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समर नीति: भारत और रूस के बीच दोस्ती के मायने

राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी

रूस के शहर में भारत और रूस के बीच 20 वी सालाना शिखर बैठक  एक विशेष अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि में हुई। तीन औऱ चार सितम्बर को हुई इस शिखर बैठक में रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खूब आवभगत की। रूस के साथ यह शिखर बैठक अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते टकराव, भारत चीन के बीच कश्मीर मसले पर तनाव और  भारत द्वारा हिंद प्रशांत के चार देशों के समूह में बढती रुचि  की पृष्ठभूमि में हुई।  व्लादीवोस्तक में ईस्टर्न इकोनामिक फोरम के आयोजन के बावजूद रूसी राष्ट्रपति ने भारतीय प्रधानमंत्री के साथ इतना वक्त दिया यह भारत की मौजूदा अंतरराष्ट्रीय  साख का सूचक है।





 भारत के लिये यह जरुरी है कि एक और अपने पारम्परिक दोस्त और सामरिक साझेदार रूस के साथ रिश्तों का पुराना स्तर बहाल रखे और दूसरी    ओऱ अमेरिका और जापान के साथ भी अपने रिश्तों को आगे बढाए। भारत ने दोनों इलाकों में अपने पांव फंसा कर  अपने राष्ट्रीय हितों का  संतुलन बनाया हुआ है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री जब जापानी प्रधानमंत्री से बातें करते हैं तो उन्हें  अपना अभिन्न मित्र बताना नहीं चूकते और जब वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हथेली थपथपाते हैं तो ट्रम्प  बुरा मानना तो दूर हंसते रहते हैं।  लेकिन जब वह रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन से मिलते हैं तो उनके साथ एक विशेष केमिस्ट्री बन जाने की बात समीक्षक लोग करने लगते हैं। रूस के साथ दोस्मी का पुराना स्तर न केवल बहाल रखने बल्कि इसे और उंचाई औऱ गहराई तक ले जाने वाले जो फैसले  भारत – रूस संयुक्त बयान के जरिये जाहिर किये गए हैं वे  विश्व सामरिक जगत में भारत का कद बढाने वाला है। सबसे अहम ऐलान तो यह था कि रूस के सुदूर पूर्व के विकास में अपना योगदान देने के लिये एक अरब डालर का वित्तीय कर्ज देने का ऐलान किया। इसके पहले दोनों देशों ने रक्षा सम्बन्धों को गहराई देने के लिये  हाल में जो समझौते किये हैं वे इन भ्रामक रिपोर्टों को गलत ठहराते हैं कि अमेरिका के दबाव में भारत रूस के साथ अपने रक्षा सहयोग के रिश्तों का स्तर घटा सकता है।

 रूस के साथ  विभिन्न देशों के रक्षा रिश्तों को कम करने या तोड़ देने की अमेरिकी चाहत ने कैटसा  ( काउंटरिंग अमेरिकन एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस  एक्ट)  कानून पारित किया और भारत जैसे देशों को डराया कि रूस से रक्षा साज सामान खरीदा तो  प्रतिबंध के तौर पर उसका खामियाजा  भुगतना पडेगा।  लेकिन भारत ने इस धमकी को नजरअंदाज किया और रूस के साथ न केवल एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली खरीदने का सौदा लागू किया बल्कि रूस के साथ रक्षा सहयोग के रिश्तों को दस साल और आगे बढ़ाकर 2030 तक करने का भी फैसला  किया।

 भारत रूस के साथ रक्षा रिश्तों का स्तर अपने राष्ट्रीय हितों की कीमत पर ही  कम कर  सकता है इसलिये भारतीय रणनीतिकारों ने अमेरिकी धमकियों की परवाह नहीं करते  हुए रूस के साथ न केवल अपने सहयोगपर्ण  रक्षा रिश्तों  को बहाल रखा बल्कि इसे और गहराई के साथ जारी रखने का भी ऐलान भी कर दिया।

  चीन के साथ  चल रहे तनावों के मद्देनजर आज के दौर में भारत का  अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया के  साथ रहना भारत की एक   सामरिक जरुरत तो है लेकिन रूस के साथ दोस्ती की कीमत पर अमेरिका और साथी देशों के साथ दोस्ती को आगे नहीं बढाया जा सकाता। भारत रूस के बीच सामरिक और सैनिक सहयोग भारत औऱ रूस दोनों के राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करता है इसलिये  भारतीय रणनीतिकारों ने प्रधानमंत्री मोदी के रूस दौरे में राष्ट्रपति पुतिन के साथ शिखर बैठक की  तैयारी इसी मद्देनजर की थी।

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