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समर नीति- नियंत्रण रेखा पर पाक की रणनीति

पाकिस्तानी जवान सीमा के पार

जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के लिये साल 2003 में एक समझौता हुआ था जिसका 2007 के बाद से बेशर्मी से उल्लंघन हो रहा है। भारत कहता है कि नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की पहल पाकिस्तान की ओर से की जाती है और भारत इसका जवाब देने के लिये मजबूर होता है तो भारत को भी संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन करना पड़ता है। भारत की ओर से यह भी कहा जाता है कि पाकिस्तानी सेना द्वारा संघर्षविराम तोड़ने का भारतीय सेना को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए कहा गया है। लेकिन लगता है पाकिस्तान इस मुंहतोड़ जवाब से नहीं डर रहा। वास्तव में वह तो चाहता ही है कि भारत मुंहतोड़ जवाब दे तो नियंत्रण रेखा पर अधिक से अधिक खूनखराबा हो और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित हो। पाकिस्तान की यह साजिश है कि भारत न केवल मुंहतोड़ जवाब देता रहे बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम भी उठाए ताकि दुनिया देखे कि भारत द्वारा पाकिस्तान से बातचीत नहीं करने के अड़ियल रुख की वजह से किस तरह हालात बेकाबू हो सकते हैं।





पाकिस्तान को पता है कि भारत में एक प्रभावशाली वर्ग ऐसा है जो निर्दोष नागरिकों की मौत पर चिंता जाहिर करेगा और भारत सरकार पर दबाव डालेगा कि नियंत्रण रेखा पर शांति के लिये पाकिस्तान से बात करे। लेकिन भारतीय नेतृत्व का यही कहना होता है कि बम और बंदूक की आवाज के बीच बातचीत कैसे हो सकती है। पाकिस्तान यदि गोलीबारी रोके तो शांति के माहौल में ही बात हो सकती है लेकिन पाकिस्तानी रणनीतिकारों का मानना है कि नियंत्रण रेखा पर बेकाबू खून खराबे का माहौल पेश कर भारतीय सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर इतना नैतिक दबाव डाला जाए कि भारतीय नेतृत्व पाकिस्तान से कहने लगे कि – अब बस करो आओ बात करें।

पाकिस्तानी रणनीतिकारों को पता है कि भारतीय जनतंत्र में हमेशा ऐसे लोगों की आवाजें गूंजती हैं जो निर्दोष नागरिकों की मौत का रोना रोते हैं। भारत की यह दुखती रग है और भारतीय नेतृत्व भी यह नहीं चाहता कि नियंत्रण रेखा पर हिंसा बेकाबू हो जाए। इधऱ भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिये भारी तोपों का इस्तेमाल शुरू कर लड़ाई का स्तर बढा दिया है। पाकिस्तान इसी ताक में है कि नियंत्रण रेखा पर भारत लड़ाई का स्तर तोपों तक ले जाए तो उसे भी बहाना मिले कि अपनी तोपों को नियंत्रण रेखा पर तैनात कर दे। दोनों ओर से तोपों के इस्तेमाल से भी जब बात नहीं बनेगी तो और भी लम्बी दूरी और अचूक मार करने वाले संहारक हथियारों का इस्तेमाल होने लगेगा। लड़ाई का यह स्तर ऊंचा होते-होते कहां तक जा सकता है इसकी कल्पना हम कर सकते हैं। तोपों के बाद मिसाइलें चलेंगी और इसके बाद फिर लड़ाकू विमानों की बारी आएगी और यदि इस हवाई युद्ध में भी पाकिस्तान पीछे रहा तो उसका अंतिम हथियार परमाणु बम तो है ही जिसके इस्तेमाल की धमकी वह बार-बार देता रहता है।

कुल मिलाकर भारत के खिलाफ आतंक के हथियार के इस्तेमाल की पाकिस्तान की रणनीति कामयाब होते लगती है। भारतीय इलाके में पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा में आतंकी भेजे जाते हैं और भारत केवल जवाबी रक्षात्मक कदम ही उठा सकता है। पाकिस्तान को पता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जब अहसास होगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी छोटे हथियारों से बढ़कर तोपों तक पहुंच चुकी है और इसका अंत परमाणु बम से होने का माहौल बनाया जाएगा तो भारत पर ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव बढेगा कि पाकिस्तान से आपसी मसलों के हल के लिये जल्द से जल्द बातचीत शुरू करे।

 

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