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पाक फिर दे रहा है आतंक को हवा

आतंकी
फोटो सौजन्य- गूगल

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा आतंकवादियों के खात्मे के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑल आउट के बीच यह खबर कान खड़े करने वाली है कि आजाद कश्मीर (PoK) में 16 आतंकी शिविर सक्रिय हैं और यहां आतंकवादियों को कश्मीर घाटी में घुसपैठ कराने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सेना को इस बाबत खुफिया जानकारी मिली है कि ये शिविर हाल में ही बनाए गए हैं और इसका संचालन पाकिस्तानी सेना तथा आईएसआई की मदद से किया जा रहा है। यह तो तय है कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से जल्दी बाज आने वाला नहीं है। उसकी कथनी-करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। पूरी दुनिया में आतंक को शह देने, आतंकवाद की फसल उगाने के नाम पर उसकी थू-थू हो रही है। फिर भी वह अपनी ऐसी कारस्तानियों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भले ही आतंकी अड्डों को खत्म करने के मसले पर भारत से बातचीत करें लेकिन पाकिस्तान पर भरोसा इसलिए नहीं किया जा सकता कि वह पहले भी ना जाने कितनी बार भारत के साथ धोखा कर चुका है।





यह सही है कि पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा बालाकोट में आतंकी अड्डों को खत्म करने के लिए की गई सर्जिकल स्ट्राइक का असर पाकिस्तान पर पड़ा है। वह भारत के नए रूप, नए तेवर तथा पराक्रम से सहमा भी है। लेकिन वह कब अपनी पुरानी चालबाजियों, कारनामों, हरकतों को अंजाम देने लगे, कहना मुश्किल है। आजाद कश्मीर में 16 नए आतंकी शिविरों के बनाने की खुफिया खबर को इसी परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। पाकिस्तान पर विश्वास करने से बेहतर है कि उस पर आंख-कान से कड़ी निगरानी रखी जाए और उसे उसी की भाषा में आक्रामक जवाब दिया जाए। प्रहार ऐसा हो कि वह बिलबिला उठे। आम चुनाव के बाद भारतीय जनमानस प्रधानमंत्री मोदी की इस सशक्त दूसरी पारी से ऐसे ही प्रहार की उम्मीद रखता है।

सुरक्षाबल जम्मू-कश्मीर घाटी में ऑपरेशन ऑल आउट के तहत लगभग रोज ही आतंकवादियों और उनके कमांडरों को मौत के घाट उतार रहे हैं। रात-दिन युद्धस्तर पर की जा रही कार्रवाइयों से आतंकियों के हौसले पस्त हैं। कुछ दिन पहले आतंकी कमांडर जाकिर मूसा के मारे जाने के बाद आतंकी संगठन हताश हैं, वे कश्मीरी युवाओं का ब्रेनवाश कर पाने में नाकामयाब हो रहे हैं। स्थानीय मदद का नेटवर्क पुलिस, अर्धसैनिक बलों तथा सेना ने इस कदर तोड़ दिया कि आतंकियों संगठनों को यहां के बाशिंदों से न के बराबर मदद मिल पा रही है। पुलवामा हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद गुट का सफाया सेना ने कर दिया है। पिछले साल जिस तरह से लश्कर-ए-तैय़बा, जैश-ए-मोहम्मद, गजवातुल हिंद, अल-बदर जैसे आतंकी संगठनों के कमांडर मारे गए वह सुरक्षाबलों की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सुरक्षाबल साल 2019 के लिए बने अपने मिशन पर लगातार काम कर रहे हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि आतंकी खून से सनी अपनी रणनीति पर चलते हैं। जिसमें कई बार हमारे बहादुर जवान शहीद हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी यह है कि राज और समाज शहीदों के परिजनों की अनदेखी कतई न करें। यह बात भारत के हर नागरिक को बड़ी शिद्दत से समझनी होगी और उस पर चलना होगा।

यह बात प्रशंसनीय कही जाएगी कि पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार के नए तेवर देश-दुनिया ने देखने शुरू किए हैं। ऐसे में आतंकी और पड़ोसी देश पाकिस्तान भले ही आजाद कश्मीर में हताश-निराश मन से आतंकी शिविरों में युवाओं को सचेत प्रशिक्षित कर भारत के सीमा में घुसपैठ कराने के मंसूबे देख रहा हो, पर भारत के सैन्य बलों की निगाहें और ताकत पाक की कायराना हरकतों को विफल करने के लिए पर्याप्त हैं।

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