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पाक को कभी भी भारी पड़ सकती है भारत को उकसाने की कोशिश

इमरान खान

अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर पड़ोसी देश पाकिस्तान जिस तरह लगातार गोलीबारी कर तथा उसकी आड़ में सीमा पार से आतंकवादियों को कश्मीर में घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है उससे पूरी तरह स्पष्ट है कि वह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने क बाद आतंक का सहारा लेकर भारत को परेशान करना चाहता है। पूरी दुनिया जान चुकी है कि पाकिस्तान आतंक की फैक्ट्री है और लंबे समय से वह इसी करतूत में लगा हुआ है। जब सच पकड़ा जाता है तो वह झूठ का सहारा लेता है। पाकिस्तान के हुक्मरान और वहां की सेना के शीर्ष अधिकारी आतंकी गतिविधियों को हमेशा ही सिरे से नकारते आए हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान को समझ ही नहीं आ रहा है कि वह कश्मीर मसले पर दुनिया को कैसे समझाए। दूरदर्शिता इसी बात में है कि पाकिस्तान इस सच को स्वीकार कर ले कि जम्मू-कश्मीर केवल और केवल भारत का मामला है। उसका इस मसले से कोई लेना देना नहीं है। उसे इस बात को भी जल्द से जल्द मान लेना होगा कि सीजफायर का लगातार उल्लंघन कर बार-बार सीमा की चौकियों, रिहायशी बस्तियों को निशाना बनाकर भारत को उकसाने की कोशिश कभी भी भारी पड़ सकती है।





दरअसल पाकिस्तान भारत की सैन्य क्षमता को जानता तो है पर यहां के नेतृत्व के क्षमता को बार-बार कम आंक बैठता है। इसी चक्कर में वह अब तक चार बार बुरी तरह मुंह की खा चुका है। यहां तक कि पुलवामा हमले के बाद भी उसे नहीं लगा था कि भारत उसकी सीमा में घुसकर कार्रवाई करेगा तथा आतंकी शिविरों को नेस्तनाबूद कर देगा। उसे लग रहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक की अनुमति भारत का नेतृत्व नहीं देगा। पर उसका दांव उल्टा पड़ा। वह अब तक बिलबिलाया हुआ है। सच्चाई यह है कि आज पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान का झूठ बेनकाब हो गया है। उसकी बात सुनने को कोई राजी नहीं हो रहा। लेकिन इन हालात के बीच भारत को भी यह बात समझनी होगी कि झूठ-फरेब के साथ जीने वाले पड़ोसी मुल्क को अपनी शाख की रत्ती भर भी परवाह नहीं है। जिसका खामियाज़ा पाकिस्तान की जनता झेल रही है। भारत को नए सिरे से पाकिस्तान की हर मंशा को बेहद बारीकी से समझना होगा और उसी के अनुरूप कार्यनीति बनानी होगी।

हकीकत यह है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बौखलाया पड़ोसी चुप नहीं बैठा है। उसकी कोशिश है कि घाटी में आतंक के जरिए अराजकता फैले। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद औऱ हिजबुल मुजाहिदीन कश्मीर घाटी में नागरिकों को धमका रहे हैं। रक्षा सूत्रों के मुताबिक घाटी में अभी भी 270 आतंकी सक्रिय हैं। परेशान करने वाली बात यह है इसमें सीमा पार से ज्यादा स्थानीय आतंकी हैं। एलओसी के बेहद करीब भी पाकिस्तानी सेना की ओर से कई लॉन्च पैड फिर से सक्रिय हो गए हैं। गुरेज, तंगधार, उड़ी, पुंछ, नौशेरा, सुंदरबनी, आरएसपोरा और कठुआ जैसे इलाकों में 250 से ज्यादा आतंकी हरकत में हैं। इन्हीं पहलुओं के मद्देनजर भारत को चाक-चौबंद, सोची-समझी सामरिक नीति के साथ कूटनीतिक रणनीति बनाने तथा उस पर तत्काल काम करने की जरूरत है। पाकिस्तान को भी विश्व के नए परिदृश्य को देखते हुए बेहद ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए कि वह आज कहां खड़ा है तथा भारत कहां पहुंच गया।

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