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समर नीति: चीन के पड़ोसी से दोस्ती

भारत-मंगोलिया का संयुक्त अभ्यास
फाइल फोटो- मंगोलियाई और भारतीय सेना

चीन जिस तरह भारत के पड़ोसी देशों में अपनी पैठ बनाने की रणनीति को लम्बे अर्से से अंजाम दे रहा है उसी तरह भारत भी पीछे नहीं रहना चाहता। चीन के पड़ोसी वियतनाम से दोस्ती गहरी करने के बाद भारत चीन के दक्षिणी पड़ोसी मंगोलिया के साथ भी पिछले कुछ सालों से अपने राजनयिक और सामरिक रिश्तों को मजबूती दे रहा है। इसी नजरिये से गत 20 सितम्बर को मंगोलिया के राष्ट्रपति खैतमागिन बातुलगा की यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ आपसी सुरक्षा रिश्तों को गहरा करने पर अहम बात हुई है। भारत मंगोलिया रिश्तों की अहमियत इसलिये बढ़ जाती है कि भारतीय सेनाएं चीन के पड़ोस में जा कर  सैन्य अभ्यास जैसी गतिविधियां कर सकती हैं और वहां अपने सुरक्षा बलों को भेज सकते हैं। मंगोलिया चीन और रूस के बीच स्थित देश है और मंगोलिया के बड़े इलाके पर कुछ 100 साल पहले चीन ने कब्जा कर लिया था जिसे चीन इनर-मंगोलिया कहता है। इसलिये चीन और मंगोलिया के बीच रिश्ते मधुर नहीं रहते हैं। पिछले साल ही जब मंगोलिया ने तिब्बती नेता दलाई लामा के मंगोलिया दौरे का स्वागत  करने वाला बयान दिया तो चीन की धमकी के बाद उसे यह कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।





भारत और मंगोलिया के बीच विचारों में इसी समानता की वजह से भारत और मंगोलिया के बीच दोस्ती गहरी  होती जा रही है। मंगोलिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिये भारत को समर्थन दिया है। हिंद प्रशांत इलाके को लेकर भारत ने जिस तरह अपना रूख दुनिया के सामने पेश किया है मंगोलिया के राष्ट्रपति ने उसका स्वागत किया है।

मंगोलिया के साथ रिश्तों की अहमियत को देखते हुए ही भारत ने मंगोलिया के साथ सामरिक साझेदारी का रिश्ता स्थापित किया है। अब दोनों देश अपनी इस साझेदारी की भावना के अनुरूप सुरक्षा और रक्षा सहयोग के क्षेत्रों में आपसी आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ा रहे हैं। पिछली बार मई, 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब मंगोलिया गए थे तब दोनों देशों के बीच रिश्तों का स्तर ऊंचा कर सामरिक साझेदारी का कर दिया गया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय दौरे एक दूसरे के यहां नियमित तौर पर होने लगे हैं।

इसी भावना के तहत मंगोलिया के नेता ने भारत के हिंद प्रशांत नजरिया को समर्थन प्रदान करते हुए कहा है कि  इस इलाके में खुला, स्वच्छंद और समावेशी ढांचा विकसित होना चाहिये। चीन इस तरह की बातों से चिढ़ता है इसलिये मंगोलिया द्वारा भारत के साथ इस मसले पर समर्थन देना  काफी अहम है।

दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी का रिश्ता स्थापित होने के बाद से ही राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और सीमा सुरक्षा के मसले पर चल रहे सहयोग पर दोनों पक्षों ने संतोष जाहिर किया है। मंगोलिया ने भारत के इस रूख से भी सहमति दिखाई कि वह अंतरराष्ट्रीय सागरीय इलाके में नियम आधारित व्यवस्था चाहता है। गौरतलब है कि चीन ने जिस तरह दक्षिण चीन सागर के इलाके पर अपना दबदबा स्थापित करने के लिये वहां अंतरराष्ट्रीय सागरीय कानूनों को उल्लंघन करना शुरू किया है उसकी दुनिया भर में निंदा होती है।

दोनों देशों ने समान सुरक्षा चिंता के मसलों पर उच्चस्तरीय सलाहमशविरा का दौर जारी रखा है। इसके तहत  हाल में मंगोलिया के रक्षा मंत्री ने भारत का दौरा किया जब कि भारतीय गृह मंत्री ने भी मंगोलिया का दौरा किया है। दोनों देशों की थलसेनाएं भी हर साल एक दूसरे के साथ  साझा युद्धाभ्यास कर  रही हैं। इसके लिए भारत में नोमैडिक एलीफैंट और मंगोलिया में खान क्वेस्ट नाम से साझा युद्धाभ्यास आयोजित किये जाते हैं। मंगोलिया की सेनाओं की क्षमता मजबूत करने में भारत ने वित्तीय मदद भी दी है जिसके लिये मंगोलिया के राष्ट्रपति ने आभार जाहिर किया है।

 साफ है कि चीन के पड़ोसी मगोलिया के साथ भारत के सुरक्षा सहयोग के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं जो भारत चीन रिश्तों के मद्देनजर काफी अहमियत रखते हैं।

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