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समर नीति: फिर बजा भारत का डंका

एंटी सेटेलाइट मिसाइल

एंटी सेटेलाइट मिसाइल (ASAT)  यानी अंतरिक्ष में तैनात किसी उपग्रह को मार गिराने वाली मिसाइल का सफल परीक्षण कर भारत ने  विश्व सामरिक जगत में अपनी तकनीकी क्षमता और  इससे मिली सामरिक ताकत का फिर डंका बजाया है। भारत ने पहले परमाणु बम क्षमता हासिल करने में हिचक दिखाई और फिर  इन्हें छोड़ने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण भी काफी झिझक कर करते रहे। लेकिन पिछले सालों में भारत ने सभी सामरिक हिचक को दूर कर दिया है और हाल में ऐसे कदम कदम उठाए हैं जिससे भारत के प्रतिद्वंदवियों को यह संदेश मिलेगा कि भारत से पंगा लेना जोखिम मोल लेना होगा।





 चाहे वह जून, 2017 में डोकलाम में चीनी घुसपैठ  का मसला हो या फिर  सितम्बर, 2017  में पाकिस्तान के भीतर घुसकर किये गए पहले सर्जिकल हमले की मिसाल हो या फिर 27 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट आतंकी शिविर पर पहला हवाई सर्जिकल हमला हो भारत ने एक बेहिचक जवाब देने वाले देश की छवि  पेश की है। डोकलाम में चीनी घुसपैठ के दौरान चीन की ओर से भारत को जिस तरह की धमकियां दी गईं उसके आगे कोई भी देश झुक जाता लेकिन भारत अपने कड़े रुख पर अड़ा रहा और चीन की धमकियों का डटकर मुकाबला किया तो चीन अपने कदम वापस लेने को मजबूर हुआ।

 अब एक बार फिर भारत ने दुश्मन में खौफ पैदा करने वाली और अपनी सामरिक क्षमता की  प्रतिरोधक तकनीक का परीक्षण कर दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत में सामरिक मसलों से निबटने की  राजनीतिक प्रतिबद्धता की जो  कमी दिख रही थी  वह भविष्य में नहीं दिखेगी।

अंतरिक्ष में तैनात उपग्रहों को सुरक्षित रखने की चिंता भारतीय रक्षा कर्णधारों को सता रही थी लेकिन बाहरी अंतरिक्ष को शांतिपूर्ण बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्दता आड़े आ रही थी।  जिस तरह परमाणु बम के परीक्षण की तकनीकी क्षमता रहते हुए भी भारत ने साठ के दशक में इसका परीक्षण नहीं किया  इसी तरह अंतरराष्ट्रीय संधियों के दबाव में भारत ने अंतरिक्ष में दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट करने की क्षमता  दिखलाने में  अब तक हिचक दिखाई।

लेकिन अब एंटी सैटेलाइट का परीक्षण कर  भारत ने उन देशों में खौफ पैदा किया है जो  खुद अपनी एंटी सैटेलाइट मिसाइल ताकत बढ़ाने में जुटे हैं और उनसे यह खतरा पैदा होता है कि सैन्य तनाव के वक्त वे भारत के  उपग्रहों को नष्ट कर सकते हैं

लेकिन अब भारत ने भी दुनिया को यह दिखा दिया है कि यदि इसके उपग्रहों को किसी तरह का नुकसान पहुंचाया गया तो  ऐसा करने वाले देश के अंतरिक्ष आधारित संसाधन यानी उपग्रह सुरक्षित नहीं बचेंगे। जवाबी हमला के डर से अब कोई देश भारत के उपग्रहों को नष्ट करने की जुर्रत नहीं कर सकेगा।

 गत 27 मार्च को पृथ्वी की निचली कक्षा में करीब तीन सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर एक उपग्रह को मिसाइल से नष्ट करने की क्षमता दिखाकर भारत ने सामरिक दुनिया में सनसनी पैदा कर दी । मिशन- शक्ति के तहत अंतरिक्ष में उपग्रह को नष्ट करने वाली क्षमता दिखाने के लिये एंटी सेटेलाइट मिसाइल को सफलतापूर्वक छोड़ने का ऐलान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद राष्ट्र के नाम एक संदेश देकर किया।

भारत इस तरह अंतरिक्ष में उपग्रहों को नष्ट करने की क्षमता दिखाने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया । इसके पहले अमेरिका, रूस औऱ चीन ने अंतरिक्ष में उपग्रहों को नष्ट करने की क्षमता दिखाई थी। चीन ने पहली बार 2007 में  करीब 866 किलोमीटर की ऊंचाई पर ध्रुवीय कक्षा में अपने एक निष्क्रिय उपग्रह को निशाना बना कर यह क्षमता दिखाई थी। इसके बाद दुनिया भऱ में चीन की काफी भर्त्सना की गई थी।  लेकिन चीन ने अंतरराष्ट्रीय निंदा की कोई परवाह नहीं की और अपनी एंटीसेटेलाइट क्षमता को बढ़ाने की  महत्वाकांक्षी योजना को अंजाम देन में जुटा रहा। ऐसे में भारत को वह कभी भी  ब्लैकमेल कर सकता था। अब भारत के दुश्मन देशों को जब यह अहसास होगा कि भारतीय उपग्रहों को किसी तरह नुकसान पहुंचाया तो उसके उपग्रह भी सुरक्षित नहीं रहेंगे तब वे भारतीय अंतरिक्ष संसाधनों को किसी तरह नुकसान पहुंचाने के पहले कई बार सोचेंगे।

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