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स्थानीय मीडिया में प्रचारित हों जवाबी हमलों की रिपोर्ट

सीमा पर जवाबी कार्रवाई करते जवान

अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) और नियंत्रण रेखा (एलओसी) सक्रिय हैं। दोनों ही तरफ हताहतों की तादाद बढ़ रही हैं, नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है, पूरे दिन चलने वाली गोलीबारी में चौकियां नेस्तनाबूद की जा रही हैं। ऐसी खबरें आई थी कि बीएसएफ द्वारा बदले की कार्रवाई में उनके बंकरों को ध्वस्त किए जाने के बाद पाक रेंजर अमन की दरख्वास्त कर रहे हैं, लेकिन अगले ही दिन उनकी तरफ से हमलों में तेजी आ गई। ऐसा संभवतः उन्हें सेना से मिले निर्देशों के बाद हुआ होगा, जिन्होंने उनकी गुजारिश, जिसे पूरी भारतीय मीडिया में लगातार उछाला गया, को अपने देश के लिए अपमान माना। इसी के साथ-साथ, ऐसी भी सूचनाएं लगातार आती रहीं कि आतंकी पाकिस्तान से घुसपैठ के निर्देश की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो केवल गोलीबारी के कवर के तहत ही संभव पाएगा।





हर साल फसलों की कटाई के बाद से दोनों ओर से गोलीबारी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बीएसएफ द्वारा भी इसकी पुष्टि की गई, जब उसके प्रवक्ता ने कहा कि सीमा पर गोलीबारी के मौजूदा दौर की आशंका थी क्योंकि अब फसल कटाई का मौसम समाप्त हो चुका है। बीएसएफ के एक अधिकारी ने कहा, ‘वे ऐसी कार्रवाइयां सीमा पर माहौल को बिगाड़ने के लिए करते हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि, ‘रमजान के महीने में कार्रवाई स्थगित करने का मसला कश्मीर घाटी में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित है। इसका आईबी या नियंत्रण रेखा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।’  इसलिए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मौजूदा हालात बने रहेंगे।

ज्यादातर गोलीबारी जम्मू सीमा पर वहां हो रही है जहां डोगरा का दबदबा है, जिनके गांव लगभग अंतरराष्ट्रीय सीमा तक फैले हुए हैं। सबसे ज्यादा अरनिया गांव को निशाना बनाया जाता है, जो संभवतः राज्य का सबसे बड़ा गांव है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ गोलीबारी स्थानीय नागरिकों में खौफ पैदा करने एवं पाक से बातचीत करने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए की जाती है। दूसरी तरफ, नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी मुख्य रूप से घाटी में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए की जाती है क्योंकि पाकिस्तान इस बात से वाकिफ है कि वह कश्मीर की लड़ाई हार रहा है वजह यह है कि प्रशिक्षित आतंकवादी तेजी से हलाक हो रहे हैं। पिछले सप्ताहांत में तंगधार सेक्टर में पांच आतंकियों का खात्मा इसका बड़ा प्रमाण है।

विशेष रूप से दक्षिण कश्मीर में  ज्यादातर नामजद स्थानीय आतंकी नेता कश्मीरी हैं और उन्होंने हाल ही में बंदूकें थामी हैं। घुसपैठ बहुत धीरे-धीरे हो रही है और जो घुसपैठ करने में कामयाब भी हो रहे हैं, उन्हें अंदरुनी हिस्सों तक पहुंचने के पहले ही मार दिया जा रहा है। ज्यादा घुसपैठ कराने के लिए, नियंत्रण रेखा का अनिवार्य रूप से सक्रिय बने रहना चाहिए।

