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पाक पर और नकेल कसेगी इन समेकित युद्ध समूहों के निर्माण से

बीएसएफ
फाइल फोटो

सेना ने घोषणा की है कि इस साल के आखिर तक पाकिस्तान के साथ लगी पश्चिमी सीमा के लिए वह दो-तीन समेकित युद्ध समूहों (आईबीजी) का निर्माण करेगी। आक्रामक एवं रक्षात्मक भूमिकाओं के लिए अलग अलग आईबीजी होंगे। इसके बाद ऐसा ही मॉडल चीनी मोर्चे के लिए भी बनाया जाएगा। आईबीजी की स्थापना वर्तमान संगठनात्मक संरचनाओं एवं पाक सीमा से लगे रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में चलंत युद्धकला की कमियों के विस्तृत विश्लेषण का परिणाम है।





भारत को हमेशा से पाक से नाभिकीय खतरा महसूस होता रहा है। इस वर्ष बालाकोट स्ट्राइक के साथ ही वह खतरा भी दूर हो गया। नाभिकीय माहौल में जमीन आधारित सैन्य अभियानों की योजना बनाई जाती रही है। पाक ने नास्र मिसाइल का विकास किया है  जो एक सामरिक न्यूक्लियर मिसाइल है। पाक हमेशा धमकी देता रहा है कि वह अपने क्षेत्र से ही इसका इस्तेमाल भारतीय सेनाओं पर कर देगा। इस कदम के द्वारा उसे उम्मीद है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली आलोचनाओं को दबा देगा। इसके अतिरिक्त, पाक की छावनियां भारत की तुलना में सीमा से अधिक करीब हैं, इसलिए वह अपनी रक्षात्मक संरचनाओं को भारत की आक्रमक संरचनाओं के उनके लांचिंग पैड पर पहुंचने के मुकाबले अधिक तेजी से तैनात कर सकता है।

पाक को हासिल इस लाभ का मुकाबला करने के लिए, भारत ने ‘कोल्ड स्टार्ट‘ सिद्धांत का अनुसरण किया जिसका अर्थ है ‘लाइन ऑफ मार्च‘ से सैन्य अभियान आरंभ करना। बहरहाल उसकी संगठनात्मक संरचनाएं इस अवधारणा के अनुकूल नहीं थी। इसके लिए बिल्कुल सटीक संगठनों की आवश्यकता थी जो विशिष्ट दायित्व निभाने और विशिष्ट क्षेत्र में अंजाम देने में सिद्धहस्त हो। इस प्रकार आईबीजी की अवधारणा का जन्म हुआ। चूंकि यह एक नया विचार था और इसके लिए वर्षों से आजमाए और परीक्षण किए गए मानक संगठनों को अलग रखा जाना था इसलिए आरंभ में इसका कुछ प्रतिरोध हुआ।  इससे उबरने में समय लगा।

आईबीजी की स्थापना करने का फैसला पिछले वर्ष लिया गया। इस वर्ष इनका निर्माण वर्तमान संरचनाओं के भीतर से ही किया गया और लगभग वास्तविक समय और परिदृश्यों में कड़ी मशक्कत और अभ्यासों से इसे गुजारा गया। जैसे ही इस अवधारणा को मान्य किया गया, सैन्य कामंडरों के कॉलेजियम में इस पर चर्चा की गई और इसे स्वीकृति दी गई। अब यह प्रस्ताव अनुमोदन के लिए रक्षा मंत्रालय को भेज दिया गया है।

