिये इसका जवाब देना कोई मुश्किल नहीं होगा।





आईसीजे में जाने के पाकिस्तान के फैसले से पाकिस्तानी सैन्य हुक्मरानों में भारी हताशा ही झलकती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान  के कहने पर चीन जब अनुच्छेद 370 को लेकर  शिकायत करने पहुंचा तो सुरक्षा परिषद ने अपने 15 सदस्यों की अनौपचारिक बैठक जरूर बुलाई लेकिन इस बैठक में चीन को बाकी 14 सदस्यों का तिरस्कार ही झेलना पड़ा। चीन इस बैठक में अकेला पड़ गया और परिषद की ओऱ से कोई साझा बयान भी जारी नहीं करवा सका।

इसके बाद पाकिस्तान  और तिलमिला गया है। इसी हताशा में वह भारत के खिलाफ युद्ध  की बातें करने लगा है ताकि पाकिस्तान द्वारा परमाणु बम  के सम्भावित इस्तेमाल से आतंकित विश्व समुदाय  भारत पर दबाव डालने लगे कि जम्मू कश्मीर पर बातचीत में तीसरे पक्ष का बीच बचाव मंजूर कर ले। लेकिन अमेरिका सहित कई देशों ने पाकिस्तान से साफ कह दिया कि कश्मीर मसले का हल भारत के साथ दिवपक्षीय बातचीत से ही निकल सकता है। भारत ने भी विश्व समुदाय से कहा है कि कश्मीर मसले पर दिवपक्षीय बातचीत के लिये शिमला समझौता औऱ लाहौर घोषणा पत्र के प्रावधानों से वह बंधा है औऱ इसके अनुरूप पाकिस्तान के साथ कई दौर की बातचीत भी कर चुका है लेकिन यह बातचीत जब भी कोई रंग लाने लगती है पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी तबका इसे फलीभूत होने नहीं देता औऱ कोई बड़ा आतंकवादी कार्रवाई कर बैठता है।

पाकिस्तान  शांति से कश्मीर मसले का कोई हल नहीं निकाल सकता है इसीलिये वह आतंक का सहारा लेता है और भारत व दुनिया पर दबाव बनाने की कोशिश करता है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं जिसके भयंकर नतीजे हो सकते हैं। लेकिन पाकिस्तान की इस बंदरघुड़की को सभी ने समझ लिया है औऱ यही है कि अमेरिका, रूस से लेकर भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, मालदीव तक ने जम्मू कश्मीर पर भारत के कदम को भारत का अंदरूनी मसला बताने वाला बयान दिया है। साफ है कि पाकिस्तान न केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पिटा बल्कि उसे राजनयिक अलगाव का भी सामना करना पड़ा। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को फोन कर फटकार लगाई कि वह हिंसा और युद्ध  भड़काने  वाली बातें नहीं करें। गौरतलब है कि इमरान खान ने अपनी नेशनल एसेम्बली में कहा था कि पुलवामा जैसा आतंकवादी हमला फिर हो सकता है और  पिछली बार की तरह भारत ने फिर बालाकोट जैसी सर्जिकल स्ट्राइक की तो इसका नतीजा खुला युद्ध में ही देखा जा सकता है।  पाकिस्तान की ओऱ से दिये जा रहे ऐसे ही बयानों से तंग आकर कई देशों ने पाकिस्तान को नसीहत दी है कि वह संयमित भाषा का इस्तेमाल करे। साफ है कि कश्मीर मसले को लेकर पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग हो गया है।

Comments

Most Popular

To Top