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समर नीति: कश्मीर में शांति के प्रतीकों पर हमला

भारतीय सेना

जम्मू-कश्मीर में अगस्त के पहले सप्ताह में धारा-370 के प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले के बाद सरकार ने  वहां पाकिस्तान प्रेरित हिंसा और विद्रोह को रोकने के लिये कई कदम उठाए हैं जिन्हें अब एक एक कर वापस लिया जा रहा है। इनमें टेलीफोन और  मोबाइल फोन सेवा बंद करना, कश्मीर के सैंकड़ों नेताओं को घरों में नजरबंद रखना, स्कूल कॉलेज बंद कर देना आदि शामिल है। इन कदमों से कई को वापस लेने के बाद कश्मीर के हालात जब सामान्य से होने लगे तो सरकार ने  आम जनता पर लगाई बंदिशों को एक एक कर हटाना शुरू किया तो वहां आम लोगों ने राहत की सांस ली और उनकी खुशियां लौटने लगीं। लोग अपने सामान्य दैनिक रूटीन में लौटने लगे। व्यापार धंधे सामान्य होने लगे।





लेकिन पाकिस्तान के पिट्ठू आतंकवादियों को यह सब कैसे पसंद आएगा। यदि वहां हालात इसी तरह सामान्य चलते रहे तो पाकिस्तान की सारी रणनीति विफल हो जाएगी। उसकी पूरी कोशिश होगी कि वह जम्मू-कश्मीर में व्यापक विद्रोह औऱ हिंसा की तस्वीर दुनिया के सामने पेश करे और दुनिया को बताये कि भारत ने जम्मू-कश्मीर के निहत्थे, निर्दोष लोगों के साथ किस तरह अमानवीय व्यवहार किया है। एक ऐसा देश जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन के आरोप भारत पर लगा रहा है जो खुद अपने इलाके में बलुचिस्तान औऱ सिंध से लेकर अफगानिस्तान से सटे इलाके में अपने ही  लोगों पर बर्बर अत्याचार करता रहा है। इसके अलावा वह अपने पड़ोसी देशों भारत और अफगानिस्तान में अपने सामरिक हितों की पूर्ति के लिये आतंकवादियों को भेजकर हिंसा और खूनखराबा करवा कर लोगों को हमेशा आतंकित रखने की रणनीति पर चल रहा है।

यही वजह है कि पाकिस्तानी इशारों पर राज्य में शांति व सामान्य हालत दिखाने वाले जितने प्रतीक हैं उन पर  लगातार हमले किये गए। इनमें  ईंट भट्ठा चलाने वाला मजदूर, सेव बगान के मालिक , ट्रक ड्राइवर आदि की हत्या शामिल है। ऐसा कर आतंकवादी तत्व कश्मीरी लोगों को आतंकित करना चाहते हैं ताकि वे राज्य मे हालात सामान्य होने के भागीदार नही बनें। इस तरह वहां शांति और सामान्य हालात दिखाने वाले लोगों के खिलाफ चुन चुन कर हमले किये जा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में गत अढ़ाई महीने से हालात सामान्य बनाने की कोशिशों के तहत ही भारत सरकार ने  राज्य में उन ताकतों के खिलाफ कार्रवाई की है जो भारत से अलग होने के लिये पाकिस्तान के इशारों पर नाच रहे हैं। वास्तव में वे पाकिस्तान के भाड़े के सैनिक और राजनेता ही कहे जा सकते हैं जो रहते तो भारत में है  लेकिन पाकिस्तान से पैसे लेकर वहां की सेना के हथकडें बनने को तैयार हो जाते हैं।

निस्संदेह पाकिस्तान को इसलिये हताशा औऱ निराशा हो रही है कि पिछले अढ़ाई महीने से जम्मू-कश्मीर में धारा- 370 हटान के विरोध में कोई बड़ी हिंसक कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिये पाकिस्तान की हर सम्भव कोशिश होगी कि वह जम्मू-कश्मीर या भारत के अन्य इलाकों  में कोई बडी आतंकवादी कार्रवाई करवाए। इससे देश भर में कश्मीरियों और मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनेगा जिसका फायदा पाकिस्तान इस रुप में उठाएगा कि वह दुनिया से कह सकेगा कि भारत न केवल कश्मीर बल्कि पूरे देश में सरकारी हिंसा से अपने लोगों को काबू में रखने की कोशिश कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर में पिछले सात दशकों से  अनुच्छेद-370 एक अस्थायी प्रावधान  के तौर पर लागू था लेकिन इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर में लोग पाकिस्तान की साजिशों के शिकार होते रहे जिसके खिलाफ भारतीय सुरक्षा बलों को सख्ती बरतने को कहा जाता है। लेकिन इस दौरान मानवाधिकारों का पूरा ख्याल रखा जाता है।

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