सेना की वर्तमान संगठनात्मक संरचनाएं ब्रितानी द्वितीय विश्व युद्ध के मॉडल पर आधारित है जिसमें कमांड, कोर, डिवीजन और ब्रिगेड शामिल हैं। प्रत्येक लेवल ने सबसे नीचे के ब्रिगेड, जिसके तहत तीन या इससे अधिक बटालियन थी, तक अगले निम्न लेवल की दो या तीन संरचनाओं को कमांड किया। लगभग 10,000 जवानों से निर्मित्त सहायक टुकडि़यों के साथ साथ तीन इन्फैन्ट्री ब्रिगेड एवं एक आर्टिलरी ब्रिगेड के साथ मानक डिवीजन को मूलभूत लड़ाकू विन्यास (फॉर्मेशन) माना गया क्योंकि इसमें सभी शस्त्र और सहायक सेनाओं सहित सेनाएं शामिल थीं।

वर्तमान संगठन नाभिकीय माहौल, संचार एवं वास्तविक समय सूचना की उपलब्धता और तोपखाने की दूरस्थ तथा सटीक गोलीबारी सहायता सहित अन्य प्रौद्योगिकियों में बढोतरी समेत सैन्य अभियानों में बदलाव की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता था। संगठन की संरचनाएं लगभग एकसमान ही होती थीं जिससे वे विशिष्ट दायित्वों के अनुकूल नहीं होती थीं। अब इन कमियों को आईबीजी के माध्यम से दूर कर दिया गया है।

प्रत्येक आईबीजी अपनी विशिष्ट भूमिका तथा दायित्व के बिल्कुल योग्य होगा। इसकी संरचना में एक ब्रिगेड से अधिक लेकिन एक डिवीजन से कम की संख्या शामिल होगी। इस प्रकार, यह एक हाइब्रिड संगठन होगा। इस उन तत्वों से निर्मित्त होगा जो सीधे इसके मिशन में सहयोग देंगे। इस प्रकार  सरल शब्दों में कहा जाए तो यह मिशन आधारित होगा। इससे कई प्रकार के लाभ हासिल होंगे।

सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह होगा कि एक अधिक चुस्त दुरुस्त और अधिक गतिशील संरचना होने के कारण, आईबीजी अधिक तेजी से आगे बढ़ेगा और अधिक गहरे घुसकर पाकिस्तान को प्राप्त होने वाले उस हर लाभ को समाप्त कर देगा जिसके लिए पाकिस्तान अपनी रक्षात्मक संरचनाओं को सक्रिय बनाता रहा है। अगला लाभ यह होगा कि इसकी आवाजाही का विस्तार व्यापक होगा जिससे सामरिक नाभिकीय हमला करने और भारत के आक्रमण को रोकने की की पाकिस्तान की क्षमता बाधित होगी। अपने संगठन के भीतर अंतर्निहित गोलीबारी सहायता के साथ, इसे हमला करने के समय पर अतिरिक्त इकाइयों से सहायता लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह हर प्रकार से आत्म निर्भर होगा। तेजी से हमला करने की योजना के तहत इसका स्थान सीमा के करीब रखा जाएगा।

आईबीजी के निर्माण के साथ डिवीजन मुख्यालय की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। आईबीजी सीधे कोर मुख्यालय के तहत ऑपरेट करेगा जिससे कमान के स्तरों में कमी आएगी और यह सर्वोच्च स्तर पर तैयार योजना के अनुरूप कार्य करेगा। अगर किसी प्रकार की अतिरिक्त संसाधन की आवश्यकता होगी तो इसे आरंभ किए जाने से पूर्व आवंटित कर दिया जाएगा।

चूंकि इसकी संख्या एक डिवीजन की तुलना में कम होगी, यह डिवीजन स्तर पर समग्र संख्याबल में भी कमी लाएगा।  साथ ही स्टाफिंग को भी प्रभावित करेगा। इससे अंततोगत्वा राष्ट्रीय स्तर पर भी संख्याबल में कमी आएगी। मिशन केंद्रित आईबीजी का निर्माण कई प्रकार से सेना की युद्ध क्षमता को बढ़ाएगा और पाकिस्तान के लिए खतरे और बढ़ाएगा। सेना के आधुनिकीकरण के लिए यह एक सही कदम है।

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है। ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

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