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समर नीति: 70वें स्थापना दिवस पर चीन की नई सैन्य ताकत

चीन का 70वां स्थापना दिवस

एक अक्टूबर को नव चीन ने अपने 70वें स्थापना दिवस को  धूमधाम से मनाया और इस मौके का लाभ उठाते हुए चीनी जनमुक्ति सेना ने दुनिया को चौंकाने और डराने वाली सैन्य शक्ति का असाधारण प्रदर्शन किया। चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग ने इस मौके का लाभ उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सख्त संदेश दिया कि चीन न तो किसी को डराता है और न ही किसी से डरता है। साथ में यह भी कहा कि चीन न तो किसी की एक  इंच जमीन हथियाएगा औऱ  न ही किसी को अपनी एक इंच जमीन हथियाने देगा। संदेश साफ है कि कोई भी देश चीन से पंगा नहीं ले।  दक्षिण चीन सागर में ऐसे ही हालात विकसित हो रहे हैं जिनमें चीन और अमेरिकी व पश्चिमी सेनाओं के बीच झड़प हो सकती है। दक्षिण चीन सागर के इलाके में नये नये कृत्रिम द्वीपों को चीन द्वारा बनाए जाने के मद्देनजर चीन का यह दावा हैरान करता है कि वह किसी की भी एक इंच जमीन को अपने कब्जे में नहीं लेगा। दक्षिण चीन सागर का यह इलाका काफी विवादास्पद है और चीन व अन्य तटीय देशों के बीच इस वजह से तनाव बढ़ रहे हैं।





पेइचिंग के थ्येनआनमन चौक पर आयोजित सैन्य परेड के दौरान कुछ लाख लोगों के सामने चीनी सेना ने अपने सैन्य भंडार से चुनिंदा संहारक हथियार दुनिया को दिखाए। इनमें से  एक थी तुंगफंग-41 इंटरकंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल। यह मिसाइल  आवाज की  गति से काफी अधिक यानी सुपरसोनिक गति से दुश्मन के इलाकों पर कहर ढा सकती है। ऐसे तो किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की मार से बचना मुश्किल होता है लेकिन  तुंगफंग-41 बैलिस्टिक मिसाइल में  अमेरिका के लिये  खास संदेश यह छुपा है कि इसके प्रहार को कोई भी एंटी मिसाइल प्रणाली यानी अमेरिका की पैट्रियट एंटी मिसाइल प्रणाली बीच आसमान में नहीं रोक सकती है।

चीन का बैलिस्टिक मिसाइल

चीन की इस नई सैन्य क्षमता से दुनिया सहमी हुई है। खासकर अमेरिका के सैन्य रणनीतिज्ञ तुंगफंग-41 की मार से बचने के लिये नई काट की तलाश करने लगे हैं। आज के युग में अमेरिका को कोई  सैन्य चुनौती दे रहा है तो वह चीन ही है और चीन द्वारा इस तरह की सुपरसोनिक  बैलिस्टिक मिसाइल को दुनिया के सामने उजागर करने से अमेरकी की समर नीति की नींव हिल गई है। हालांकि चीन की सैन्य ताकत को अमेरिका औऱ रूस के बाद तीसरे स्थान पर माना जाता है लेकिन एक अक्टूबर को चीनी जन मुक्ति सेना ने जिन अत्याधुनिक हथियारों को  पेश किया उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि चीन अमेरिका के लिये सबसे बड़ा सैन्य सिरदर्द साबित हो सकता है।

 चीन द्वारा इस सैन्य ताकत का प्रदर्शन भारत के लिये भी एक संदेश है।  चीन ने तिब्बत के इलाके में कई बैलिस्टिक मिसाइलों को तैनात कर रखा है। भारत ने इनकी मार से बचने के लिये रूस से अत्याधुनिक एंटी मिसाइल प्रणाली एस-400 खरीदने का सौदा किया है जिन्हें चार सालों के भीतर राजधानी दिल्ली औऱ मुम्बई जैसे शहरों की  मिसाइली हमलों से बचाव  के लिये तैनात किया जाना है।  लेकिन चीन जब इन मिसाइलों की मौजूदगी को देखते हुए  अपनी तुंगफंग मिसाइलों से भारतीय शहरों को निशाना बना सकता है। इस तरह करीब पांच अरब  डालर के इस सौदे को चीन ने अपनी  तुंगफंग-41 मिसाइलों से  एस-400 एंटी मिसाइलों को  बेअसर कर दिया है।

  सैन्य प्रणालियों के मामले में चीन की यह बढत भारतीय समर नीति के लिये नई चुनौती पेश करती है। चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था के बल पर अपनी सैन्य  ताकत को मजबूत बनाया है और अब चीन अपनी सैन्य प्रणाली की ताकत पर दुनिया मे  धौंस दिखा रहा है और अपने इलाकों के विस्तार की रणनीति में जुटा है।

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