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पालमपुर सैन्य स्टेशन इसलिए बन गया है मिसाल

पालमपुर आर्मी कैंप

सशस्त्र बल या तो छावनियों (कैंटोनमेंट) में रहते हैं, जिनके रखरखाव एवं सुविधाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी डिफेंस एस्टेट्स कैडर (डीजीडीई) की होती है या वे सैन्य केंद्रों में रहते हैं जिनका संचालन बिना डीजीडीई के हस्तक्षेप के, सैन्य बलों द्वारा किया जाता है।





देश भर में भूमि घोटालों के मामले सामने आने के बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने विभाग को अपने काम में सुधार लाने को कहा था। रक्षा लेखा के महालेखा नियंत्रक ने व्यापक स्तर पर फैली अनियमितताओं के कारण डीजीडीई को भंग करने की सिफारिश की थी। इसकी सिफारिशों में डीजीडीई के कार्यों, गतिविधियों एवं विशेषज्ञ श्रमबल का तीनों सेनाओं के भूमि निदेशालयों में हस्तांतरण किया जाना भी शामिल था। बहरहाल, इसके अधिकारों में कटौती करने वाली अन्य सिफारिशों की तरह यह सिफारिश भी दब कर रह गई।

हालांकि छावनियां साफ सुथरी होती हैं, पर डीजीडीई के नियंत्रण के तहत उनकी सेवाएं अपेक्षित स्तर की नहीं होतीं। ऐसा ही मामला सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) द्वारा संचालित टाऊनशिप के साथ भी है जहां सुविधाओं के रखरखाव पर सबसे कम ध्यान दिया जाता है। दूसरी तरफ सैन्य केंद्र काफी व्यवस्थित होते हैं और उनमें सुविधाएं भी बेहतर होती हैं।

पालमपुर सैन्य केंद्र इसका एक बड़ा उदाहरण है जहां की सुविधाओं और व्यवस्था ने यहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में काफी बढोतरी कर दी है। पालमपुर केंद्र का दौरा करने पर उन सभी लोगों की आंखें खुल जाएंगी जो जीवन स्तर में सुधार लाने तथा सामान्य उपयोग के लिए बुनियादी ढांचे के प्रबंधन को बेहतर बनाना चाहते हैं, चाहे वे डीजीडीई के सदस्य हों, नगरपालिकाएं हों या बड़ी सार्वजनिक कंपनियों द्वारा संचालित स्वतंत्र टाऊनशिप हों। पालमपुर में सुविधाओं का निर्माण न्यूनतम खर्च के साथ किया गया है। वे आत्मनिर्भर हैं और अपने निवासियों के स्वास्थ्य की वास्तव में फिक्र करती हैं।

स्वच्छता, नियमितता की व्यवस्था एवं सुख साधन के प्रावधान समेत वे सारी सुविधाएं जो ज्यादातर सैन्य कैंटोनमेंट के लिए एक समान हैं, पालमपुर में भी हैं, लेकिन यहां और भी बहुत कुछ है जो इसे दूसरों से अलग करता है।

सैन्य केंद्रों पर मंडरा रहे सुरक्षा खतरों के वर्तमान माहौल में पालमपुर ने एकीकृत घटना नियंत्रण केंद्र (आईसीसी) का निर्माण किया है  जहां 24 घंटे पहरेदारी की सुविधा है। आईसीसी अत्याधुनिक वीडियो कैमरों के जरिये केंद्र की निगरानी करता है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूरत में  कैटोंनमेंट के विभिन्न सेक्टरों में थोक में संदेश भेजने तथा सावधान करने से संबंधित उपकरण लगाए गए हैं। निवासियों को पूर्व चेतावनी देने की सुविधा में और इजाफा करने के लिए सार्वजनिक रूप से संबोधित करने की सूचना प्रणाली है जो पूरे केंद्र को कवर करती है। यह किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा उल्लंघन होने पर निवासियों को आगाह कर देता है।

विविध सैन्य इकाइयों वाले इस केंद्र में कागज जलाए जाने की मनाही है। सभी अपशिष्ट कागजों को जमा कर उन्हें एक सेंट्रल फैसिलिटी में भेजा जाता है जहां फाइल कवर, नोट पैड, गिफ्ट बैग आदि सहित नियमित उपयोग की वस्तुएं बनाने के लिए रिसाइकिल किया जाता है। चूंकि यह उन सामग्रियों का उपयोग करता है जो वैसे भी नष्ट हो जातीं, इसलिए यह सुविधा केंद्र आसानी से आत्म निर्भर बना रहता है।

अपशिष्ट प्रबंधन भी ज्यादातर नगरपालिकाओं एवं कैंटोंनमेंट की तुलना में अलग है। रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) सुनिश्चित करता है कि यहां के निवासी लापरवाही से कोई चीज बर्बाद न करें। इस केंद्र में रोजाना लगभग 1500 किग्रा अपशिष्ट उत्पन्न होता है जिनमें से लगभग आधे बायोडिग्रेडेबल होते हैं। इन्हें एक जैविक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र के माध्यम से उपभोग योग्य उर्वरक/खाद में तब्दील कर दिया जाता है जो निवासियों द्वारा प्रयोग में लाया जाता है।

प्रधानमंत्री के कैशलैस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लक्ष्य की ओर बढ़ने के एक कदम के रूप में, यह केंद्र सामान्य नियमों से भी आगे चला गया है। देश भर में तीनों सेनाओं द्वारा संचालित किए जाने वाले सभी सैन्य कैंटीनों में कोई भी सौदा नकदी के माध्यम से नहीं होता। पालमपुर इससे भी आगे बढ़ गया है। इसने अपना खुद का स्मार्ट कार्ड लागू किया है, जो सब्जियों एवं किराने की दूकानों तथा कैफेटेरिया समेत केंद्र द्वारा प्रदान की जाने वाली सभी सुविधाओं के लिए स्थानीय रूप से उपलब्ध है। नकदी स्वीकार्य नहीं है।

निवासियों को उनकी रोजमर्रा की आवश्यकताओं में सहायता करने के लिए तथा दफ्तर के समय में वाहनों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए निवासियों के पास पूरे केंद्र में चलने वाली बैट्री चालित कारों का एक संग्रह उपलब्ध है। यह निवासियों को उनके अपने वाहन के उपयोग से बचाने में मदद करता है और इस प्रकार, ईंधन की बचत करता है। यह छोटे बच्चों वाले परिवारों के लिए भी लाभप्रद है जिन्हें रोजमर्रा की चिकित्सा संबंधी या सामाजिक सुविधाओं की जरुरतों के लिए दूकानों पर जाने की आवश्यकता पड़ती है।

बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए छावनी के भीतर सेना के प्रतिष्ठानों को आपूर्ति की जाने वाली सभी कच्ची सब्जियों को केंद्रीकृत तरीके से ओजोन एयर स्प्रेयर का उपयोग कर साफ किया जाता है जिससे कि नुकसानदायक रसायनों को हटाया जा सके जिनका उपयोग कृत्रिम रूप से पकाने के लिए किया जाता है।

अगर सीमित राजस्व वाला एक सैन्य केंद्र अपने निवासियों को जीवन स्तर को बढ़ाने के लिए ऐसी सुविधाएं प्रदान कर सकता है तो इसका अनुकरण आसानी से छावनी बोर्डों, नगरपालिकाओं एवं पीएसयू टाऊनशिप द्वारा भी किया जा सकता है जिनके पास राजस्व के कई सारे स्रोत होते हैं। अपने निवासियों की फिक्र करने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों के लिए इस स्थान की यात्रा करना बेहद जरूरी है।

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है।

ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

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