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समर नीति: चीन के रवैये से रिश्तों में बढ़ेगा तनाव

भारत-चीन सीमा
फाइल फोटो

गत 11-12 अक्टूबर को चीनी राष्ट्रपति शी चिन फिंग के भारत दौरे में हुई मीठी बातों का कोई सकारात्मक असर भारत के साथ रिश्तों को लेकर नहीं दिख रहा। चीन ने जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले पर कड़ा एतराज कर भारत की सम्प्रभुता को चुनौती दी है। जवाब में भारत ने भी चीन को आगाह किया है कि भारत के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करे। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अप्रैल में चीन के ऊहान शहर में  राष्ट्रपति शी चिन फिंग के निमंत्रण पर अनौपचारिक शिखर वार्ता करने गए थे जिसके बाद भारत औऱ चीन में ऊहान भावना के पैदा होने की बात कही गई थी।लेकिन यह ऊहान भावना कुछ महीनों बाद ही काफूर हो गई और जुबानी जंग का सिलसिला फिर शुरू हो गया।





 जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला चीन को पच नहीं रहा। यह  फैसला गत पांच अगस्त को लिये जाने के बाद 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की 144वीं सालगिरह पर लागू कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर के दोनों केन्द्र शासित प्रदेश अब अलग केन्द्र प्रशासित इकाईयों के तौर पर एक नवम्बर से सक्रिय हो गई  हैं। 05 अगस्त को इस आशय का फैसला लिये जाने के बाद चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की थी और अब एक नवम्बर से इन केन्द्र शासित प्रदेशों का कामकाज स्वतंत्र केन्द्र प्रशासित इकाइयों के तौर पर  शुरू  होने के बाद चीन ने एक बार फिर कड़ा बयान जारी किया  है।

भारत ने चीन के उक्त बयान का तीब्र  प्रतिवाद किया है। भारत ने चीन को आगाह किया है कि जिनके घर शीशे के होते हैं वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। भारत ने चीन से साफ शब्दों में कहा है कि चीन भारत के अंदरूनी मामलों में वैसे ही हस्तक्षेप नहीं करे जैसे कि भारत ने हांगकांग और शिन्च्यांग में चल रहे घेरूलू असंतोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के इलाके भारत के  हिस्सा हैं और भारत का अंदरूनी मामला है। इस बारे में भारत को रूस, जर्मनी, अमेरिका आदि से पूरा समर्थन मिला है।

भारत सरकार ने पहली बार चीन को सार्वजनिक तौर पर यह याद दिलाने की हिम्मत की है कि साल 1963 में पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का जो इलाका चीन को एक गैरकानूनी समझौता कर दे दिया था वह वास्तव में जम्मू-कश्मीर  का यानी  भारत का हिस्सा है। इसके अलावा चीन ने पाक कब्जे वाले कश्मीर से होकर  जो चीन पाक आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) बनाने की अनुमति दी है वह भी गैरकानूनी है।

वास्तव में चीन भारत सरकार के इस कदम से तिलमिला गया है। उसका लद्दाख के एक बड़े भूभाग पर दावा है जब कि जम्मू कश्मीर के अक्साई चिन वाले बड़े इलाके पर उसने साल 1962 में ही कब्जा कर लिया था। चीन नहीं चाहता कि भारत के इस कदम पर मौन रह कर लद्दाख के इलाके पर  भारत के आधिपत्य को जायज ठहराया जाए। चीन का  दावा  है कि लद्दाख का इलाका तिब्बत का इलाका है  औऱ इस नाते वह चीन का इलाका है। लेकिन भारत ने चीन के इस दावे को हमेशा ही गलत बताया है औऱ कहा है कि लद्दाख के कुछ इलाके पर चीन का अनधिकृत कब्जा है।

भारत को लेकर  उग्र रवैया  भारत के राजनयिक पर्यवेक्षकों को हैरान कर रहा है। चीन ने  पिछले कुझ दशकों से आपसी भरोसा और विश्वास का रिश्ता बनाने की बात की है लेकिन इस तरह के बदले हुए रुख से विश्वास का रिश्ता तो नहीं बन सकता। इससे दोनों देशों के बीच तनाव औऱ बढ़ेगा ही।

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