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सैल्यूट मार्शल अर्जन सिंह

दिनेश-तिवारी

दिनेश तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार)

हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पर रोती है,





बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।

मार्शल ऑफ द एयरफोर्स और 5 स्टार रैंक प्राप्त 1965 जंग के महानायक अर्जन सिंह ऐसी ही मिसाल हैं जिन्होंने उच्च मानवीय मूल्यों के साथ जीवन का एक-एक पल भारतीय वायुसेना के लिए जिया। यूं तो भारतीय सैन्य इतिहास के इस नायक के खाते में उपलब्धियों की तमाम बेमिसाल घटनाएं दर्ज हैं। पर पाकिस्तान के साथ 1965 की लड़ाई में उनकी उपलब्धि अविस्मरणीय और सराहनीय है।

उस वक्त पाकिस्तान अपनी सामरिक शक्तियों से खुद को मजबूत कर पूरे कश्मीर पर कब्जा करने की रणनीति बना रहा था। प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से चीन का समर्थन भी उसे ताकत दे रहा था। इस बीच पकिस्तान ने ऑपरेशन ‘ग्रैंडस्लेम’ शुरू कर अखनूर शहर को निशाना बनाया। उस समय भारतीय वायुसेना की समग्र कमान अर्जन सिंह के पास थी। दिल्ली में रक्षा मंत्री के दफ्तर में उन्हें तुरंत बुलाया गया और सहायता मांगी गई। उनसे पूछा गया…कितना वक्त ? और उनका जवाब था एक घंटे में..। पूरा जायजा लेने के बाद चंद मिनटों में पकिस्तान के टैंकों को ध्वस्त करने का आदेश आया और जब तक पकिस्तान कुछ समझ पाता तब तक उसके लिए बहुत देर हो चुकी थी। ऐसे थी उस वक्त के 44 वर्षीय एयर चीफ अर्जन सिंह की पाक टैंकों पर एक साथ कई एयरक्राफ्ट से ताबड़-तोड़ हमला करने की कुशल सैन्य सोच। जिसने उन्हें योद्धा से महायोद्धा की श्रेणी में खड़ा कर दिया।

1947 में भारत-पाक बंटवारे के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना को एक नवजात शिशु की तरह पाला-पोसा और बड़ा किया। सेना के इस अंग की खूबियां और चुनौतियां को वे बखूबी समझते थे। उनकी अगुवाई में एयरफोर्स के पेशेवर जुझारू योग्यता के साथ कदम बढे और उसका नतीजा है कि वायुसेना के पास आज आधुनिक लडाकू विमान हैं। जिन्हें जांबाज काबिल पायलट उड़ाते हैं। उनका मानना था कि लड़ाई केवल हथियारों से ही नहीं, साहस, धीरज और समय के मुताबिक बेहतर निर्णय लेने से जीती जाती हैं। ऐसी सोच के प्रेरणा पुरुष और भारतीय शौर्य के प्रतीक पुरुष थे मार्शल अर्जन सिंह।

वे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। मात्र 19 बरस की उम्र में उनका इम्पायर पायलट ट्रेनिंग कोर्स के लिए चयन हो गया था। सन् 1969 में वायुसेना से रिटायर होने के बाद सरकार ने उन्हें राजनयिक और कूटनीतिक जिम्मेदारियां दीं। स्विट्जरलैंड में राजदूत, केन्या में उच्चायुक्त, दिल्ली के उपराज्यपाल, आईआईटी दिल्ली के चेयरमैन  के रूप में उन्होंने उत्साह, आत्मविश्वास, निष्ठा और जवाबदेह जिम्मेदारी के साथ काम किया। समाज सेवा, परोपकार भी उनके खून में था। बहुत कम लोग इस बात को जानते होंगे कि उन्होंने सेवानिवृत जवानों तथा उनके बच्चों की भलाई के लिए अपनी संपत्ति बेचकर दो करोड़ रुपये की राशि एयरफोर्स एसोशिएशन को दी थी। इन्हीं सेवाओं, उदात्त भावनाओं की वजह से उनका नाम आज इतिहास में दर्ज हो गया है।

मार्शल अर्जन सिंह का पूरा जीवन भारत की मिट्टी और देश की ‘आत्मा’ के लिए समर्पित था। उनके लिए भारत तथा भारतीय वायुसेना सदैव सर्वोपरि थी। ऐसी सोच, ऐसे गुण, ऐसे मानवीय मूल्य विरलों को ही नसीब होते हैं। ऐसे ही पुरुष वीर होते हैं और परमवीर होते हैं। उनकी सोच, प्रेरणा, गुण हमारे लिए और देश की नई युवा पीढ़ी के लिए धरोहर हैं, विरासत हैं। रक्षक न्यूज परिवार तथा देशवासियों की ओर से हम मार्शल अर्जन सिंह को गर्व के साथ सादर नमन करते हैं।

जय हिन्द

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