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समर नीति: परमाणु हमला पहले नहीं, आखिर कब तक ?

न्यूक्लियर बम

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद देश विदेश के सामरिक हलकों के कान खड़े हुए है कि परमाणु हथियारों के पहला इस्तेमाल नहीं करने की भारत की भविष्य की नीति जरुरत पडने पर बदल भी सकती है। हालांकि रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने तुरंत अपने रक्षा मंत्री के इस बयान के बारे में स्पष्टीकरण दिया है कि भारत की परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति पहले की तरह है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है।





गौरतलब है कि मई, 1998 में पोकरण में पांच परमाणु परीक्षण करने के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह वादा किया था कि वह कभी भी परमाणु हथियारों का प्रथम इस्तेमाल नहीं करेगा। नो फर्स्ट यूज की भारत की नीति की दुनिया भर के सामरिक हलकों में व्यापक सराहना की जाती रही है। भारत ने पहले परमाणु बम नहीं चलाने की अपनी नीति को न्युक्लियर डाक्ट्रीन के तौर पर जारी किया था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भरोसा में लेने का कदम उठाया था कि भारत ने भले ही परमाणु बमों का मई, 1998 में परमाणु परीक्षण किया है वह  परमाणु हथियार का प्रथम इस्तेमाल करने वाला देश नहीं होगा। भारत अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल सेकंड स्ट्राइक नीति के तहत ही करेगा। यानी भारत परमाणु हथियारों का इस्तेमाल तभी करेगा जब उस पर किसी देश ने परमाणु बम चलाया हो। भारत ने अपने परमाणु बम का विकास दुश्मन में खौफ पैदा करने के इरादे से ही किया है ताकि दुश्मन देश भारत के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने की हिमाकत नहीं करें।

रोचक बात यह है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह बयान पोकऱण में थलसेना के एक समारोह के दौरान औऱ पोकरण परमाणु परीक्षणों का साहसिक फैसला करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की प्रथम पुण्य तिथि के मौके पर दिया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि फिलहाल भारत की परमाणु हथियारों की इस्तेमाल नहीं करने की नीति है लेकिन भविष्य में यह  हालात के मद्देनजर बदल भी सकती है। राजनाथ सिंह के मुताबिक पोकरण ऐसा इलाका है जिसने अटल बिहारी वाजपेयी की  भारत को परमाणु ताकत बनाने की दृढ़ इच्छा शक्ति दिखाई। भारत आज भी पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर अडिग है लेकिन भविष्य में क्या होगा यह तब के हालात पर निर्भर करता है।

भारतीय रणनीतिकारों के एक वर्ग का मानना है कि दुश्मन को यदि यह अहसास होगा कि भारत पहला हमला नहीं करेगा तब वह इसका फायदा उठा सकता है औऱ पहला परमाणु हमला कर भारत को तबाह कर सकता है। भारत भले ही दुश्मन पर जवाबी हमला करे लेकिन भारत को जो नुकसान होगा इससे उबरना काफी मुश्किल होगा।

गौरतलब है कि दो साल पहले तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी एक पुस्तक विमोचन के मौके पर कहा था कि भारत की परमाणु हथियार पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति स्थाई नहीं है। तब इसके बाद भी सरकार ने सफाई दी थी कि भारत परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर अटल रहेगा। गौरतलब है कि अमेरिका, रूस जैसी ताकतों ने इस आशय का कोई वादा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नहीं किया है कि वह दुश्मन देश पर परमाणु हथियारों का पहले  इस्तेमाल नहीं करेगा। चीन ने हालांकि  कहा है कि वह भी परमाणु हथियारों का प्रथम इस्तेमाल नहीं करने का वादा कर रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चीन के इस वादे पर भरोसा पैदा नहीं। चीन की  समर नीति छलावा से भरी होती है। जिस तरह उसने दक्षिण चीन सागर में अपने समुद्री इलाको का विस्तार किया औऱ दो साल पहले भूटान के डोकलाम इलाके में अपने परमाणु बमों का धौस दिखाया उसके मद्देनजर भारत को भी अपनी परमाणु नीति को लेकर भ्रम की स्थिति बनाए रखनी होगी।

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