चूंकि गोलीबारी के स्तर में बढ़ोतरी होने की आशंका थी लिहाजा स्थानीय नागरिकों को पहले ही चेतावनी देकर घरों के अंदर बने रहने या सुरक्षित ठिकानों पर चले जाने की सलाह दी जानी थी। लक्ष्य यह होना चाहिए था कि अपने नागरिकों के हताहत होने की संख्या में कमी लाई जाए क्योंकि इससे स्थानीय मनोबल पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और युद्ध के विरोधी तथा स्थानीय राजनेता बातचीत शुरू करने के लिए हल्ला मचाने लगते हैं।

इसके साथ-साथ, सीमा पर तैनात हमारी सेना पाक कार्रवाई का प्रत्युत्तर देगी। यह जवाबी हमला उन्हीं के समान होगा या हमारी तरफ से ज्यादा आक्रमक होगा, क्योंकि दोनों ही पक्ष गोलीबारी के जरिये सीमा पर दबदबा एवं अपनी श्रेष्ठता बनाये रखना चाहते हैं। भारतीय सेनाएं बेहतर रूप से सुसज्जित हैं और उन्हें दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने की आजादी मिली हुई है।

वर्तमान माहौल घाटी में शांति के पक्षकारों एवं स्थानीय राजनेताओं को एक प्रकार की चेतावनी भी है जो पाकिस्तान के साथ बातचीत करने की बीन बजाते रहे हैं। कोई भी देश उस वक्त बातचीत करने पर विचार नहीं करेगा जब उसके नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा हो और मासूम बच्चों का कत्ल किया जा रहा हो, जैसाकि भारत की विदेश मंत्री ने कहा भी है। इस मोड़ पर बातचीत की चर्चा करना पीछे हटने जैसा कदम होगा और एक प्रकार की कमजोरी भी होगी, जबकि बातचीत करने के प्रस्ताव को एक मजबूत स्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए।

भारतीय प्रेस का जोर उसके अपने हताहतों पर है जबकि जवाबी कार्रवाई करने और पाक चौकियों एवं गांवों पर इसी प्रकार के प्रभाव के बारे में न के बराबर खबरें हैं। जब तक जवाबी कार्रवाई के बारे में मीडिया में अधिक कवरेज नहीं होती, हमारे देश के लोगों की अवधारणा यही होगी कि हम ही पीड़ित हैं और पाकिस्तान का हम पर दबदबा है। उनकी मीडिया ने जिन पर पाकिस्तान के प्रभावी लोगों के समूह (डीप स्टेट) का सीधा नियंत्रण है, गोलीबारी एवं उनकी तरफ होने वाले हताहतों का कोई जिक्र नहीं किया, जिनकी संख्या या तो बराबर रही होगी या हो सकता है अधिक भी रही हो। इसका नतीजा हताहतों की एकतरफा रिपोर्ट के रूप में सामने आता है, जो न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे देश के मनोबल को प्रभावित करती है।

यह एकतरफा रिपोर्टिंग राष्ट्रीय स्तर पर गुस्से को बढ़ा सकती है और पाकिस्तान के खिलाफ नफरत में और इजाफा कर सकती है। साथ ही ऐसा संदेश भी दे सकती है कि वे हमारी तुलना में मजबूत स्थिति में हैं। इसलिए धारणा प्रबंधन पर इस प्रकार विचार किए जाने की आवश्यकता है कि भारत की जवाबी कार्रवाई एवं पाक में हताहत होने वालों की संख्या की सच्ची तस्वीर सही तरीके से सामने आ सके। इसलिए बीएसएफ व सेना के प्रवक्ताओं को चाहिए कि वे नियमित रूप से भारत की जवाबी कार्रवाईयों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएं।

चाहे आईबी हो या नियंत्रण रेखा, वहां की जोरदार जवाबी हमलों की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से सही तरीके और तत्परता से स्थानीय मीडिया में प्रचारित की जानी चाहिए। देश को निश्चित रूप से यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी है तथा राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली है और उसके सुरक्षा बल कभी भी पाकिस्तान को सीमा पर हावी नहीं होने देंगे। पूरे देश के धारणा प्रबंधन के लिए सही तस्वीर अनिवार्य है।

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है।

ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

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