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पाक को हर हाल में मुंह तोड़ जवाब देने की जरूरत

बीएसएफ जवान को आखिरी सलामी

पाकिस्तान ने एक बार फिर छल, कपट, धोखा और वहशीपन का सहारा लेकर यह बता दिया है कि उसकी कही बातों पर विश्वास करने का सीधा मतलब है जानबूझ कर धोखा खाना। गत मंगलवार रात भर जिस तरह पाक रेंजर्स ने जम्मू संभाग के सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर की चमलियाल पोस्ट को निशाना बनाया, गश्त कर रहे सीमा प्रहरियों पर फायरिंग की और घायल साथियों के बचाव में आए जवानों पर मोर्टार के गोले दागने की हरकत की वह युद्ध विराम के बीच भारत की पीठ पर छुरा घोंपने जैसा है। अब बहुत हो चुका। भारत सरकार सेना और सशस्त्र बलों को तत्काल पाक को मुंह तोड़ जवाब देने का मन बना लेना होगा और इस पर अमल कर ही हम शहीदों के सर्वोच्च बलिदान का बदला ले सकेंगे। एक माह में सरहद पर आठ जवानों की शहादत कोई सामान्य बात नहीं। यह वक्त सटीक कार्रवाई करने का है ताकि पाकिस्तान यह अच्छी तरह से महसूस कर सके कि उसकी बार-बार की नापाक हरकतें अब उसी पर भारी पड़ रही हैं।





सीमा पर जवाबी कार्रवाई करते जवान

यह शर्मनाक है कि पाकिस्तान बार-बार अपनी कही हुई बात से मुकरता है और बाद में वही करता है जिस बात को न करने की सौगंध खा चुका होता है। गौरतलब है कि बीते महीने दोनों देशों के बीच डीजीएमओ स्तर की वार्ता, इसके बाद 04 जून को बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स की सेक्टर कमांडर स्तर की वार्ता, 12 जून को हुई टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद जम्मू अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर शांति और धैर्य बनाए रखने की सहमति बनी थी। पर इसके बाद भी हमले को अंजाम देकर उसने साबित कर दिया कि उसकी कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। इन विरोधाभासों के बीच क्या यह जरूरी नहीं कि हमें हर वक्त, हर बात पर अतिरिक्त सतर्कता व सावधानियां बरतनी चाहिए ? जब पता था कि पाकिस्तान ऐसा कर सकता है, जैसा कि वह पहले भी कर चुका है तो सीमा पर गश्त कर रहे बीएसएफ के जवानों और उनकी सहायता के लिए पहुंचे साथियों की अतिरिक्त सुरक्षा पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया ?

शहीद असिस्टेंट कमांडेंट जितेंद्र सिंह

शहीद असिस्टेंट कमांडेंट जितेंद्र सिंह

 

देखने में आया हे कि पाकिस्तान तभी बाज आता है जब उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाता। ऐसे जवाब के बाद उसके तेवर बदल जाते हैं और वह गिड़गिड़ाने जैसी मुद्रा में आ जाता है। पिछले महीने जब उसे मुंह तोड़ जवाब मिला था तो घबराकर उसने बैठक व बातचीत का नाटक रचा, पर धोखे से हमला करने से बाज नहीं आया। उसकी इन्हीं हरकतों व शैली को समझकर बेहद सधे कदमों से आगे बढ़ने की जरूरत है। यह ठीक है कि भारत की मंशा रहती है कि वह पाकिस्तान से आगे बढ़कर संबंधों को सुधारे। सीमा पर शांति बहाली हो। और दोनों देशों में नजदीकियां बढ़ें। लेकिन जब पाकिस्तान बार-बार संघर्ष विराम कर अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता तो उसे भारी भरकम जवाब मिलना ही चाहिए। हमें याद रखना होगा कि धोखे और चूक में हुई शहादतें परेशान करने वाली होती हैं। इस साल सीमा सुरक्षा बल के 11 जवानों की शहादत एक बड़ी क्षति है।

इस बात में कतई संदेह नहीं कि संर्घष विराम के उल्लंघन पर पाकिस्तान को उचित जवाब दिया जाता है, उसे मुंह की खानी पड़ती और वह गिड़गिड़ाने के अंदाज में आ जाता है। पर इसमें छिपी उसकी कुटिल मानसिकता को समझना होगा और उसी के आधार पर सशस्त्र बलों और सेना को समग्र रणनीति बनानी होगी।

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