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स्कूलों में पुलिस की ट्रेनिंग, एक अच्छी पहल

कोझीकोड के स्कूली बच्चों को दी गई ट्रेनिंग

केन्द्रीय गृह मंत्रालय और मानव संसाधन मंत्रालय की निगरानी में तैयार किया गया स्कूलों में बच्चों को ट्रेनिंग देने का कार्यक्रम एक तरह किशोर पीढ़ी को सामाजिक व्यवस्था के प्रति अधिक जागरूक तथा मन से जवाबदेह बनाने का काम करेगा। इसमें दो राय नहीं कि केन्द्र सरकार की यह एक अभिनव व बेहतर पहल है जिसके तहत स्कूलों में पढ़ रहे आठवीं व नौवीं के बच्चों को पुलिस ट्रेनिंग दी जाएगी। चूंकि पहल नई है तथा इसी महीने शुरू होनी है लिहाजा स्टूडेंट पुलिस कैडेट (एसपीसी) अभी देश भर के केन्द्रीय विद्यालयों व नवोदय विद्यालय में शुरू किया जा रहा है और बाद में इसकी पहुंच देश के सभी सरकारी स्कूलों में होगी, ऐसा सरकार का कहना है। पर सवाल यह है कि यह कार्यक्रम केवल देशभर के सरकारी स्कूलों में ही क्यों शुरू किया जायेगा। समूचे देश के प्राइवेट तथा बच्चों को अंग्रेजीदां बनाने का दंभ भरने वाले स्कूलों में इस अनूठे कार्यक्रम को क्यों नहीं शुरू किया जा रहा ?





जब यह बात पूरी तरह स्पष्ट है कि सरकार के इस कार्यक्रम का मकसद छात्र-छात्राओं में राष्ट्रीय भावनाओं को भरना तथा उन्हें जिम्मेदार बनाना है तो यह बात देश भर के सुदूर गांव से लेकर भव्य इमारतों तक में संचालित किए जा रहे स्कूली बच्चों को इस पहल से क्यों वंचित किया जा रहा है। इसे सभी स्कूलों में आखिर क्यों नहीं लागू किया जा रहा? यह प्रोग्राम नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) तथा नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) की तरह है। लिहाजा स्टूडेंट पुलिस कैडेट प्रोग्राम के जरिए देश के तमाम लाखों-लाख छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित किए जाने की जरूरत है। तभी यह प्रोग्राम सार्थक साबित होगा।

मौजूदा दौर में महानगरों, नगरों, कस्बों, यहां तक कि गांव में भी नागरिक भावना, लोकतांत्रिक व्यवस्था के सम्मान तथा समाज व देश के प्रति जिम्मेदारियों का ताना-बाना बहुत स्वस्थ नहीं दिखाई दे रहा है। इस बात के लिए सभी एक-दूसरे पर प्रत्यारोप लगाते हैं। आज देश के तमाम बच्चे नशीले पदार्थों के सेवन घर आस-पड़ोस, सड़क, स्कूल में अपने अनुचित-अप्रत्याशित व्यवहार तथा अंडरएज सेक्स जैसी परेशानियों से घिरे हुए हैं। उनके लिए यह प्रोग्राम नई चेतना का संचार करेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। अलावा इसके इस प्रोग्राम के तहत पुलिस व सिविल कानूनों की छोटी-छोटी जानकारी किशोर पीढ़ी को प्रेरित करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का काम करेगी। पुलिस की यह ट्रेनिंग निश्चित तौर पर उन्हें जागरूक, जिम्मेदार तथा जवाबदेह नागरिक बनाने की दिशा में काम करेगी। यह बात केरल के कोझीकोड के स्कूली बच्चों की इच्छा व रुझान के आधार पर कही जा सकती है। जब इन पुलिस से प्रशिक्षित बच्चों ने जनवरी 2010 में कोझीकोड में भीड़ प्रबंधन पर अपनी क्षमता और आत्मविश्वास का उपयोग किया था।

ऐसे में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नीति-नियंताओं, समूची ब्यूरोक्रेसी तथा हर दल के छोटे-बड़े राजनीतिकारों को यह बात भली-भांति समझनी होगी कि विविध जानकारी से भरी अनुशासित ट्रेनिंग बड़े काम की होती है। वह समय पर स्वंय के साथ समाज तथा देश का भला करती है। इजरायल में प्रत्येक युवा के लिए आर्मी की ट्रेनिंग अनिवार्य है। इसका लाभ वहां मिल रहा है। अपने देश में भी एनसीसी व एनएसएस जैसे कार्यक्रम काफी हद तक कारगर हैं। बशर्तें पूरे देश के बच्चों को इससे जोड़ा जाए। यह काम राज्य सरकारों तथा संबंधित संस्थाओं को करना चाहिए तभी स्टूडेंट पुलिस कैडेट जैसे कार्यक्रम सफल और सार्थक होंगे।

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