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नक्सलियों पर नकेल के लिए और कारगर नीति बने

बस्तरिया बटालियन

केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की बस्तरिया बटालियन को देश को सौंपते वक्त यह कहना कि नक्सलियों का देश में आधार सिकुड़ रहा है, आश्वस्त करने वाला है। करीब एक महीने पहले केन्द्र सरकार ने देश के 126 जिलों में से 44 जिलों को नक्सल मुक्त घोषित किया था। इस दौरान ऐसा देखने में भी आया कि प्रभावित राज्यों के नक्सली गतिविध वाले जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती, स्थानीय पुलिस की सक्रियता और केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं से नक्सलियों के पांव उखड़ रहे हैं और वे इन पुराने इलाकों को छोड़कर नए जंगलों में अपनी जमीन तलाश रहे हैं। इस बात को केन्द्र सरकार ने घोषित भी किया कि देश के 8 ऐसे नए जिले हैं जहां नक्सली अपना आधार तलाशने में जुटे हैं। इस पहलू पर केन्द्र सरकार तथा स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों को विशेष रूप से सजग-सतर्क रहकर कारगर कार्यनीति बनानी होगी ताकि नक्सलवाद का फन वहां खड़ा न हो सके।





यह सही है कि नक्सलवाद अपना वजूद खो रहा है। स्थानीय किशोर, उभरते युवा, खून-खराबे का लगातार दंश झेल चुके वृद्ध इस बात को अच्छी तरह जान चुके हैं कि नक्सलियों के बहकावे में आकर उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ। स्थानीय नागरिकों को अब यह बात भी समझ आ चुकी है कि नक्सली संगठनों के बड़े नेता बड़े शहरों में आलीशान जिन्दगी व्यतीत कर रहे हैं और हम इन खतरनाक जंगलों में रोजी-रोटी तक के लिए मोहताज हैं। माओवादियों के बच्चे देश-विदेश के नामी स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर मुख्यधारा की शानो-शौकत की जिंदगी की राह पर हैं और हमारे बच्चे शिक्षा, नौकरी, संचार, स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं। यही वजह है कि CRPF की पहल से बस्तरिया बटालियन में बस्तर क्षेत्र के वनवासी युवक-युवतियां शामिल हुए हैं। इसमें भी खास बात यह है कि शांत मन की कर्तव्य और निष्ठा से भरी इस बटालियन को बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे इलाकों में तत्काल तैनात किया गया। इस बात से यह साफ जाहिर होता है कि सरकार संवेदऩशील और जागरूक मन से स्थानीय लोगों को मुख्यधारा में शामिल करना चाहती है ताकि माओवादी संगठनों के बड़े नेता अब उन्हें और गुमराह न कर सकें। बटालियन के ही आदिवासी युवक-युवतियां अपने समाज के युवाओं को विकास की लाने का काम करेंगे।

पर केन्द्र सरकार और राज्यों द्वारा चलाई जा रही नक्सल विरोधी मुहिम के दौरान सशस्त्र विद्रोहियों द्वारा की जाने वाली हिंसक घटनाएं यह सवाल जरूर पैदा करती हैं कि आखिर क्या वजह है कि सुरक्षा बलों के लगातार सर्च अभियान, सशक्त ऑपरेशन, कौशल विकास योजना के जरिए युवाओं को बारोजगार करने की पहल, सुरक्षा बलों की सतर्कता के बावजूद ऐसा हो रहा है। इस इलाके में केन्द्रीय गृह मंत्री के दौरे के पहले दंतेवाड़ा में नक्सलवादियों द्वारा एक भीषण विस्फोट में 7 जवानों का शहीद होना तथा दौरे के बाद भी हिंसक वारदातें इस बात की ओर संकेत करती हैं कि अभी भी समग्र रूप से एक कुशल व कारगर नीति की जरूरत है। सटीक रणनीति, लगातार मजबूत निगरानी तंत्र को और विकसित करने की दरकार है।

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