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जवानों का मनोबल बढ़ाने वाला कदम

रंजीत-कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

रंजीत कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

एक महिला रक्षा मंत्री के रक्षा मंत्रालय में कदम रखते ही सेनाओं का महिलाओं के प्रति रुझान बढ़ा हुआ दिखने लगा है । हालांकि इसे एक महज संयोग ही कहा जा रहा  है कि  निर्मला सीतारमण के पद सम्भालने के साथ ही थलसेना ने  अपनी मिलिट्ी पुलिस में महिलाओं की भर्ती करने का ऐतिहासिक एलान किया लेकिन  सेना के आम जवानों से जुड़ा इससे अधिक अहमियत रखने वाला एक दूसरा अहम फैसला थलसेना ने लिया है जिसकी फाइल पिछले छह सालों से रक्षा व वित्त मंत्रालयों के चक्कर काट रही थी। यह फैसला है देश के करीब दस लाख से अधिक जवानों में अधिक जोश भरने का कदम जिसकी प्रतीक्षा करीब तीन दशकों से की जा रही थी। थलसेना के जवानों में  से केवल एक चौथाई ही अपने  करीब दो से तीन दशक के कार्यकाल में पदोन्नति हासिल कर पाते हैं।  थलसेना के जवानों के रैंक का काडर रिव्यू पिछली बार 1984 में हुआ था और कायदे से हर पांच साल पर ऐसी समीक्षा की जाताी रहनी चाहिेये लेकिन लगता है राजनीतिक नेतृत्व और थलसेना के आला अफसर केवल अपने ही उज्जवल भविष्य की चिंता करते रहे। बहरहाल नई रक्षा मंत्री  के दायित्व सम्भालने के साथ ही यह दूसरा सबसे बड़ा फैसला थलसेना मुख्यालय ने सुनाया है जो थलसेना के आम जवानों के जीवन में नया जोश पैदा कर  सकता है।





रोचक बात यह है कि थलसेना के इस काडर रिव्यू की वजह से सरकारी खजाने पर केवल 20 करोड़ रुपये का ही अतिरिक्त बोझ पड़ेेगा लेकिन इस पर भी वित्त मंत्रालय को अपनी मंजूरी देने में छह साल लग गए। अभी भी वित्त मंत्रालय की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि ताजा प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिलेगी।  थलसेना के इस ताजा काडर रिव्यू की वजह से थलसेना के करीब डेढ़ लाख जवानों को कम वक्त मे  ही पदोन्नति मिलेगी।
सिपाही के तौर पर भर्ती किये जाने वाले जवानों में अब तक सात प्रतिशत ही आठ साल में नायक  और 16 साल में हवलदार बनते रहे हैं। लेकिन अब सेना के जवानों के नौ प्रतिशत नायक रैंक में पदोन्नति पा जाएंगे जब कि पदोन्नति पाने वाले हवलदारों का अनुपात 18 प्रतिशत से बढक़र 25 प्रतिशत हो जाएगा साफ  है कि नये काडर रिव्यू की बदौलत अब अधिक संख्या में जवानों को हवलदार बनने का मौका मिलेगा और इसमें कम वक्त भी लगेगा। इन सभी पदों को  पांच साल के भीतर भर दिया जाएगा।

चूंकि आज की सेना आधुनिक युग में विकसित हो रही है इसलिये इसके जवानों को भी इतना प्रशिक्षित और शिक्षित होना होगा कि वे अपनी जिम्मेदारियों और ड्युटी को भलि भांति समझ सकें।  चूंकि आज सेना में नई ऊंची तकनीक वाले हथियारों और शस्त्र प्रणालियों को शामिल किया जा रहा है इसलिये जवानों को भी इसके अनुकूल शिक्षित और प्रशिक्षित होना जरूरी हो गया है। जवानों के बीच से ही जो पदोन्नति पा कर जूनियर कमीशंड अफसर बनते हैं वे सेना के आला अफसरों और जवानों के बीच सम्पर्क और संवाद का पुल बनते हैं।  इन्हीं जूनियर कमीशंड अफसरों की जमीनी जानकारी की बदौलत ही आला अफसर  जमीनी हालत से अवगत रहते हैं। इसलिये यह बहुत जरूरी हो  गया था कि सेना की रीढ़ इन जवानों का मनोबल हमेशा ऊंचा रखने के लिये इन्हें समुचित सम्मान मिलता रहे।

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