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सेना में आत्महत्या के कारण नहीं, हल तलाशने की जरूरत ?

सुरक्षाबल

भारतीय सेना के तीनों अंगों के जांबाज अफसरों और जवानों में लगातार आत्महत्या करने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। यह आत्महंतात्मक कदम इस बात की ओर इंगित करते हैं कि समाज और नौकरी के दौरान किस कदर तनाव और दबाव है और वे घर-परिवार तथा नौकरी के बीच सही सामंजस्य बिठाने में पीछे हो रहे हैं तथा ऐसा दुस्साहसिक कदम उठा रहे हैं। गत दिनों लोकसभा में केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री डा. सुभाष भामरे ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में जो आंकड़ा प्रस्तुत किया है वह बेहद परेशान करने वाला है। रक्षा राज्यमंत्री ने पिछले तीन वर्षों तथा वर्तमान वर्ष का अलग-अलग आंकड़ा और आर्मी, नेवी, एयरफोर्स में अफसरों तथा जवानों द्वारा की गई आत्महत्या की संख्या बताई है। वर्ष 2016 में भारतीय थलसेना के जेसीओ व समकक्ष रैंक के 100 सैन्यकर्मियों ने आत्महत्या की है। निश्चय ही ऐसे आंकड़ें सेना और समूचे देश के लिए आंख खोलने वाले हैं।





विशेषज्ञों के अनुसार आत्महत्या का सीधा संबंध मन की उदासी यानी अवसाद से है। अवसाद एक मानसिक विकार है जो मन के लगातार दबाव, खिंचाव, तनाव के रहने से होता है। यह विकार किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकता है फिर चाहे वह सैन्यबलों में जांबाजी के साथ कार्य करने वाला सैन्यकर्मी ही क्यों न हो ? ऐसा व्यक्ति लंबे समय तक नकारात्मक विचार, लगातार दुख और उदासी से घिरा रहता है। सेना ने आत्महत्या की ओर उन्मुक होने वाले कारणों का खुलासा किया है जिनमें पारिवारिक, घरेलू मसले, वैवाहिक संबंधों में अनबन तथा व्यक्तिगत मुद्दे प्रमुख हैं।

निश्चय ही भारतीय सेना और सैन्यबल देश-दुनिया के बदले हालात में जान-जोखिम से भरी चुनौतियां का सामना कर रही है। ऑपरेशनल एरिया में लगातार तैनाती मन पर प्रभाव डालती है। ऊपर से घर-परिवार की जिम्मेदारियां, बच्चों की शादी-पढ़ाई, बूढ़े माता-पिता के प्रति कर्तव्य का निर्वहन तथा जमीन के मसले, पत्नी से अनबन, खींचतान मन-मस्तिष्क को एक अंधेरी सुरंग की ओर ले जाती है और विकारग्रस्त सैन्यकर्मी आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है। इस तरह दुनिया की सबसे ताकतवर सेना का प्रशिक्षित तथा अनुभवी अधिकारी या जवान हालात के सामने हार मान लेता है।

इसलिए ऐसे में सरकार को सैन्यकर्मियों में बढ़ रही आत्महत्या की इस प्रवृत्ति की गंभीरता को अति संवेदनशील होकर समझने की जरूरत है। सरकार और खासतौर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री को इस बात का तत्काल आकलन करना होगा कि आखिर क्या वजह है कि सेना द्वारा उठाए जा रहे योग, ध्यान, मानसिक विचार-विमर्श आदि तमाम कदमों के बाद भी सैन्यकर्मी आत्महत्या जैसा कदम उठाने की ओर उन्मुख हो रहे हैं। समाज को भी समझना होगा कि सैनिक हमारे लिए सीमा की हिफाजत के लिए तैनात हैं। ऐसे में उनके घर-परिवार के हर मामले में मदद, सहयोग तथा सम्मान देकर उन्हें मानसिक रूप से तनावमुक्त रखें। आज इसी बात की जरूरत है।

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