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समर नीति: केंद्रीय बजट से सेनाओं को भारी राहत

रक्षा मंत्री ने किया बजट का ऐलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने  भारत के रक्षा बजट में  भले ही अंतरिम बजट के प्रावधानों से अधिक आवटन  नहीं किया हो हथियारों के आयात पर कस्टम ड्यूटी लगाना बंद करने के फैसले से सेनाओं को  भारी राहत मिलेगी। सेनाओं को हथियारों के आयात के लिये बजट में पूंजीगत खर्च के लिये एक लाख तीन हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जिसमें से विदेशों से आयातित हथियारों पर सेनाओं को सालाना 25 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कस्टम ड्यूटी के तौर पर करना होता था। लेकिन अब नई वित्त मंत्री ने समझ दिखाते हुए हथियारों का आयात शुल्क पूरी तरह हटाने का फैसला किया। वास्तव में आयात शुल्क लगाने का मतलब यही होता था कि सरकार का ही पैसा एक खाते से दूसरे खाते में डाला जाता था।





अब रक्षा मंत्रालय आयातित हथियारों पर आयात शुल्क नहीं लगाने से काफी राहत महसूस करेगा। सच कहा जाए तो वित्त मंत्री ने अप्रत्यक्ष तौर पर रक्षा बजट की खरीद क्षमता बढ़ा दी है। दूसरे शब्दों में कहें तो सेनाओं के  पास अब 25 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त धन और अधिक हथियारों के आयात के लिये बचेगा।  देश के सामने जिस तरह की चुनौतियां उभर चुकी हैं उसके मद्देनजर सेनाओं के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की भारी जरुरत है। सेनाओं को कई तरह की शस्त्र प्रणालियों     की भारी कमी  पिछले दो दशकों से महसूस हो रही है लेकिन धन की कमी और राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से सेनाओं के लिये जरूरी साज सामान वक्त पर नहीं हासिल किये जा रहे थे।

अब जब सरकार ने रक्षा के लिये प्रावधान में सीधे कोई बढ़ोतरी नहीं की हो लेकिन सरकार ने दूसरे हाथ से सेनाओं के लिये अतिरिक्त धन मुहैया करा दिया। इस साल के रक्षा बजट में यदि सीधे 25 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होती तो कहा जाता कि सरकार ने रक्षा के लिये भारी बढ़ोतरी की है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही संदेश जाता कि भारत ने युद्ध की तैयारी के लिये अपने  रक्षा बजट  में भारी बढ़ोतरी की है। लेकिन कस्टम ड्यूटी लगाते रहने का सिलसिला बंद कर वित्त मंत्री ने अकलमंदी से काम लिया है। भारतीय सेनाओं को कस्टम ड्यूटी का भुगतान नहीं करने से जो बचत होगी उससे अब सेनाओं की शिकायत काफी हद तक दूर हो जानी चाहिये।

सच कहा जाए तो भारत जैसे विकासशील देश को  अपने  लोगों के कल्याण और सुरक्षा के लिये जिस तरह शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मौलिक जरुरतों पर अधिक खर्च करने की वक्त की मांग है लेकिन  देश के सामने सुरक्षा चुनौतियां भी मुंह बाए खड़ी रहती हैं। कोई नहीं कह सकता कि भारत की सीमाओं पर कब युद्थ छिड़ जाए। 1999 में किसे पता था कि पाक करगिल की पहाडियों पर चढ़ बैठेगा और भारतीय सेनाओं को इसे खाली कराने के लिये अपनी पूरी ताकत झोंकनी होगी।  इसलिये जरूरी है कि भारतीय सेनाएं हमेशा चुस्त दुरुस्त रहे।  भारत के सामने यह समस्या है कि भारतीय सेनाओं के भंडार में मौजूद हथियारों का किस तरह सक्षम इस्तेमाल किया जाए। या कभी इनके इस्तेमाल का असली वक्त आएगा या नहीं,  लेकिन किसी भी देश को हमेशा इस बात के लिये तैयार रहना होगा कि वह अपने पडोस के आतंकी या सैन्य हमला झेलने के लिये  नई  और जरुरी शस्त्र प्रणालियों से लैस रहे। भारत के सामने जिस तरह की सुरक्षा चुनौतियां भारत के पड़ोस से पैदा होते देखी जा रही है  वे चिंताजनक है। उम्मीद की जानी चाहिये कि आने वाले सालों में  कस्टम  ड्यूटी से मुक्त होने के बाद सेनाएं अपने लिये नई आवंटित राशि का इस्तेमाल  अपनी संहारक क्षमता बढ़ाने में करेंगी।

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