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नए कश्मीर के लिए युवाओं का साथ जरूरी…

कश्मीर में बंद
फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद जिस तरह युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें तीन माह के भीतर पचास हजार नौकरियां देने, कश्मीरी छात्रों को अनुच्छेद 370 हटाने के फायदे बताने की कोशिश हो रही है उससे कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार कश्मीर मामले में पूरी सजगता व प्रतिबद्धता के साथ सधे कदमों से तेज चाल चल रही है। उम्मीद की जा सकती है कि केंद्र के फैसले बहुत जल्द घाटी में जमीनी स्तर पर उतरेंगे जो वहां समग्रता के साथ तरक्की व खुशहाली का सबब बनेंगे। खास बात यह भी है कि जम्मू कश्मीर के विकास का जो रोडमैप सरकार ने तैयार किया है उससे आतंकवाद की उल्टी गिनती और तेजी से शुरू हो जाएगी।





गत तीन दशक में आतंकवाद ने घाटी के हर क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया है। यहां तक कि सामान्य जन-जीवन तक को इस कदर चौपट कर दिया कि यहां के बाशिंदों के मन में बार-बार यही भाव उठ रहा था कि आतंक का यह फन आखिर कब और कैसे कुचला जाएगा? लेकिन विगत चार-पांच साल की केंद्र की नीतियों और उठाए गए कदमों से आतंकवाद की जमीन लगभग खिसक चुकी है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद और बदले हालात के बीच आतंकी इतने निराश है कि वह कश्मीरी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। यहां तक कि बुजुर्गों तक को नहीं बख्श रहे। श्रीनगर के पारिमपोरा के बुजुर्ग दुकानदार गुलाम मोहम्मद की आतंकियों द्वारा की गई हत्या को इसी परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। इससे तीन दिन पहले जैश-ए-मोहम्मद गुट के आतंकियों ने दक्षिण कश्मीर के त्राल में खानाबदोश गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के दो युवकों को अगवा कर मौत के घाट उतार दिया था। अब वह दक्षिण कश्मीर में धमकी भरे पोस्टर लगाकर अपनी हताशा दर्शा रहे हैं।

हकीकत में घाटी के युवाओं को साथ लेकर नए सिरे के साथ नया कश्मीर बनाने की पहल और तेज करने की जरूरत है। यह केंद्र सरकार की दूरदर्शी पहल का नतीजा है। आगामी तीन माह में राज्य के युवाओं को पचास हजार से भी ज्यादा नौकरियां दी जाएंगी। खुशहाली का सीधा संबंध रोजगार से है। अभी तक घाटी के बरगालाए गए तमाम युवा टेरर फंडिंग के माध्यम से पत्थरबाज बनते थे और बाद में इन्हीं में से कई आतंकी गुटों में शामिल हो जाते थे। पर अब जम्मू-कश्मीर में नई इबारत लिखी जा रही है। बारोजगार होने के बाद ये कश्मीरी युवा और पढ़ रहे किशोर व युवा ‘धरती का स्वर्ग’ कहे जाने वाले इस भू-भाग पर अपने परिश्रम से विकास की नई गाथा लिखने की ओर कदम बढ़ाएंगे। यह कश्मीर के लिए नया सवेरा होगा। जिसकी आज जरूरत है। साथ ही इस बात के भी प्रयास तेज होने चाहिए कि घाटी में बड़े उद्योग स्थापित किए जाए साथ ही यहां का पर्यटन उद्योग अपने पैरों पर फिर से खड़ा हो सके।

यह अच्छी व दूरगामी पहल है कि केंद्र के पंद्रह से अधिक मंत्रालय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए जल्द से जल्द काम करने के लिए गृह सचिव की अगुवाई में बैठक कर चुके हैं। इस बात की प्रशंसा की जानी चाहिए कि करीब 135 योजनाओं को बहुत जल्द सूबे में शुरू किया जाएगा। इससे कुछ इलाकों तथा कुछ परिवारों तक सीमित विकास का दायरा आम कश्मीरी नागरिक की चौखट तक पहुंचेगा। अभी तक भय और खौफ का ऐसा माहौल था कि दिल्ली से शुरू की गई योजना कश्मीर घाटी की जमीन पर नहीं उतर पाती थीं। हिंसा, खून-खौफ के वातावरण में विकास को मुट्ठी में कैद कर रखा था। सीमा पार के सुनियोजित आतंक और उनके कमांडरों ने जम्मू-कश्मीर की खुशहाली को नजरबंद कर रखा था। आतंकवाद, अलगाववाद और परिवारवाद की तिकड़ी ने कश्मीर के बाशिंदों की रोजी-रीटी के साथ-साथ चेहरे की मुस्कान पर ग्रहण लगा कर रखा हुआ था। अनुच्छेद 370 कुछ राजनीतिक परिवारों, अलगावादियों के लिए रोजी-रोटी का साधन था। यह खत्म होने के बाद सीमा के इस पार और सीमा के उस पार पड़ोसी पाकिस्तान ‘सब कुछ लुट गया की तर्ज पर स्यापा’ कर रहे हैं। बुद्धिमानी इसमें है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान और 370 पर राजनीति की रोटियां सेकने वाले नेता अपनी सोच में जल्द से जल्द परिवर्तन लाएं। घाटी में युवाओं के साथ-साथ आम नागरिकों की तरक्की व बेहतरी से जुड़े कार्यक्रमों को और तेजी से लागू करने की पहल सभी को करनी होगी।

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