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समर नीति: खाड़ी देशों में भारत की बढ़ती पैठ

ओमान में भारतीय वायुसेना

भारत के सामरिक, आर्थिक हितों को मजबूत करने और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के नजरिये से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 29 अक्टूबर को सऊदी अरब का दौरा काफी अहम कहा जाएगा। भारतीय प्रधानमंत्री पिछली  बार सत्ता सम्भालने के बाद से ही खाड़ी के देशों के साथ तालमेल बेहतर करने और रिश्तों को नया आयाम और नई दिशा देने के लिये प्रयासरत रहे हैं और इस इरादे से न केवल खाड़ी के  शिखर  शेखों को  भारत आमंत्रित किया है बल्कि खुद भी खाड़ी के देशों का दौरा किया है। इसके कई  सकारात्मक  नतीजे भारत के लिये  निकले  हैं। सबसे अहम तो यह कि जो पाकिस्तान खाड़ी के मुल्कों को अपनी मुट्ठी में समझता था वह खाड़ी के देशों के भारत के प्रति बदले रवैये से परेशान और चिंतित है। खासकर जम्मू-कश्मीर के मसले पर खाडी के मुल्कों को भारत ने अपने पक्ष में कर लिया है उससे पाकिस्तान हतप्रभ है। मुस्लिम देशों के बीच अपनी पैठ गहरी समझने वाले पाकिस्तान के पांवों तले जमीन हिल सी गई है।





खाड़ी के देशों में करीब 90 लाख भारतीय मूल के कामगार रहते हैं जिनमें  केवल सऊदी अरब में ही 26 लाख भारतीय रहते हैं। खाड़ी में रहने वाले भारतीय सालाना 60 लाख डालर से अधिक विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं जिसका भारत के समग्र विकास में  इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा भारत की कुल ऊर्जा जरुरत का 17 प्रतिशत से अधिक सऊदी अरब पूरी करता है। इससे हम समझ सकते हैं कि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था के लिये भारत की कितनी अहमियत है। इससे भी अधिक  महत्व की बात यह है कि सऊदी अरब भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडार को और बढ़ाने में भी मदद करने को तैयार हो गया है। भारत यह पेट्रोलियम भंडार इसलिये बनाना चाह रहा है कि युद्धकाल में यदि भारत की घेराबंदी हो जाती है और भारत को पेट्रोलियम सप्लाई बंद हो जाती है तो भारत अपने देश की आर्थिक गतिविधियों को चलाते रहने के लिये भारत का अपना पेट्रोलियम भंडार काम आएगा।

सऊदी अरब ने अपने 2030 विजन में भी भारत को अहम स्थान दे कर भारत के साथ रिश्तों को अहमियत बताई है। सऊदी अरब ने इसके लिये जिन 08 बड़े देशों  को चुना है उनमें भारत भी है। सऊदी अरब ने अपने विजन-2030 में भारत के अलावा चीन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, जर्मनी  और जापान को

शामिल किया है। साफ है कि सऊदी अरब ने अपने राष्ट्रीय विकास के नजरिये से जो विजन- 2030 बनाया है उसके तहत वह भारत के साथ रिश्ते निरंतर मजबूत करने की रणनीति पर चलता रहेगा। यही वजह है कि सऊदी अरब ने भारत के सबसे बड़े तेलशोधक कारखाने में निवेश करने का फैसला किया है। इसमें सऊदी अरब के अलावा संयुक्त अरब अमीरात भी निवेश करेगा। इस तेल शोधक कारखाने पर 35 अरब डालर से भी अधिक का निवेश होगा जिससे भारत और सऊदी अरब के बीच  रिश्तों की मजबूत गांठ बंध जाएगी।

इसके अलावा भारत के साथ सामरिक साझेदारी के रिश्तों को निरंतर मजबूती प्रदान करते रहने के लिये स्ऊदी अरब ने सामरिक साझेदारी परिषद की भी स्थापना की है जिसकी अगुवाई खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान करेंगे। इससे साफ है कि दोनों देश रिश्तों को शिखर तक ले जाने के लिये प्रतिबद्ध हैं। सामरिक साझेदारी को मजबूत करने के इस संकल्प को जमीन पर उतारने के लिये दोनों देशों ने दो ईकाइयां गठित की हैं जिसकी अगुवाई दोनों देशों के विदेश और वाणिज्य मंत्री करेंगे। साफ है कि भारत और सऊदी अरब के बीच ठोस आधार ले चुके रिश्तें खाड़ी के दूसरे देशों के लिये एक नजीर साबित होंगे। उम्मीद की जाती है कि खाड़ी के देशों में भारत की यह कूटनीति जल्द ही रंग लाएगी जिससे  भारत के सामरिक हितों का संवर्द्धन हो सकेगा।

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