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अमरनाथ यात्रा से मिलता है कश्मीरियों को लाभ

अमरनाथ यात्रा
फाइल फोटो

अमरनाथ यात्रा कश्मीर के लोगों के लिए  खासकर ऐसे राज्य में, जहां वहां का सबसे प्रमुख व्यवसाय पर्यटन अलगाववादियों और आतंकियों की करतूतों के कारण तबाह हो रहा है, रोजगार का सर्वश्रेष्ठ अवसर है। विभिन्न स्थानों पर दुकानदार और व्यापारी चलने में मददगार छड़ी, पूजा की सामग्री, कश्मीरी शॉल और हस्तशिल्प बेचने के लिए कियोस्क लगाते हैं। अलावा इसके  लोग टट्टूओं के साथ भी अपनी सेवाएं देते हैं और पालकी वाले तीर्थयात्रियों को दर्शन के उनके गंतव्य स्थान पर ले जाने के लिए शारीरिक श्रम भी करते हैं।





व्यवसाय के वहां विपुल अवसर हैं और वर्ष 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक एक सीजन में यात्रा के दौरान चलने में मददगार छड़ी की बिक्री 40 लाख रुपये से अधिक की हुई थी। यात्रा के दौरान इन व्यवसायों से जुड़े एवं अपनी सेवाएं देने वाले ये लोग राज्य के लगभग सभी हिस्सों के होते हैं। इस यात्रा में सहभागिता करने से पूर्व उन्हें सख्त सुरक्षा जांचों से गुजरना पड़ता है। उनका जीवन यापन भी कठिन परिस्थितियों में होता है। केवल इसी सीजन की उनकी कमाई उनके प्रयासों को वाजिब ठहराती है।

पारंपरिक रूप से  कश्मीरी हमेशा से इस यात्रा के समर्थक रहे हैं। यात्रा के दौरान दुर्घटनाओं के कारण फंसे यात्रियों की मदद करने के लिए स्थानीय निवासियों के सहयोग की कई खबरें आई हैं। एक सफल यात्रा का अर्थ एक बेहतर पर्यटन सीजन की संभावना भी है। इस दौरान हिंसा का बहुत नकारात्मक प्रभाव रहा है।

इस यात्रा में भाग लेने के लिए देश के कोने से कोने से और हर उम्र के लोग आते हैं जो श्रद्धा, भक्ति और उम्मीद से भरे हुए होते हैं। उनका देश की सुरक्षा व्यवस्था में विश्वास होता है और इसीलिए वे इस यात्रा में शरीक होते हैं। वे इस कठिन यात्रा और कठोर जलवायु स्थितियों के लिए तैयार रहते हैं। यह भी सही है कि अगर उनकी अच्छी तरह से देखभाल की गई तो वे दुबारा भी राज्य का दौरा करना पसंद करेंगे। अमरनाथ जाने वाले अधिकांश लोगों के लिए यह उनकी पहली यात्रा होती है। कश्मीर आने से पहले कश्मीर के बारे में उनकी एकमात्र धारणा मीडिया में छपी खबरों पर आधारित होती है। मीडिया की कश्मीर से संबंधित खबरों में आतंकियों से मुठभेड़, पत्थरबाजी और बंद की खबरें ही प्रमुख होती हैं। इससे राज्य की नकारात्मक छवि बनती है।

तीर्थयात्री अपनी यात्रा के दौरान कई स्थानों पर कुछ समय के लिए रुकते हैं, स्थानीय कश्मीरियों से मिलते हैं जो आबादी का अधिकतर हिस्सा होते हैं और धीरे धीरे उनकी एक अलग छवि बनने लगती है। बेस कैंप के बाद तीर्थयात्रियों की परस्पर मुलाकात कड़ी मेहनत करने वाले स्थानीय निवासियों से होती है जो खुद को कठिनाई में डालकर तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए तत्पर रहते हैं। इससे भी कश्मरियों के बारे में उनकी पूर्वधारणा और बदलती है। वे महसूस करने लगते हैं कि अधिकांश कश्मीरी मेहनतकश लोग हैं जो जीने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और अपने परिवार के लोगों के लिए उतनी ही फिक्र करते हैं जितनी कोई दूसरा भारतीय। यात्रा के दौरान तीर्थयात्री कश्मीर के सर्वाधिक नयनाभिराम क्षेत्रों से गुजरते हैं।

