vishesh

61 साल बाद मेरी स्कूल यात्रा

तिलकराज कक्कड़
तिलकराज कक्कड़

तिलकराज कक्कड़ – पूर्व आयुक्त, दिल्ली पुलिस

सभी के लिए इसे पढना जरूरी नहीं है। लेकिन मैं हाल ही में अपने साथ हुई एक घटना को बयान करने के लिए मजबूर हो रहा हूँ। कुछ दिन पहले शायद किसी दिव्य शक्ति के कारण मैं यातायात में फंस गया था, अपने स्कूल के सामने। 61 साल के बाद…। उस स्कूल के सामने… जिसे मैंने 1956 में छोड़ दिया था। मैंने ड्राइवर को गाड़ी ट्रैफिक से बाहर लाने का निर्देश दिया। दोस्तों, मैंने निगम और दिल्ली सरकार के स्कूल में पढाई की है। हिचकते हुए मैं प्रिंसिपल रूम में दाखिल हो गया, उन्होंने मुझे अजीब तरह से देखा। मैंने अपना परिचय दिया और स्कूल से अपने जुड़ाव के बारे में विस्तार से बताया। …और यह भी बताया कि कैसे मैं बिना निमंत्रण के चला आया।





प्राचार्य श्री गिलानी ने इसके बाद अपने दिमाग पर जोर डाला और फिर बड़े स्नेह से स्वागत किया। मेरे अचानक अनुरोध करने पर उन्होंने हायर सेकेंडरी के छात्रों को मेरे साथ कुछ बातचीत करने के लिये बुलाया। कर्मचारियों और छात्रों ने इस अजनबी को, जो अपने बीच का था और अपने सांझ के वर्षों में उन पर खुद को थोप रहा था, सुनने में काफी दिलचस्पी दिखाई। मुझे बुरा लग रहा था। मुझे इस बात से भी दुख हुआ कि छह दशक से ज्यादा समय के बाद भी वहाँ सुविधाओं के स्तर पर और बेहतर तथा उद्देश्यपूर्ण ज्ञान प्रदान करने के लिए शिक्षकों की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ था। ज्यादातर छात्र ऊर्जावान और मेहनती नजर आये। हालांकि उनमें कुशाग्रता नदारद थी। तत्काल मैंने अपनी चेकबुक निकाली और कुछ और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए एक लाख रुपये का चेक भेंट किया। आखिरकार, इस स्कूल में ईंट की टेढी-मेढी दीवारें और टिन की सुराख वाली चादरें जो नजर आ रही थीं।

मेरे मित्रों, मैंने यहाँ आने और स्कूल की ज्यादा से ज्यादा मदद करने का फैसला किया ताकि छात्र ऊर्जावान बनें और इस उम्मीद के साथ कुछ बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं कि इन गरीब बच्चों में से कुछ और अधिक ऊंचाइयों को छूने में सक्षम बन सकें। मैं उन्हें आत्मविश्वासी बनाना चाहता हूँ और उन जटिलताओं से भी मुक्त कराना चाहता हूँ जो उन्हें अहसास कराती हैं कि वे सामाजिक जीवन में सिर्फ दूसरे या तीसरे दर्जे के ही बन सकते हैं। और इसके लिए मुझे आपकी मदद की जरूरत होगी। अत: मेरा आपसे अनुरोध है कि मेरे द्वारा शुरु किए गए इस छोटे से कार्य में, अपनी सामर्थ्य के मुताबिक आप अपना दिल और बटुआ खोलें और बतौर क्रास्ड चेक बड़ी या छोटी रकम ” V Principal GBSSS , GTB Nagar , Delhi ” के नाम से मेरे पते T R KAKKAR , D / 284 Ramprastha , Ghaziabad – 201011 पर भेज दें। जैसा कि आपमें से ज्यादातर लोग जानते हैं कि मैं जिस काम का बीड़ा उठाता हूँ, उसे पूरा करता हूँ और यह काम भावनात्मक रूप से मेरे दिल के बेहद करीब है. आने वाले सभी चेक मैं स्कूल के सुपुर्द कर दूंगा। अपने व्हाट्सएप दोस्तों से मैं पहले ही यह अनुरोध कर चुका हूँ। मैं बहुत सकारात्मक सोच का व्यक्ति हूँ और अपनी अपील के सकारात्मक परिणामों के प्रति भी मैं बेहद आशान्वित हूँ।

सादर, टीआरके

(यह सामग्री श्री तिलकराज कक्कड़ की फेसबुक वाल से ली गई है)

Comments

Most Popular

To Top