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विशेष रिपोर्टः शायद इस तरह कस सके पाकिस्तान की नाक में नकेल

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण

अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकवाद की वजह से पूरा इलाका अशांत है और इस नाते भारतीय सुरक्षा पर प्रतिकूल आंच पड़ रही है। तालिबान को सैनिक साजो-सामान की मदद दे कर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की नाक में दम किया हुआ है लेकिन पाकिस्तान की नाक में नकेल कसने के लिये कोई आगे नहीं आ रहा। क्षेत्रीय सुरक्षा पर यहां भारत और रूस के सामरिक विशेषज्ञों के बीच वीडियो कांफ्रेंस का आयोजन हुआ जिसमें दोनों देशों के विशेषज्ञों ने तालिबान से निबटने के मसले पर प्रतिकूल विचार जाहिर किये।





मास्को में रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा चार और पांच अप्रैल को क्षेत्रीय सुरक्षा के मसले पर एक अंतररष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हो रहा है जिसमें भारतीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी भाग ले रही हैं। इस मौके पर रूस  और भारत के विशेषज्ञों के बीच रूसी सूचना केन्द्र द्वारा आयोजित वीडियो कांफ्रेंस ने मास्को सुरक्षा सम्मेलन के विचारणीय मसलों पर चर्चा की। रूसी विशेषज्ञों के इस विचार का भारतीय प्रतिनिधियों ने प्रतिवाद किया कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार है। पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार ने कहा कि पाकिस्तान अपनी ही नीतियों की वजह से आतंकवाद का शिकार हुआ है। वास्तव में यदि कोई अपने घर के पिछवाड़े में सांप इसलिये पालेगा कि दुश्मन को कटवाए तो वह खुद को धोखे में रख रहा है। वह सांप अपने मालिक को भी काट सकता है।

पाकिस्तान के साथ यही हो रहा है। पाकिस्तान में तहरीके तालिबान पाकिस्तान(टीटीपी) एक ताकतवर आतंकवादी गुट के तौर पर उभरा है जो कि पाकिस्तान द्वारा खडी की गई तालिबान की एक शाखा है। जहां अफगान तालिबान अफगान सरकार की जड़ें उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहा है वहीं टीटीपी ने पाकिस्तान सरकार की नींद उड़ायी हुई है।

लेकिन रूस के पूर्व राजदूत ग्लेब इनाशेन्तसोव का मानना था कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आतंकवाद की वजह से भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्तों में तनाव हैं जिसे दोनों देश आपस में मिलकर सुलझाएं। लेकिन भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह कह कर कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार है अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को यह सर्टिफिकेट दे रहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

रूसी विशेषज्ञों के मुताबिक अफगानिस्तान का आधा से अधिक इलाका तालिबान के कब्जे में है इसलिये इस सच्चाई के मद्देनजर अफगानिस्तान सरकार को तालिबान से बात करनी चाहिये। लेकिन रूसी विशेषज्ञों ने एक सवाल के जवाब में गोलमोल जवाब दिया कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय दुष्ट तालिबानी  आतंकवादियों के आगे आत्मसमर्पण कर रहा है। क्या इन तालिबानी आतंकवादियों को ही यदि परास्त कर दिया जाए तो अफगानिस्तान की जनतांत्रिक सरकार को अपना राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र के विस्तार का अच्छा मौका नहीं मिलेगा?

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित सम्मेलन भारतीय रक्षा मंत्री सीतारमण  के लिये एक मौका प्रदान करेगा कि वह अफगानिस्तान की जमीनी सचाई से सभी देशों को अवगत कराएं ताकि दुष्ट तालिबानी तत्वों के खिलाफ सघन कार्रवाई कर वहां शांति की बहाली की जा सके। ऐसा करने के लिये अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आपसी मतभेद भुलाकर और अपने निहित स्वार्थों से ऊपर उठकर तालिबान और पाकिस्तान के गठजोड़ के खिलाफ सघन कार्रवाई करनी होगी लेकिन चीन और पाकिस्तान के बीच सांठगांठ के मद्देनजर यह मुमकिन नहीं लगता इसलिये अफगानिस्तान में तालिबान औऱ राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार के बीच मेल-मिलाप की बात की जा रही है लेकिन तालिबान किसी मेल-मिलाप में विश्वास नहीं करता। वह अकेला ही अफगानिस्तान की गद्दी सम्भालना चाहता है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ऐसा होने दिया तो यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिये काफी घातक साबित होगा।

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