इस प्रकार  यात्रा के समापन पर तीर्थयात्री एक तरह से कश्मीर के राजदूत से बन जाते हैं जो उसकी असली खूबसूरती को उभारते हैं और आम कश्मीरियों के बारे में अच्छी बातें फैलाते हैं क्योंकि ऐसे अधिकांश लोगों का बेस कैम्प से उनकी ट्रैकिंग के दौरान उनके साथ लंबी बातचीत होती है।

स्थानीय उग्रवादियों के साथ ज्यादातर आतंकी समूह इस यात्रा के महत्व और आम कश्मीरियों इससे होने वाली आय से वाकिफ हैं। इसलिए  वे जानते हैं कि इस यात्रा पर कोई भी हमला उन्हें और अलग थलग ही कर देगा। पिछले वर्ष  स्थानीय हिजबुल मुजाहिदीन नेताओं ने तीर्थयात्रियों को एक संदेश भेजा था और कहा था कि, ‘ आपको किसी भी सुरक्षा की जरूरत नहीं है क्योंकि आप हमारे मेहमान हैं। ‘ इस वर्ष, उन्होंने चुप्पी बनाये रखी है क्योंकि अब लगभग कोई नेतृत्व नहीं बचा है।

पाकिस्तान के भीतर  एक अलग धारणा है। यात्रा पर किसी भी हमले से देश भर में दंगे भड़क जाएंगे। इससे अंदरूनी तनाव बढ़ेगा और पाक के अफवाह तंत्र को लाभ पहुंचेगा। इस प्रकार वैसे आतंकियों को जिसकी वह घुसपैठ करवाएगा, को इस यात्रा पर हमले करने के निर्देश दिए जा चुके होंगे। अगर इन हमलों में बड़ी संख्या में लोग हताहत होंगे तो भारत सीमा पर प्रत्युत्तर देने को बाध्य होगा।

यात्रा की सुरक्षा के लिए ऐसे हमलों को रोकना अनिवार्य है। इसमें रास्ते, ठहरने के स्थानों तथा वहां भी जहां पैदल यात्रा होती है, की सुरक्षा शामिल है। प्रत्येक वर्ष सबक लिए जाते हैं और उन पर अमल किया जाता है। तैनात बलों की सहायता ड्रोन एवं अन्य निगरानी उपकरणों से की जाती है, जिसमें सबका उद्वेश्य सुरक्षा बढ़ाना होता है।

जो इन सबके संचालन से जुडे होते हैं उनके लिए यह एक भयावह अनुभव है। अलग अलग भूमिकाओं के साथ कई एजेन्सियां होती हैं जिनके कामकाज को समन्वित करने की आवश्यकता होती है। मौसम, भूस्खलन और दुर्घटनाएं जैसी कई बाधाएं होती हैं। शिविरों को विभिन्न प्रकार की आकस्मिकताओं के लिए तैयार रहने की जरूरत होती है। ड्रिल एवं जिम्मेदारियां पहले से निर्धारित कर दी जाती हैं, फिर भी अप्रत्याशित घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है जो कभी भी घट सकती हैं।

एक शांतिपूर्ण यात्रा से कई प्रकार के लाभ हासिल होते हैं। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। यह स्थानीय लोगों और अंततोगत्वा राज्य सरकार के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। कई स्थानीय लोगों के लिए यह रोजगार का अवसर उपलब्ध कराता है, क्योंकि यह कश्मीरियों के वास्तविक चरित्र का संदेश भी फैलाता है। देश के लिए, यह यात्रा कश्मीर और शेष भारत के बीच के रिश्ते को भी प्रकट करती है।

लेखक का blog:  harshakakararticles.com है और उन्हें  @kakar_harsha पर फॉलो किया जा सकता है। ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।

 

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