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समर नीति: मिसाइलों के क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदम

एंटी एयरक्रॉफ्ट मिसाइल प्रणाली
फाइल फोटो

मिसाइलों के क्षेत्र में भारत के कदम निरंतर तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। गत 15 अप्रैल को ओडिशा के अंतरिम परीक्षण  केन्द्र से भारत ने करीब एक हजार किलोमीटर दूर तक मार करने वाली निर्भय सबसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण कर यह साबित किया है कि भारत मिसाइली ताकत के मामले में बड़ी ताकतों से होड़ लेने लगा है।  पिछले तीन दशकों के दौरान भारतीय रक्षा शोध एवं विकास संगठन ने देश को पांच हजार किलोमीटर दूर तक मार करने वाली अग्नि इंटरकंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल से लेकर कम मारक दूरी वाली अग्नि और पृथ्वी  श्रृंखला की मिसाइलें सेनाओं को सौंपी हैं।  भारत के पड़ोस में जब मिसाइलों की तैनाती  हो रही हो तो भारत इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता और अपनी मिसाइल ताकत को निरंतर बढ़ाते रहने की रणनीति पर चलते रहना होगा।





भविष्य के किसी युद्ध में मिसाइलों की बड़ी भूमिका होगी। मिसाइलें ऐसी भूमिका निभा सकती हैं जो बख्तरबंद वाहनों से लैस जमीनी सेना नहीं निभा सकती। जो भूमिका लड़ाकू टैंकों के जरिये दुश्मन के इलाके या दुश्मन के सैन्य जमावड़े को नष्ट करने के लिये निभाई जा सकती है वहीं अब दूर बैठे किसी मिसाइल के जरिये निभाई जा सकती है। मिसाइलों के जरिये दुश्मन के किसी बड़े इलाके को आसानी से तहस नहस किया जा सकता है।

कहा जाता है कि जब अपनी सेना के पास मिसाइली ताकत हो तब पैदल सेना को युद्ध में क्यों  झोंका जाए। पैदल सेना को दुश्मन के इलाके में भेजने के बदले यदि मिसाइलों से ही दुश्मन  इलाके में तबाही फैलाई जा सकती है तो क्यों अपने लड़ाकू जवानों को आग में झोंका जाए। ऐसे में भारत के पास जब निर्भय जैसी मिसाइल हो जो दुश्मन के लक्ष्य को खोज कर तहस नहस करने में सक्षम  होगी तो क्यों नहीं इसका इस्तेमाल किया जाए ताकि घर बैठे ही दुश्मन का सफाया किया जा सके।

कहा जाता है कि निर्भय सबसोनिक क्रूज मिसाइल  जब लांच हो जाएगी तो वह जमीन या समुद्री सतह से केवल कुछ मीटर ऊपर ही उड़ती हुई एक हजार किलोमीटर दूर जा कर दुश्मन के निर्धारित लक्ष्य को तबाह कर देगी।

इसके पहले भारत ने रूस के सहयोग से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का विकास किया  है और भारी संख्या में इसका उत्पादन कर इसे तोनों सेनाओं को सौंपा जाने लगा है। लेकिन इसकी मारक दूरी केवल 280 किलोमीटर  ही है औऱ इसकी करीब पांच सौ किलोमीटर मारक दूरी वाली  किस्म के विकास का काम चल ही रहा है।

 रणक्षेत्र में ब्रह्मोस की अलग भूमिका होगी और निर्भय जैसी क्रूज मिसाइल की अलग भूमिका होगी। निर्भय यदि एक हजार किलोमीटर दूर तक वार कर सकती है औऱ दुश्मन के रेडार इसे देख भी नहीं पाएंगे तो इसका दुश्मन के लक्ष्य पर सटीक मार करना काफी घातक साबित होगा।  भारतीय सेनाओं को इस वक्त ऐसी शस्त्र प्रणाली की भारी कमी महसूस हो रही थी। निर्भय के अब तक सभी पांच परीक्षण कसौटी पर खरे उतरे हैं और जल्द ही इनका उत्पादन शुरु कर सेनाओं को सौंपना शुरु किया जा सकता है। निर्भय औऱ ब्रह्मोस मिसाइलों की जोड़ी भारतीय सेनाओं को अभूतपूर्व ताकत प्रदान करेगी जो एक तरह से लडाकू विमानों की कमी को दूर करेगी।

 राहत की बात है कि भारत अपनी क्षमता पर ही अपने देश में  ताकतवर और विध्वंसक मिसाइलों का विकास करने लगा है। भारतीय सेनाओं को युद्ध काल में  यदि लड़ाकू विमानों की कमी महसूस होगी तो उनके विकल्प के तौर पर क्रूज मिसाइलों का प्रभावी इस्तेमाल कर युद्ध का भविष्य अपने पक्ष में तय करने में कामयाब हो सकती है।

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