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समर नीति: जेहादी सोच की हो गई है पाक सेना

पाकिस्तान सेना

फरवरी के दूसरे पखवाडे में भारत और पाकिस्तान के बीच  जिस तरह सैनिक तनाव का माहौल बना वैसा कभी भी होने की आशंका सामरिक हलकों में जाहिर की जाती रही है । शुक्र है कि दोनों देशों के बीच तनाव इतना नहीं  भड़का कि खुला युद्ध छिड़ जाए। लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि दोनों देश युद्ध के कगार पर आ गए थे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने  यदि पाकिस्तान को नहीं चेताया होता तो शायद पाकिस्तानी सेना अपनी बेइज्जती का जवाब दिये बिना चैन नहीं लेती।





वास्तव में जेहाद को लम्बे अर्से से बढ़ावा देने वाली पाकिस्तानी सेना का चरित्र खुद भी जेहादी हो गया है। इसके आला अफसर जेहादी सोच के हो गए हैं और जेहाद उनके जेहन में कूट कूट कर भरा होता है। यही वजह है कि भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी मसलों को वार्ता से सुलझाने की पिछले तीन दशकों से की जा रही सभी कोशिशों को विफल किया जाता रहा है। भारत से सुलह का मतलब है कि पाकिस्तान में उनकी विशेष  भूमिका और उनके बने रहने के औचित्य को ही सवालों के घेरे में खड़ा किया जाए। भारत के साथ तनाव बने रहने में ही पाकिस्तानी सेना का  निहित स्वार्थ है।

 भारत लम्बे अर्से से पाकिस्तानी सेना और उसके पिट्ठू नेताओं  के  इस ब्लैकमेल का शिकार हो रहा था कि उसके पास परमाणु बम हैं और इन्हें छोडने के लिये लम्बी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें उसके पास  हैं। इसलिये चाहे वह 1999 में आतंकवादियों के भेष में करगिल की चोटियों पर बैठे पाकिस्तानी घुसपैठिये सैनिक हों या फिर मुम्बई पर 26/11 का पुलवामा से भी अत्यधिक गम्भीर  और क्रूर आतंकवादी हमला हो या 2001 में भारतीय संसद पर किया गया हमला हो इसी परमाणु बम की वजह से  भारतीय नेतृत्व ने कभी भी सीमा पार जा कर  सैनिक हमला कर तनाव भ़ड़काने  की जुर्रत नहीं की। लेकिन  सितम्बर, 2016 में उड़ी सैन्य ठिकाने पर पाक आतंकी हमले के बाद पहली बार भारतीय सेना द्वारा सीमा पार किये गए सर्जिकल हमला के बाद पाकिस्तान सहम गया। भारतीय सर्जिकल हमले का जवाब वह परमाणु बम से तो नहीं दे सकता इसलिये उसने भारत के खिलाफ कम तीव्रता वाले युद् का दायरा बढ़ा दिया है।

यही वजह है कि जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्षविराम तोड़ने की वारदातों में पुलवामा में आतंकी हमले के बाद  भारी इजाफा हुआ है। जम्मू कश्मीर में जगह जगह आतंकी लोगों के साथ सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ें हो रही  हैं।  इनमें भारतीय सुरक्षा बलों को जानमाल की क्षति हो रही है। चूंकि ये हमले घनी आबादी वाले इलाकों में ही हो रहे हैं इसलिये भारतीय सुरक्षा बल सीमित और संयमित कार्रवाई करने को मजबूर होते हैं।

आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने के अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच पाकिस्तान ने दुनिया को दिखाने के लिये कुछ आतंकवादियों की धरपकड़ की है लेकिन यह दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के समान ही है। पाकिस्तान पहले भी ऐसा ही करता रहा है और इस बार भी उसने ऐसा ही कदम  उठाया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हमेशा यह देखा है कि जब जब पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ा है पाकिस्तान सरकार ने कुछ आतंकवादी संगठनों के दफ्तरों औऱ परिसरो  को अपने कब्जे में लेने का दावा किया है। और जब कुछ दिन बाद फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान की ओर से हट जाता है पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन  फिर सक्रिय हो जाते हैं और इनके बारे में पूछे जाने पर पाकिस्तानी नेता यही कहने लगते हैं कि उनके खिलाफ अदालत में साबित करने योग्य ऐसे कोई सबूत नहीं मिले तो उन्हें रिहा करना प़ड़ा।  अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह देखना होगा कि पाकिस्तान इस बार भी वैसा फर्जी कदम नहीं उठाए।

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